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  1. हॉट गर्ल फ्री चुदाई मिल गयी मुझे. मैं उसे उसके घर छोड़ने जा रहा था तो रास्ते में ही उसने मेरा लंड चूत में ले लिया. उसके बाद उसके घर में भी खेल हुआ. फ्रेड्स, आप मेरी चुदाई कहानी में एक ब्यूटीशियन की चुदाई की कहानी मजा रहे थे. पहले भाग ब्यूटीशियन की चूत की गर्मी में अब तक आपने पढ़ा था कि नूर नाम की एक ब्यूटीशियन मेरे साथ चुदने के लिए तैयार हो गई थी और उसने मुझे देर तक चुदाई करने वाली दवा खिला दी थी. अब आगे हॉट गर्ल फ्री चुदाई: दवा खाने के दस मिनट बाद मेरा लंड खड़ा होने लग गया और मेरा दिमाग बिल्कुल काबू में न रहा. मैंने नूर को पकड़ के बेड पे पटक दिया. उसने नाइटी पहनी हुई थी तो मैंने वो खींच कर उतार दी, फिर उसकी पेंटी भी उतार कर फेंक दी. मैंने उसके स्तन को पकड़ लिया. उसके मुँह से आआआ निकल गई. मैंने एक थप्पड़ उसके गाल पर मारा. उसको यह अच्छा लगा, बोली- आज मेरे शौहर बन जाओ, मेरे साथ जैसे मर्जी, जो मर्जी करो मेरे सरताज … मैं तैयार हूं. मैंने कहा- ठीक है, तो फिर चूस ले मेरे लौड़े को … और कर दे इसे चिकना. वो उठी और मुझे पटक कर मेरे लौड़े को लप्प से मुँह में लेकर चूसने लगी. ये बड़ा मजेदार अहसास होने लगा था. मैंने बोला- पूरा अन्दर ले. उसने कोशिश की और तभी मैंने उसके पकड़ कर मुँह चोदने लगा. उसके मुँह से ‘हुक्क हुक्क …’ की आवाज आने लगी. मैंने और तेज झटके लगा दिए. उसने मुझे हाथों से रुकने का इशारा कर दिया तो मैं रुक गया. उसके मुँह में से लार ही लार निकल रही थी और उसका मुँह एकदम लाल हो गया था. मेरा लंड चिकनाई से भरपूर हो गया था. लंड पहले से बहुत टाइट और फूला हुआ था, मुझे लग रहा था कि जल्दी से उसकी बुर में लंड पेल दूँ. मगर उसने मुझे रोका और ट्रिमर मशीन लेकर मेरे लंड की झांटों पर चला दी. अब मेरा लंड क्लीन हो गया था. वो बोली- तेरी झांटें चुभ रही थीं. मैंने कहा- चल रानी आज तेरी चूत और गांड में अपने लंड को सैर करा लाऊं. वो हंस दी और बोली- बस एक मिनट और दो राजा. वो अपना मुँह धोकर और पानी पीकर आ गई. मैंने पहले तो उल्टा लिटाया और उसके चूतड़ों को हाथों से पकड़ कर मजे लिए. वहां से उसकी चूत की फांकें बिल्कुल एक लकीर की तरह दिख रही थीं. फिर वो सीधी हो गई और मैं उसके ऊपर चढ़ गया. उसके गोल गोल मम्मों को जकड़ कर उसे उठाया और हाथों से पकड़ कर उसकी गर्दन में किस करने लगा. नीचे मेरा लंड उसकी चूत के ऊपर फड़फड़ा रहा था, इधर वो हसीन कुड़ी मचली जा रही थी. वो बोली- अब डालो भी यार. क्या जान ही ले लोगे, तब चोदोगे क्या? मैंने कहा- ले ले मना किसने किया है रानी. उसने अपने हाथ से लंड पकड़ा और चूत के छेद पर लगा दिया. वो बोली- पेल. मैंने बोला- नहीं, अभी नहीं करेंगे. वो बोली- यार, क्यों नखरे दिखा रहा है … मैं तेरे हाथ जोड़ रही हूँ. मैंने कहा- नहीं, अभी तो एक घंटा तक अन्दर नहीं डालूँगा. कुछ लंड पिलवाई का नेग लगेगा. ये सुनते ही उसने बाजू में पड़ा अपना पर्स उठाया और एक दो हजार का नोट मेरे मुँह में फंसा कर बोली- ये ले अपना नेग! मैंने सोचा कि आज मौका अच्छा है. मैंने बोला- पैसे नहीं … कुछ और दो! उसने पूछा- कुछ और क्या? मैंने कहा- तेरी गांड भी मारूंगा. वो मना करने लगी. मैंने जिद की तो वो कहने लगी- आज नहीं, फिर कभी देखेंगे. मैं मान गया कि चलो दोबारा भी मिलने की बात कर रही है. मैंने उसे लंड पकड़ कर चूत के छेद में लगाने को कहा. उसने ऐसा ही किया और साथ ही अपने चूतड़ ऊपर को उछाल दिए. मेरा थोड़ा सा लंड चूत में चला गया. वो दर्द से कांप गई और उसने अपने हाथों से चादर को जकड़ लिया. वो बोली- अब दर्द क्यों हो रहा है … कार में तो इतना दर्द नहीं हुआ था. मैंने कहा- तब लंड की मोटाई इतनी ज्यादा नहीं थी. अब दवाई का असर है. वो ‘हम्म’ करके रह गयी. मैंने उसके हाथों को अपने हाथों में लिया और होंठों को अपने होंठों से कस लिया. फिर मैंने लंड पूरे जोर से पेला और धक्के देने लगा. उसने होंठ छुड़ा कर कहा- मुझे चिल्लाने तो दो … रोने दो, तुम अपना काम करो … आज रहम नहीं, मुझे सजा चाहिए है. मेरी चूत चोद फाड़ दो इसे … मुझे रोने दो लेकिन चुदाई मत रोकना. मैंने जोर से झटका दे दिया. मेरा समूचा लंड चूत में समा गया. उधर से उसकी ‘अअह अम्मी मर गई …’ की आवाज आई. मैंने हाथ से गाल पर एक जड़ दिया. कुछ देर बाद वो मस्त होने लगी. हमारी धकापेल चुदाई शुरू हो गई. लंड चूत में सटासट अन्दर बाहर हो रहा था. उधर वो मीठी आवाज में तड़प रही थी और अह आआह उई ऊह …’ करे जा रही थी. फिर मैंने उसके दोनों पैर ऊपर किए और पूरी दम लगा कर चुदाई शुरू कर दी. उसकी चूत से कुछ पानी निकल गया अता जिससे ‘फच फच …’ की आवाज आने लगी. कुछ पल बाद उसके मुँह से कामुकता भरी आवाज निकलने लगी थी- आह आह अम्मी … आह बहुत मोटा लंड है तेरा … आह अब्बू ईई … कितना अन्दर तक पेल रहा है … आह मजा आ गया राजा. कुछ देर बाद मैंने उसे कुतिया बना कर चोदना शुरू कर दिया. वो गांड की तरफ से चूत में लंड लेने लगी. इस आसन में लंड ज्यादा टाईट चल रहा था, तो वो खुल कर आवाजें कर रही थी- आह आह ईई अम्मी बचाओ! मैं अपने हाथ आगे बढ़ा कर उसके दूध पकड़ कर शॉट मार रहा था. इससे उसके दूध लाल हो चुके थे, बाल बिखर गए थे. मैं उसके पिछवाड़े में हाथ मारता और चूत में लंड जोर से पेलता जा रहा था. फिर मैंने लंड चूत से खींचा और उसे बेड से दूर कर दिया. उसकी एक टांग बिस्तर के किनारे पर टिकवा दी और पीछे से लंड पेल कर चुदाई शुरू कर दी. इस बार वो थक सी गई थी और मेरे गले में अपना हाथ डाले चुद रही थी. उसने पूछा- अभी कितना समय बाकी पानी निकलने में? मगर इधर साली दवा का कैसा असर था कि लंड छूटने का नाम नहीं ले रहा था. मैंने उसे बिस्तर पर करवट लेकर लिटा दिया और पीछे से उसकी चूत में लंड पेल कर चुदाई करने लगा. वो रोने लगी थी कि अब रहम कर. वो काफी थक गई थी और निढाल होने लगी थी. फिर मैं बोला- चल अब जल्दी से ऊपर आ जा … और लंड की सवारी कर! वो लंड चूत में फंसा कर बैठ गई और गांड उछाल उछाल कर चुदने लगी. उसके दूध मेरे हाथों में अपनी मां चुदवा रहे थे. उसने फिर से पानी छोड़ दिया था और अब उसका मन भर गया. मैंने भी आखिरी पांच मिनट की धुआंधार चुदाई की और मेरा भी पानी आने वाला हो गया. कुछ ही झटकों में मेरे लंड की हिम्मत टूट गई; मैंने उसको नीचे लिटाया और और पूरा पानी उसकी चूत में छोड़ दिया. मैं झड़ कर उसी के ऊपर लेट गया. हम दोनों पसीने में सराबोर हो गए थे. मैंने उसको कहा- तुम्हारे अब्बू की उन गोलियों की शीशी अपने पार्लर में रख लो, रोज आऊंगा. उसने कहा- नहीं, अब दवा खाकर नहीं … मेरी जान निकल जाती है. तुम हैवान जैसे लेने लगते हो. वो सही कह रही थी. मेरे ऊपर से अभी भी उन गोलियों का असर गया नहीं था. मैंने थोड़ी देर उसको आराम करने दिया. वो बोली- मुझे नींद आ रही है मैं सो रही हूँ. मैंने कहा- पहले बाथरूम चलो. वो बोली- नहीं, मैं बहुत थक गई हूं और मेरी चूत में दर्द हो रहा है, मुझसे चला नहीं जाएगा. मैंने कहा- अम्मी अब्बू से क्या कहोगी? उसने कहा- वो पांच दिन नहीं आएंगे. मैं घर में अकेली हूँ. मैंने कहा- ठीक है, अब तो और मजा आएगा. मेरे पास समय भरपूर था. मैंने उसे उठाया और उसके कांच वाले बाथरूम में ले गया. पहले लंड साफ किया और उसको बिठा कर कहा- चूसो. उसने चूसना शुरू कर दिया. मैंने शॉवर चालू कर दिया. पानी की बूंदें और लंड की चुसाई से मस्ती चढ़ने लगी और जल्द ही लंड खड़ा हो गया. मैंने उसे उठाया और झुका कर लंड चूत में पेल दिया. दवा का असर काम करने लगा था. उसने चिल्लाना शुरू कर दिया- आह इई ऊऊऊ जान बस भी करो … रात में आ जाना … थोड़ी न मैं कहीं भागी जा रही हूँ. मैंने शैम्पू अपने बदन पर डाला और उसे शॉवर से दूर लेकर अपने हाथ उसकी पीठ पर रगड़ना शुरू कर दिया. फिर स्तन पर शैम्पू लगाया. मैंने लंड निकाला और नूर को सीधा कर दिया, शैम्पू उसके हाथों में डाल दिया. उसने पहले लंड पर हाथ लगाया और शैम्पू डाल कर कहने लगी- अब चोदो, मेरी चूत साफ हो जाएगी. मैंने थोड़ा सा लंड डाल दिया और चोदने लगा. इधर वो मेरे सीने में और जहां जहां उसके हाथ जाते, वहां वो शैम्पू लगाती जा रही थी. अब हम दोनों शॉवर के नीचे आ गए. चुदाई चालू थी और हम दोनों नहाते भी रहे. फिर उसने हैंड शॉवर दिया. मैंने लंड निकाल कर चूत में शॉवर से पानी का प्रेशर दे दिया और उंगली डाल कर चूत साफ कर दी. फिर लंड साफ किया और तौलिया से बदन पौंछ कर दोनों बाहर आ गए. अभी दोनों गर्म थे तो मैंने नूर को पकड़ कर सोफे पर लिटा कर कहा- नूर दस मिनट और करने दो, जल्दी हो जाएगा. वो मान गई. उसने मेरे ढीले लंड से चूत पर फट्ट फट्ट मारा और पकड़ कर अन्दर डाल दिया. मैं भी गर्म था, सो जल्दी जल्दी चोदने लगा. दस की जगह पंद्रह मिनट हो गए थे. वो घड़ी देखकर बोली- अब बस भी कर! मैंने उसके हाथ पकड़ कर झटकों की रफ्तार बढ़ा दी. वो चिल्लाने लगी और आह आह आआ आआ करने लगी. मैंने कुछ मिनट उसी स्पीड में चुदाई की, इससे उसकी रूह कांप गई थी. वो आंखें बंद करने लगी थी. मुझे खुद समझ नहीं आ रहा था कि दवा में ऐसा क्या था. कुछ देर बाद मुझे भी लगने लगा कि मैं झड़ने वाला हूँ. मैंने अगले कुछ झटकों में पानी छोड़ दिया और उसके ऊपर लेट गया. वो जोर जोर से सांसें लेने लगी और शिथिल होकर मुझे आराम से चूमने लगी. एक लड़की या औरत चुदने के बाद तभी चूमती है, जब वो सन्तुष्ट हो गई हो. मैंने कहा- अब मुझे जाना चाहिए. वो हाथ पकड़ कर कहने लगी- समय से आ जाना, मैं इंतज़ार करूंगी. मैंने उसको चूम कर कहा- मैं रात में आ जाऊंगा … और जब तक अब्बू अम्मी नहीं आते, मैं यहीं रुकूँगा. उसने कहा- हां … अपने साथ कुछ ऐसा लेते आना, जिससे मैं पेट से न हो सकूं. मैंने ओके कहा और निकल आया. उसने आराम से उठकर गेट लॉक किया उसको उस समय चलने में थोड़ा दर्द हुआ, लेकिन चेहरे पर खुशी बहुत थी. मैं घर आ गया, विदा की तैयारी चल रही थी. शाम को मैं भाई से कह कर आया कि दोस्तों के साथ टूर पर जाना है. पांच दिन में आ जाऊंगा. इसके बाद जो कुछ उसके घर जाकर हुआ, वो मैं आपको अगली चुदाई कहानी में बताऊंगा. दोस्तो, कमेन्ट करके जरूर बताना, मेरी हॉट गर्ल फ्री चुदाई कहानी कैसी लगी. 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  2. আমার নাম সুভাষ, আমি একটা হোটেলে চাকরি করি সহকারী হিসেবে । আর আমি যে হোটেলে চাকরি করে সেটা শহরের বড়ো বড়ো হোটেলের মধ্যে একটা, আসলে এটা একটা পাঁচ তারা হোটেল । আর করা কি মনে করে জানি না কিনুত আমার মনে হয় হোটেলের চাকরি খুবই আরাম দায়ক । শুধু সিজেনে একটু কাজের চাপ থাকে আর সিজেন পেরিয়ে গেলে কাজের কোনো চাপ থাকে না তাই বেশির ভাগ সময় আমরা আরাম করে কাটায় । পরিবারের সঙ্গে যারা আসেন হোটেলে তারা তো শুধু ছুটির সময়ই আসেন তাও গ্রীষ্মের ছুটি তে । Bangla Choda Chudi Choti Golpo কিন্তু বাকি সময় নব বিবাহিত দম্পতিরা আসতে থাকে তাদের মধু চন্দ্রিমা করতে । আর আমার জীবনের এই ঘটনা ঘটে ছিলো এই অফ সিজেনে । এক দম্পতি এসে ছিলো তাদের মধু চন্দ্রিমা করতে ।সেই সময় আমি কাজে খুবই ব্যস্ত ছিলাম আর আমার কাছে মোটেও সময় ছিলো না অন্য কোনো দিকে তাকানোর কারণ বিভিন্ন রুম থেকে একসঙ্গে অর্ডার আসছিলো তাদের খাবার পৌছনোর জন্য । বিভিন্ন ঘরের সঙ্গে সঙ্গে সেই ঘর থেকেও বিভিন্ন খাবারের অর্ডার আসছিলো । কিন্তু আমি একটা অদ্ভুদ জিনিস লক্ষ্য করলাম, যখন কোনো দম্পতি তাদের মধু চন্দ্রিমা করতে আসে তখন তারা বেশির ভাগ সময় হোটেল রুমের মধ্যেই থাকে আর প্রয়োজন মতো খাবার অর্ডার করে, মদ তো প্রায় কোনো দম্পতি অর্ডার করে না । Bangla Choda Chudi Choti Golpo কিন্তু এদের বিষয় আলাদা ছিলো এই ঘরে খাবার কম অর্ডার করা হচ্ছিলো আর মদ বেশি ।আমার কাজ পৌছনো তাই আমি পৌছে দিচ্ছিলাম কিন্তু মনে মনে অবাক হচ্ছিলাম । তাদের ঘরে প্রথম মদের বোতল দিতে গিয়ে দেখতে পেলাম, খুব সুন্দরী মেয়ে আর সুসাস্থবান সুন্দর চেহারার ছেলে । বেশ কয়েক বার যাওয়া আসা করে বুঝতে পারলাম মদ গুলি সেই সুন্দরী মেয়ের স্বামী অনাচ্ছে । আসলে তার মদের দিকে বেশি আসক্তি মেয়ের তুলনায় । তার মদের অর্ডার ক্রমস্য বাড়তে থাকলো, আর তার স্ত্রীর বিরক্তি বোধ ধীরে ধীরে বাড়তে রইলো ।তিনি এত বিরক্ত হয়ে পরেছিলেন কি আর কোনদিকে লক্ষ্য না করে নিজের টিভি দেখতে ব্যস্ত ছিলেন । বেশ কয়েক বার যাওয়া আসা করে বুঝতে পারলাম মদ গুলি সেই সুন্দরী মেয়ের স্বামী অনাচ্ছে । Bangla Choda Chudi Choti Golpo আসলে তার মদের দিকে বেশি আসক্তি মেয়ের তুলনায় । তার মদের অর্ডার ক্রমস্য বাড়তে থাকলো, আর তার স্ত্রীর বিরক্তি বোধ ধীরে ধীরে বাড়তে রইলো । তিনি এত বিরক্ত হয়ে পরেছিলেন কি আর কোনদিকে লক্ষ্য না করে নিজের টিভি দেখতে ব্যস্ত ছিলেন । আমি যতবার তাদের রুমে যেতাম তিনি কোনো না কোনো অজুহাতে আমার সঙ্গে বিভিন্ন কথা বলতে শুরু করলেন ।তিনি জিজ্ঞাসা করলেন আমার নাম কি, আমি কোথায় থাকি, কখন আমার কাজ শেষ হয়, আমি রাত্রে কটার সময় বাড়ি ফিরি না কি এখানেই থাকি । আবার সকালে কটার সময় আমার কাজে যোগ দি । আমি বুঝতে পারলাম তিনি অতিরিক্ত বিরক্ত হয়ে গেছেন তাই আমার সঙ্গে কথা বলছেন, তার সময় কাটানোর জন্য । কারণ তার স্বামীর মদ খাওয়া শেষ হচ্ছিলো না, সে পাঁচটি বড়ো বোতল খেয়ে ফেলেছে আবার নতুন একটা বোতল অর্ডার করেছে । Bangla Choda Chudi Choti Golpo আর তিনি অতিষ্ট হয়ে তাকে কিছু বলাই বন্ধ করে দিয়েছেন ।আবার একবার সেই ঘর থেকে আমি আর একটা অর্ডার পেলাম, এবার রাতের খাবারের । আমি খাবার নিয়ে পৌছে গেলাম, তার স্বামী ঘুমের ঘরে নাক ডাক ছিলো আর তিনি ঘরের কোনে সোফায় বসে কাঁদ ছিলেন । আমি ঘরে ঢুকে কিছু বুঝতে পারছিলাম না আমার কি করা উচিত, আমি জিজ্ঞাসা করলাম খাবারটা কোথায় রাখবো, তিনি বললেন যেখানে হোক রেখে দাও । আমি তার খাবার রেখে কয়েক মুহূর্ত দাঁড়ালাম আর চিন্তা করলাম কিছু বলবো কি বলবো না ।আর তিনি ক্রমস্য কেঁদে যাচ্ছিলেন আর রুমাল দিয়ে চোখের জল মুছ ছিলেন, আমি আর থাকতে না পেরে বলে ফেললাম । আপনি আপনার স্বামী ডেকে নিচ্ছেন না কেন ? তিনি নিস্তব্দতা ভেঙ্গে বললেন, কোনো লাভ নেই, ইনি একজন অকর্মক মাতাল । আমার বিয়ের মাত্র এক মাস হয়েছে আর আমি এখনো জানি না বিয়েটা কি ?" তার এই কথা শুনে আমি বুঝতে পারলাম না আমার কি করা উচিত আর কি বা উত্তর দেওয়া উচিত । Bangla Choda Chudi Choti Golpo তিনি আবার বললেন সুভাষ তুমি কি বিয়ে করেছো? আমি বললাম, না। তিনি বললেন বিয়ে করার পর তোমার স্ত্রীর সঙ্গে যেনো তুমিও এরকম করোনা ।কারণ সব মেয়ের একটি আশা থাকে তার স্বামীর কাছে, চেষ্টা করবে তাকে সুখে রাখার । আমি আবার চিন্তায় পরলাম কারণ আমার কাছে কোনো বাক্য ছিলো না ।তার এই কথা শুনে আমি বুঝতে পারলাম না আমার কি করা উচিত আর কি বা উত্তর দেওয়া উচিত । তিনি আবার বললেন সুভাষ তুমি কি বিয়ে করেছো? আমি বললাম না তিনি বললেন বিয়ে করার পর তোমার স্ত্রীর সঙ্গে যেনো তুমিও এরকম করোনা । কারণ সব মেয়ের একটি আশা থাকে তার স্বামীর কাছে, চেষ্টা করবে তাকে সুখে রাখার । আমি আবার চিন্তায় পরলাম কারণ আমার কাছে কোনো বাক্য ছিলো না ।হটাত আমার মুখ থেকে বেরিয়ে পড়লো, " না মেডাম, যদি আমি আপনার মতো স্ত্রী পায় তাহলে তার সঙ্গে দুধ এরকম কোনদিন করবো না, আমি তাকে রানীর মতো রাখবো । " তিনি চোখের পাতা না ফেলে কয়েক মুহূর্ত আমার দিকে তাকালেন । Bangla Choda Chudi Choti Golpo আমার ভয় লাগতে লাগলো, যদি তিনি খারাপ ভেবে আমার হোটেলে বলেদেন, তাহলে আমার চাকরী যেতে পারে । আমি সঙ্গে সঙ্গে সংশোধন করার জন্য বললাম, " মেডাম আমাকে ক্ষমা করবেন আমি যদি কিছু ভুল বলে থাকি, আমার মুখ থেকে হটাত করে বেরিয়ে পড়লো ।আমি খুবই দুক্ষিত.." তিনি তার সোফা থেকে উঠে আমার কাছে চলে এলেন আর বললেন ওহ সুভাষ, তুমি খুবই ভালো ছেলে । কেন চিন্তা করছ, তুমি অন্তত আমার দুক্ষ অনুভব করতে পেরেছ " এই বলে তিনি আমার কাছে এসে আমার হাথ ধরে ফেললেন । আমি হতবাক হয়ে গেলাম আর এসি র মধ্যে ঘামতে শুরু করলাম।সুভাষ তুমি এই এসির মধ্যে কেন ঘামছো, তুমি কোনো চিন্তা করো না এই বলে তার শাড়ির ওরনা দিয়ে আমার কপালের ঘাম মুছতে লাগলেন ।আর তার হাথ আমার মাথার ওপরে বোলাতে বোলাতে ঠোঁটের কাছে নিয়ে এলেন । তিনি আমার ঠোটে আঙ্গুল বোলাতে বোলাতে আমার মুখে আঙ্গুল ঢুকিয়ে ফেললেন আর আমি তার আঙ্গুল চুষতে লাগলাম । তিনি আমার খুবই কাছে চলে এলেন, এবার তার দুধ আমার বুকে স্পর্শ হচ্ছিলো । আমি ভেতর থেকে উত্তপ্ত হয়ে গেলাম আর তার দুধ টিপতে লাগলাম । তিনি বললেন ধীরে ধীরে টেপো সুভাষ, ব্যথা হচ্ছে। আমি কিছু না বলে ধীরে ধীরে টিপতে লাগলাম ।এবার আমরা দুজনেই খুবই উত্তপ্ত হয়ে পড়েছিলাম আর একে অপরকে গভীর চুম্বন করতে শুরু করলাম । তার পর সবকিছু এত তারাতারি হয়ে গেলো কিছু বোঝায় গেলো না, আমি আর তিনি উলঙ্গ হয়ে তার মাতাল স্বামীর পাসে শুয়ে ছিলাম । আমরা কিছু দেখার বা বোঝার পরিস্থিতিতে ছিলাম না, আর যেহেতু এটা আমার প্রথম চোদন ছিলো আমি পাগলের মতো তাকে চুদ ছিলাম । আমার লম্বা পূর্ণ সাইজের ধন তার ভোদার গভীরতায় ঠাপন দিচ্ছিলো আর আমার হাত তার দুধ দুটো টিপ ছিলো ।তিনি নিচে থেকে আমার ওপর ঠাপ দিচ্ছিলেন আর তার ভোদার পেশী আমার ধনটাকে টিপে ধরে ছিলো । আর এরই মধ্যে আমরা দুজনেই প্রচুর উত্তেজিত হয়ে পরলাম আর আমার যৌন রস তার ভোদার ভেতরেই প্রবাহিত হয়ে গেলো । আমার জীবনের এই প্রথম চোদন ছিলো, তাই আমি আজ ভুলতে পারি নি ।
  3. আমার বয়স তখন চৌদ্দ-পনেরো হবে। দেহসৌষ্ঠবের সব কিছু আমার তখনো অজ্ঞাত। আমরা ঢাকা শহরে থাকি। আর লম্বা ছুটিতে গ্রামের বাড়িতে বেড়াতে যাই।একবার গ্রীষ্মের ছুটিতে গেলাম গ্রামের বাড়ির হাওয়া খেতে। গ্রামে আমার বয়সী মামাতো ভাই-বোন আছে। গ্রামের টিনের ঘরগুলোর এককেই ঘরে দুটি বা তিনটি পর্যন্ত খাট বিছিয়ে ঘুমানো হয়। আমি শহর থেকে গেছি বলে আমার জন্য একটু আলাদা সস্মান। আমাকে এক খাটে একাই ঘুমাতে দেয়া হলো। আর বিছানা গোছগাছ করে আমাকে ঘুমাতে দিয়ে গেল। আমার মামাতো বোন গুপ্তা।সে ঘুমালো পাশের খাটে আমার মামাতো বোনের সঙ্গে। বয়সে গুপ্তা আমার চেয়ে দু-তিন বছরের বড়। তার বয়স তখন ষোল কি সতেরো হবে। শীতের রাতে কম্বল মুড়ি দিয়ে ঘুমালেও টিনের চালার ঘরে একটু শীত শীত করছিল। হঠাৎ গভীর রাতে আমাকে জাপটে ধরে একটি বলিষ্ঠ দেহ ফিশ ফিশ করে বলে উঠলো শীত করছে ?আমি কিছু বুঝে ওঠার আগেই সে কম্বলের মধ্যে ঢুকে আমাকে সজোরে জাপটে ধরে বললো শ! শ চুপ। আমি ’গুপ্তা’ তোমার শীত দূর করবো। তুমি ঘুমাও। Bengali Chuda Chudi Golpo আমার কেমন জানি ভয় করছিল। তার শরীরটা তখন অনেক গরম। তবে এভাবে কোনো মেয়ে আষ্ঠেপৃষ্ঠে জড়িয়ে ধরলে কি করতে হয় সেটা আমার জানা ছিল না। সে কানে কানে বললো ’ নৈাকা চালাবে মাঝি ? বললাম আমি নৈাকা চালাতে জানিনা।গুপ্তা বললো, আমি শিখিয়ে দেবো, তুমি শুধু শক্ত হাতে বৈঠা মারবে।ইতিমধ্যে আমার ঠোট দুটি সে কামড়ে ধরেছে। আমার ইচ্ছা হচ্ছিল জোরে চিৎকার দিই, কিন্তু শরীরে কি যেন এক আবেশ খেলে যাচ্ছিল। আমার শরীর ভয়ে কাঁপছিল। এরপর গুপ্তা বললো এইতো ভালো ছেলে, এবার মাঝি তোমার বৈঠা বাও। আমি বোবার মতো নিথর। আমাকে নিচে রেখে বিশাল পুরুষ্ট গুপ্তার দেহটা কেবল কাপছে। চার-পাচ মিনিট পর বৃষ্টি নামলো। নৌকা চলা ব হলো। এবার সে আমাকে ছেড়ে দিয়ে নরম দুটি ঠোট দিয়ে আমার নাকে একটা চুমু দিয়ে বললো, বড় অদক্ষ মাঝি তুমি। আরো শক্ত হাতে বৈঠা চালাতে হয় ? ঘুমাও। এরপর গুপ্তা চলে গেল পাশের খাটে। আমি অনেক কষ্ট করে বুঝলাম আজকের এ নৌকা বাইচ আসলে কল্পনা নয়, বাস্তব। Bengali Chuda Chudi Golpo পরের দিন নদীর ঘাটে গোসল করতে গিয়ে সবাই মিলে যখন পানিতে নেমে হৈ-হুল্লোড় করছিলাম তখন গুপ্তার দিকে তাকিয়ে বারবার আমার শরীর গরম হয়ে উঠছিল। ভেজা কাপড়ের সঙ্গে লেগে থাকা তার সুডোল দুটি ন্তন যেন বারবার আমাকে দোলা দিয়ে ডাকছিল। যাই হোক, সেবার দুদিন থেকে আবার শহরে ফিরে এলাম। কিন্তু আমার মনের মধ্যে বয়ে নিয়ে এলাম গুপ্তাকে।দুই বছর পর এইচএসসি পরীক্ষা শেষ করে আবার গেলাম গ্রামের বাড়িতে। মনের মধ্যে গুপ্তাকে দুই বছরে নানাভাবে উল্টেপাল্টে দেখেছি। ভেবেছি, ওতো আমার চেয়ে বয়সে তিন বছরের বড়। তাই নিজেকে সান্তনা দিয়েছি বড়দের নিয়ে এমন ভাবতে নেই। সেদিন মামার বাড়িতে মেহমান আসায় রাতে শোবার জায়গা নিয়ে কিছুটা ঝামেলা দেখা দিল। গুপ্তা দেখি আগ বাড়িয়ে এসে মামিকে বলে ম্যানেজ করলো যে ওদের ঘর ফাকা পড়ে আছে তাই আমি গুপ্তাদের একটা ঘরে আরামে ঘুমাতে বললো। Bengali Chuda Chudi Golpo বিছানায় শুয়ে আছি। একটা ঘরে আমি একা এক খাটে। পাশের ঘর থেকে গুপ্তার গলার আওয়াজ পেয়ে আমার মনে নানা চিন্তা ঘুরপাক খাচ্ছে। প্রচন্ড গরম পড়েছিল। তাই গেঞ্জি গায়ে লুঙ্গি পরে কখন ঘুমিয়ে পড়েছিলাম জানি না। হঠাৎ ঘুম ভাঙল, আবার সেই ফিশফিশ আওয়াজ । রাজা, আমি তোমার রানী, কাছে এসো্ আমি বললাম, দেখো গুপ্তা তুমি আমার চেয়ে বয়সে বড়, তোমার সঙ্গে এসব করা কি ঠিক ? সে কোনো কথায় কান না দিয়ে ইতিমধ্যে আমার পরনের লুঙ্গি খুলে ফেলেছে। ডিমলাইটের আলোয় গুপ্তার সুপ্ত সৌন্দর্য যেন ফুটে উঠেছে। সে বললো,দরজার ছিটকিনি আটকিয়ে দিয়েছি, বাড়িতে ছোট বোন আর মা ছাড়া কেউই নেই। ওরা ঘুমাচ্ছে, আজকের রাতে রাজা তুমি আমার সব জ্বালা দুর করো।আমিও এবার দক্ষ মাঝির মতো হাল ধরলাম। বললাম রানী এবার মাঝি কিন্তু অনেক অভিজ্ঞ, বৈঠার আঘাত সইতে পারবে তো, সামলে থেকো নইলে নৌকা চৌচির হয়ে যাবে। Bengali Chuda Chudi Golpo এক সময় নৌকা থেকে বৃষ্টি নামলো। আশপাশের সব ভিজিয়ে নিয়ে গেল। মধুর বৃষ্টিতে ভিজে শালকাঠের বৈঠাটা ছোট হয়ে নেতিয়ে পড়লো। এভাবে আমরা একে অন্যকে জড়িয়ে ধরে ছিলাম ভোর পযর্ন্ত।ভোরে ঘুম ভাঙ্গলো, আমার নিজের কাপড় পরে নিলাম। তখোন রাতের আধার কাটেনি। গুপ্তা চলে গেল পাশের ঘরে। আমি ঘন্টাখানেক পর নদী থেকে গোসল সেরে নিলাম। এ রাতটি ছিল আমার জীবনের এক সেরা রাত।এখন আমি পাড়ি জমিয়েছি বিদেশে। অস্ট্রেলিয়ায় আমি পড়াশোনা করি। ঢাকা থেকে বাবা-মা এখানো মাঝে মধ্যে গ্রামের বাড়িতে বেড়াতে যান। আমার মন থেকে এখনো মুছে যায়নি গুপ্তা। তুমি আমার মনে গুপ্ত থাকবে আজীবন।
  4. বাংলা চটি গল্প চাকরী সূত্রে পাশের জেলায় গিয়েছিলাম। পাশের জেলা বলতে যে আহামারী দুর তা’ কিন্তু নয়, বাসে আধাঘণ্টার রাস্তা। সেখান থেকে ভ্যানে আর ১৫ মিনিট। গ্রামটা আমার পরিচিত। নামে-যদিও আগে কখনও যায়নি। তবে যাওয়ার আগে বাড়ী থেকে শুনে গিয়েছিলাম ঐ গ্রামে আমাদের এক আত্নীয়ের বাড়ী। চাচা। বাবার মাসতুতো ভাই। ঘনিষ্ট। কিন্তু দীর্ঘদিন যোগাযোগ নেই। ঐ চাচাকে আমি দেখেছি। কিনতু কখনও তাদের বাড়ীতে যাওয়া হয়নি।ফেরার পথেই বিপত্তিটা ঘটল, বিপত্তি না বলে সৌভাগ্য বললেই বোধহয় ভাল হত।দুপুরের প্রচণ্ড রোদে ভ্যানে করে ফিরছিলাম। গ্রামের রাস্তা। যদিও পিচের। ফাকা ফাকা বাড়ী পড়ছিল। কিন্তু বিধি বাম। Bangla Chuda Chudi Golpo কিছুদুর আসার পর ভ্যানের চাকা পাঙচার। চোখে সরিসার ফুল দেখলাম। যদিও রাস্তার বেশি দুরের নয়, কিনতু হাটাতো আমার পক্ষে সম্ভব নয়। ভ্যান ওয়ালা বিরস মুখে বলল, ভাইজান ভাড়া দেওয়া লাগবে না, ক্লান্ত ঘামে ভেজা মুখটা দেখে মায়ায় লাগল, ভাড়ার চেয়ে বেশি দিলাম।কিন্তু আমি এখন কি করি। গ্রামের প্রায় মাঝামাঝি। কোন দোকানও আশেপাশে চোখে পড়ছে না। ভ্যানওয়ালা এখনও দাড়িয়ে আছে। তাকে বললাম চলে যেতে। সে যেতে যেতে বলল, অপেক্ষা করতে। ভ্যান অবশ্যই পাওয়া যাবে। পকেটের সিগারেট ধ্বঙস করতে করতে অপেক্ষা করতে লাগলাম ভ্যানের জন্য। কিন্তু কপালে থাকলে ঠেকাই কে? বেশ কিছুক্ষণ অপেক্ষা করে বিরক্তিভরা মন নিয়ে আস্তে আস্তে হাটতে লাগলাম। বেশ অনেক্ষণ ধরে হেটে চলেছি। টপটপ করে ঘাম ঝরছে গা দিয়ে। গ্রামের প্রায় শেষ মাথায় এসে গেছি। কোন ভ্যানওয়ালার দয়া হয়নি এখনও পর্যন্ত। তেষ্টায় ছাতি প্রায় ফেটে যাচ্ছে। আরো খানিকটা আসলাম। আর মাত্র ৩ টা বাড়ী সামনে। তারপরই ফাকা মাঠ। চৈত্রের দুপুরের প্রচণ্ড রোদ, পিচ যেন গলছে। সেই সাথে সুর্যের প্রচণ্ড তাপ আমার মাথা থেকে পানি বের করে গা ভিজিয়ে দিচ্ছে।আট হাটতে পারছি না। যা থাকে কপালে পানি না খেলে টিকা যাবে না ভেবে একটু দাড়িয়ে বাড়ী ৩টার দিকে তাকালাম। প্রথমটা পাচিল দিয়ে ঘেরা। পরের টা কুড়ে ঘর মতো, তারপরেরটা রাস্তা থেকে বেশ একটু দুরে। নতুন একটা বাড়ী। বাশের চটা দিয়ে ঘেরা। বড় বাড়িটায় যাওয়ায় উচিৎ হবে মনে করে আস্তে করে গেট ঠেলে ঢুকলাম।নুতন আগুন্তুক দেখলে বাড়ির বাচ্চাসহ সবাই চমকে উঠে। Bangla Chuda Chudi Golpo আমাকে দেখেও উঠল।উঠানে এক পৌড়া মাছ কুটছে। সামনে রান্নাঘরের বারাণ্দায় ৩ সুন্দরী মহিলা রান্না করছে, বাড়ীতে ছোট ছোট বাচ্চা ভর্তি। গ্রামের পরিবেশের সাথে একটু শহরের ফ্য্যশন। কিন্তু পৌড়ার মধ্যে ও সবের বালায় নেই। শাড়ি সরে যেয়ে বিশাল দুধের স্তুপ দেখা যাচ্ছে ব্লাউজের আবরণে ঢাক। অত্যন্ত সুন্দরী। যদিও বয়স হয়েছে কিন্তু পেটানো শরীর।খোকা, কাউকে খুজছো?প্রশ্নের সম্বিত ফিরে পেলাম, জি একটু পানি খাব।একজন বৌ উঠে আসল। সামনের টিউবওয়েল থেকে পানি আনল। ইতিমধ্যে বাড়ীর ছেলেরা বুঝতে পেরেছে বাড়ীতে কেউ এসেছে, একটা চেয়ারও পেয়ে গেলাম।জীবনটা আবার পানি পেয়ে সতেজ হয়ে উঠেছে।মাঝ কুটতে কুটতে মহিলা জিজ্ঞাসা করলেন, বাড়ী কোথায়?বললাম। কিন্তু কোন আগ্রহ দেখলাম না, এবার উঠতে হয় ভেবে উঠে দাড়ালাম।ওকি খোকা উঠছ কেন, দুপুর বেলা বাড়ীতে মেহমান আসলে না খেয়ে যেতে নেই।এটাই আসলে বাঙালীদের প্রধান ঐতিহ্য। বাড়ীতে মেহমান আসলে তাকে সমাদর করা, আপ্যয়ন করা।না তার দরকার নেই। বললাম বটে কিন্তু কেন যেন ক্ষিধা নয়, মহিলার ঐ বড় বড় দুধ আর দেবীর মতো চেহারায় আমাকে বেশি আকর্ষিত করছিল।বাড়ীর ছেলেদেরকে তার মা বললেন আমাকে বাড়ীর ভেতরে নিয়ে যেতে । বাধ্য হয়ে গেলাম। বেশিক্ষণ অপেক্ষা করতে হলোনা ১০ মিনিটের মধ্যেই ভাত চলে আসল, এতক্ষণ একা বসে বোর ফিল করছিলাম, কিন্তু যেই তাকে দেখলাম ক্লান্তি আর বোর যেন এক নিমেষে উধাও হয়ে গেল।সতেজ দেখাচ্ছে তাকে। বোধহয় মুখটা পানি দিয়ে ধুয়েছে। অপূর্ব সুন্দর দেখতে। শ্রদ্ধা করার মতো চেহারা। কিন্তু একটু গভীর ভাবে দেখলে শ্রদ্ধার সাথে সাথে কামনাও আসবে। চিরায়ত বাঙালী মায়েদের মতো।খাওয়া শুরু করলাম।তোমাদের ওখানে আমার এক দেওরের বাড়ী আছে। কথাশুনে আবার তাকালাম।নাম কি? আমার প্রশ্নের উত্তর দিতে দিতে তরকারী এগিয়ে দিচ্ছিলেন তিনি।নামটা শুনে চমকে উঠলামআমার বাবার নাম।বললাম না কিছুই্ চুপচাপ শুনতে লাগলাম।চিনি কিনা জিজ্ঞাসা করল।হ্যা বোধক মাথা নাড়ালাম।পাঠকরা বিরক্ত হচ্ছেন বোধহয়। বিরক্ত করার জন্য দুঃখিত। হঠাৎ করে পাওয়া এই আত্নীয় বাড়ী আর আত্নীয়ের পরিচয় দেওয়ার কারণ শুধু একটায় তার মেয়ের চেহারাটা আচ করানো। Bangla Chuda Chudi Golpo যায় হোক কিছুক্ষণ পরে চাচাও বাড়ীতে আসলেন। খাওয়া-দাওয়া শেষে বিশ্রাম, কিন্তু যেহেতু আমার সময় কম, তাই চাচী আমাকে তার খাওয়া বন্ধ রেখে এগিয়ে দিতে আসলেন।ঐ সামনের বড় বাড়ীটা তোমার বড় আপাদের। ইতিমধ্যে জেনে গেছি, আমার এই চাচির ৪ ছেলে আর ২ মেয়ে। বড় মেয়েটার বাড়ী ঐ টা।চল দেখা করে আসি। কোন ছোটবেলায় তোমাকে দেখেছে। চাচীর সাথে থাকতে কেমন যেন মাদকতা অনুভব করছিলাম। পৌছে গেলাম। চাচীর অল্প বয়সের ডুপ্লিকেট না বলে ৩০/৩৫ বছরের ভরা বসন্তের ডুপ্লিকেট কোনটা বলব, ভাবতে পারছি না। অপরুপ সুন্দর এক তরুনী। নিটোল শরীর।সৌন্দর্যের প্রতি আকর্ষণ মানুষের চিরদিনের। আমিও তার ব্যতিরেক নয়। এত সুন্দর নিটল শরীর এই বয়সে কারো হতে পারে জানাছিল না। মিডিয়াম শরীর। মেদের কোন চিহ্ন নেই। বুকদুটো একটু ভারি। ব্রাবিহীন ব্লাউজ বোঝা যাচ্ছে।কোন ছোটবেলায় তোকে দেখেছি। আসিস না ক্যান ভাই, আমরা তো পর, আগে চাচা মাঝে মধ্যে আসত, এখন তাও আসে না, রক্তের সম্পর্ক কি ভোলা যায়। একনাগাড়ে বলে চলেছে আপা। আমাকে পেয়ে যেন তার কথা ফুরাচ্ছে না।ও খোকন, দেখ কে এসেছে। বছর বিশেকের এক ছেলে বেরিয়ে আসল ঘর থেকে। পরিচয় হল। আপার ছেলে। ছোট ৯/১০ বছরের আরো একটা ছেলে আছে। তাকে দেখলাম না। শুনলাম, স্কুলে গেছে। আরো অনেক কিছু শুনলাম। চাচী ইতিমধ্যে চলে গেছে।বয়স্ক মহিলাদের দিয়ে যৌন জীবন শুরু হয়েছিল, সেজন্য বোধহয়, তাদের প্রতি আমার আকর্ষণ সবসময় বেশি। আর এমন ভরাট মহিলা দেখলেই জীবে পানি এসে যাবে। জীবনের একটা কঠিন সিদ্ধান্ত নিলাম, না চুদতে পারি, অন্তত একবার ঐ দুধে হাত দেব। কি মসৃন পেট। কারো কাছে শুনেছিলাম, ছেলে সন্তান হলে মেয়েদের পেটে দাগ হয় না। বাস্তব উদাহরণ আমার সামনে।আবার খেতে হলো। পেট ভরা। কিন্তু এমন সুন্দর কেউ রেধেছে ভাবতে বেশি করেই খেলাম। মমতার স্পর্শ লেগে ছিল খাবারে। অনেকে গল্প শুনলাম, ছোটবেলায় আমি কেমন ছিলাম, আপার কোল থেকে নামতে চাইতাম না। ইত্যাদি ইত্যাদি। তবে সবচেয়ে মনোমুগ্ধকর যে কথাটা শুনলাম সেটা হলো, আপার বয়স যখন ১৪ তখন তার বিয়ে হয়েছিল। পরের বছর ছেলে। তারপরের টা অনেক পরে। পেটে আসার পর দুলাভাই বিদেশ গেছে। দুবছর আগে একবার বাড়ী যদিও এসেছিল, কিন্তু একমাসের বেশি থাকতে পারেনি। বড়ছেলেটাও বিদেশ ছিল। কিন্তু কি কারণে যেন বাড়ীতে চলে এসেছে ছয় মাস পরে। আবার যাবে। সমস্যা হচ্ছে তাই নিয়ে আমার কোন যোগাযোগ আছে কিনা দালালদের সাথে। ইত্যাদি ইত্যাদি। কথা যেন শেষ হয় না আপার।কিন্তু আমার মনে তখন বইছে অন্য ঝড়,।এত সুন্দর যৌবনবতী মহিলার স্বামী আজ ১০ বছর বিদেশে। দেহের ক্ষিধা অপূর্ণ একজন। আমার খুব কাছে। তারপরে আবার ছেলে নিয়ে বিপদে আছে, সহজ টার্গেট। কিন্তু কিছুক্ষণ পরেই আমার ভুল ভাংল।মেয়েদের চোখ জহুরীর চোখ। আমি তার ছোট ভাই, যে আমাকে ছোট বেলায় অনেকসময় কোলে নিয়ে ঘুরেছে। ভালবাসে আদর-স্নেহের অভাব তার কাছে আমার জন্য নেই। কিন্তু অন্য কিছু বেশ আক্রা।চাচার বাড়ীতে না থাকতে চাইলেও বোনের বাড়ী থেকে খুব সহজে বের হতে পারলাম না। বোনের পেতে দেওয়া বিছানায় বিশ্রাম নিতে হলো। বোন আমার বাইরের কাজ গুছিয়ে এসে বসল আমার মাথার কাছে। খুব কাছে। সুন্দর একটা গণ্ধ পাচ্ছিলাম, পরিস্কার-পরিচ্ছন্ন আর সুন্দর অনেক মহিলারদের গায়ে এই গণ্ধটা থাকে। আমার বড়মামীর দেহ থেকেও পেতাম। অনেক অনেক দিন দেখিনি তাকে। হঠাৎ যেন সেই গন্ধটা পাচ্ছিলাম। দীর্ঘদিনের অভিজ্ঞতায় জানি, কিভাবে মেয়েদেরকে পটাতে হয়। সহজ তরিকা তাদের চেহারা আর সৌন্দর্যের প্রশংসা করা।সেটাই করছিলাম। বোন হঠাৎ বাইরে গেল। ছেলের গলার আওয়াজ পেয়ে। ভাগ্নে আমার খুব ভাল। সে বাইরে যাবে। দুই-ভাই বোন একা হয়ে গেলাম।দেখ ভাই, আমাকে গ্যাটিচ দিতে হবে না। তোর দুলাভাই আজ ১০ বছর বিদেশ। বহু বিটালোক চেষ্টা করেছে আমাকে পটাতে। কিন্তু সুযোগ কেউ পাইনি। তুই ভাই হয়ে বোনের দিকে তাকাস না। Bangla Chuda Chudi Golpo আপা, আমি কিনতু খারাপ ভাবে বলেনি। আপনি আসলেই সুন্দর।নারে ভাই, এখন আর সুন্দর কই, আগেতো দেখিসনি। দেখলেও তোর মনে নেই। এখন গায়ের রং পুড়ে গেছে। বুড়ো হয়ে গেছি।বুঝলাম, অনেকে চেষ্টা করলেও আমি ব্যর্থ হচ্ছি না, ঔষধ কেবল কাজ শুরু করেছে। তবে সময় দিতে হবে। ধীরে ধীরে আগাতে হবে। তড়িঘড়ি করলে সব হারাতে হবে। অনেক ক্ষণ থাকলাম। বিভিন্ন কথা বললাম, শুনলাম। আসার সময় অন্যায় আব্দারটা করেই বসলাম, একবার জড়িয়ে ধরে আমার মাথায় হাত বুলিয়ে দিক। নিষেধ করল না, সত্যি সত্যি জড়িয়ে ধরল, অনেক্ষণ মাথায় হাত বুলিয়েও দিল, কিন্তু বুঝলাম, কামনায় নয়, সন্তানস্নেহে ছোট ভাইয়ের মাথায় হাত বুলিয় দিচ্ছে। কখন টুক করে ঘাড়ে চুমু খেয়েছিলাম বলতে পারি না, তবে যখন তারপরই আমাকে সরিয়ে দিল, বুঝলাম, সামান্য হলেও বাড়াবাড়ি করে ফেলেছি। এগিয়ে দিতে এসে, তার ছেলের ব্যবস্থা টা করার কথা আর বলল না। চিন্তায় পড়ে গেলাম। আমাকে কি খারাপ ভাবল।কাজের চাপে দুই দিন মনে ছিল না, তার কথা। আসার সময় মোবাইল নাম্বার নিয়ে এসেছিলাম, হঠাৎ সন্ধ্যায় রিং বেজে উঠল।ভাই কেমন আছো? বোনের কথা এত তাড়াতাড়ি ভুলে গেলে?যথারীতি বোন বাড়ীতে একা। কিন্তু ছলাকলার যে অভাব নেই বুঝলাম তার কথাবার্তায়। আমাকে বসতে দিল কিন্তু বারান্দায়। এমন জায়গায় কিছু করা যাবে না। রাস্তা থেকে যদি দেখা যায়, কৌশল খুজতে লাগলাম, একটু ভিতরে ঘরের ভেতর যাওয়ার। কিন্তু টোপ গিলল না। বেশ কিছুক্ষণ কথা হল, বড় ছেলে নিয়ে। তারপরে আসল কৌশল প্রয়োগ করতে গেলাম।অধিকাংশ মেয়েদের কিছু কমন রোগ থাকে। মাজায় ব্যথা, বুক ধড়পড় ইত্যাদি ইত্যাদি।ঘরে যাওয়ার সুযোগ পাচ্ছি না। আমি বারান্দায় চেয়ারে বসা, আর বোন দাড়িয়ে দাড়িয়ে আমার সাথে কথা বলছে।আপনার প্রেশার কেমন আপা? শরীরতো খারাপ মনে হচ্ছে।আর বলনা ভাই, প্রেশার ঠিক আছে, কিন্তু মাঝে মধ্যে মাথা ঘোরে, বেশিক্ষণ দাড়িয়ে থাকতে পারি না, মাজায় ব্যথা হয়।মোক্ষম দাওয়ায় টা এবার প্রয়োগের রাস্তা পেয়ে গেলাম। কোথায় ব্যথা দেখান তো, এই ব্যথা কোন সমস্যা নাকি এখন, একধরণের মালিশ পাওয়া যায়। ইত্যাদি ইত্যাদি।না থাক, দেখতে হবে না। ডাক্তার দেখাচ্ছি।আরে আপা, আপনি আমার কাছে লজ্জা করছেন।কেউ দেখে ফেলবে, তুমি আমার গায়ে হাত দিচ্ছি।আপা রোগ কিন্তু পুষে রাখতে নেই। এমনি আপনার অল্প বয়সে বাচ্ছা হয়েছে, এ সমস্ত উপসর্গে পরে কিন্তু বড় রোগ হয়ে যেতে পারে, আরো দুলাভাই বাড়ীতে নেই। ঘরে চলেন দেখি, কোথায় সমস্যা। পুরোন অভিজ্ঞতায় জানি, এ সময় তাড়াহুড়া করতে যেমন নেই, তেমনি আয়ত্ত্বের বাইরে যেতে ও দেওয়া যাবে না। তাহলে সব মাঠে মারা যাবে।আপার আগে আমিই ঘরে প্রবেশ করলাম, জানালা এখন অব্দি বন্ধ। বিঝানার উপর মশারী ঝুলছে। নিজে আগে যেয়ে বসলাম। আপাও আসল, কিন্তু দুরে টেবিলের কাছে দাড়াল।আপনার কোথায় ব্যথা হয় আসলে?আপা হাত দিয়ে দেখালেন, পিছনে পিঠের নিচে।নিঃশ্বাস নিতে কষ্ট হয়? আমার প্রশ্নে আমি জানি কি উত্তর দেবে, কেননা পরিশ্রম করার পর সবারই নিঃশ্বাস নিতে কষ্ট হয়। আপা উত্তরও তাই দিল।অনেক্ষন কাজ করলে নিঃশ্বাস নিতে কষ্ট হয়।বুকে ব্যথা হয় কি? পাকা ডাক্তারের মতো প্রশ্ন করে যেতে লাগলাম।না।হালকা হয় বোধ হয়। বাম পাশে না ডানপাশে।মাঝে মাঝে হয়, বাম পাশে।মাংসে না হাড়ে? মাংসে। আমি জানতাম উত্তরটা, আপা সরে আসেন তো দেখি। এসবগুলোতো আসলে রোগ না, রোগের উপসর্গ। ওমুকের এই সমস্যা ছিল, পরে ইত্যাদি ইত্যাদি হয়েছে। আপাকে কনভিন্স করতে লাগলাম। আর সে না আসায় আমি নিজেই উঠে গেলাম। আস্তে আস্তে হাত রাখলাম তার পিঠের পিছনে। একটু যেন কেপে উঠল আপা।আস্তে আস্তে হাত বুলিয়ে দেখতে লাগলাম কোথায় ব্যথা। লিমিট ক্রস করলাম না, অর্থাঃ শায়া অবধি গেলাম না তবে হাতও সরালাম না, জানি যতক্ষণ হাত রাখতে পারবে, ততক্ষন তার শরীরে পরিবর্তন ঘটবে।এখানে কি শুধু ব্যথা, না আরও নিচেও হয়?নিচেও হয়।ক্যামন ব্যথা। চাপ দিলে কি কমে?খিল ধরে যায়। চাপ দিলে একটু কম মনে হয়।আস্তে আস্তে শাড়ী সরিয়ে দিলাম। Bangla Chuda Chudi Golpo পিঠের অনাবৃত অংশে আমার হাত। কোমল। এত কোমল পিঠ অনেকের হয় না। হঠাৎ হাত সরিয়ে নিলাম।আপনি তো মিথ্যা কথা বলছেন আমার সাথে। আপনার তো হাটুতেও ব্যথা হয়।হ্যা হয়।নিঃশ্বাস নিতেও কষ্ট হয়। আসেনতো পসেন আমার পাশে। হাত ধরে টেনে নিয়ে আসলাম। বসালাম আমার পাশে। মাজার পাশে অনাবৃত অংশে আবার হাত রাখলাম। নিঃশ্বাস নিন তো জোরে।আপা আমার নিঃশাস নিতে লাগল। নিঃশ্বাসের তালে তালে বুক দুটো উঠানামা করতে লাগল। বাড়া মশায় তিরতির করছে অনুভব করতে পারলাম। আরো একটু তুললাম হাতটা। ব্লাউজের কাছাকাছি নিয়ে গেলাম কিন্তু ব্লাউজ সযোতনে এড়িয়ে গেলাম। উপভোগ করতে লাগলাম কোমলতা আর আপাকে জোরে আর আস্তে আস্তে নিঃশ্বাস নিতে বলতে লাগলাম।তারপর একসময় হাতটা তার বাম দুধের পরে রাখলাম শাড়ি আর ব্লাউজের উপর দিয়ে। কেপে উঠল সে। কিছু বলল না, বলার সুযোগ দিলাম না, এবার নিঃশ্বাস নেনতো।বাম দুধ থেকে ডানদুধে। গলার কাছে, গলার কাছ থেকে আস্তে আস্তে ব্লাউজের ভেতরে। অনেক দুধে হাত দিয়েছি, কিন্তু এমন কোমল দুধ পায়নি।সুড়সুড়ি লাগছে, বলে আপা আমার হাত সরিয়ে দিতে গেলেন। কিন্তু লাইসেন্স পেয়ে গেছে। আলতো করে বাম দুধটাকে হাতের মধ্যে আনলাম পুরোট ধরল না, কিন্তু বুঝলাম এতটুকু স্পর্শে আপার মধ্যে অনেককিছু হয়ে যাচ্ছে।কেউ দেখে ফেলবে বলে আপা সরে যেতে চাইলেন। বা ম হাত দিয়ে তাকে ধরে রাখলাম।কেউ দেখবে না। আর আমরা তো কোন অন্যায় করছি না। বেশ কিছুক্ষণ স্পর্শ নিতে দিলাম তাকে আমার হাতের।আস্তে আস্তে হাত বের করে আনলাম। উঠে দাড়ালাম মুখোমুখি।আস্তে আস্তে শোয়ায়ে দিলাম তাকে। জানি পুরো কণ্ট্রোলে চলে এসেছে। কিন্তু আরো একটু অপেক্ষা করতে লাগলাম। উঠে বসার চেষ্টা করল। কিন্তু বাধা দিলাম। লিমিট ক্রস করবো না। আগেই সিদ্ধান্ত নিয়ে রেখেছি, কিন্তু না চুদে ও ছাড়ছি না।পায়ের কাছে বসলাম। পা দুটো ঝুলানো অবস্থায়। আস্তে আস্তে কাপড় সরিয়ে উপরে তুলতে লাগলাম। আবার বসতে গেল। বাধা দিলাম না। দেখুক তার ভাই কি করছে। হাটু পর্যন্ত তুললাম কাপড়। কোথায় ব্যথা।এখানে এখানে, হাত দিয়ে স্পর্শ করে জানতে চাইলাম। কিছুটা যেন স্বস্থির নিঃশ্বাস ফেলল। হাতের স্পর্শের উত্তর দিতে লাগল।হাটু ছেড়ে আবার দাড়ালাম। পিঠেও তো ব্যথা হয় তাই না আপা।হ্যা।জড়িয়ে ধরার মতো একেবারে মুখোমুখি অবস্থায় দাড়িয়ে পিঠে হাত দিলাম। ব্লাউজের মধ্যে দিয়ে হাত পুরে দিলাম। পিঠে হালকা ঘাম, বুঝলাম উত্তেজনার ঘাম। সারা পিট হাতড়িয়ে ব্যথার অস্তিস্ত জানার চেষ্টা করলাম, আপার মুখ আমার বুকে ঘসাঘসি করছে।আপনার দাপনায়ও তো ব্যথা হয়, শেষ চেষ্টা এবার। আর দেরি করা যাবে না। ইতিমধ্যে ঘণ্টা পার হয়ে গিয়েছে। ছোট ছেলে আসার সময় হয়ে গেছে প্রায়। জানি এবার চুদতে হবে। আর শুধু চুদলে হবে না, পর্যাপ্ত আরাম না দিতে পারলে আর হবে না।আবার শুয়ে দিলাম আপাকে। এবার আর কোন বাধা দিল না। পা দুটো উচু করে দাপনা আলগা করে দিলাম। গুদটাকে চেপে রাখল কাপড় দিয়ে। হাত দিয়ে মালিশ করতে লাগলাম। আর অপেক্ষা করতে লাগলাম কখন নিঃশ্বাস ভারি হয়ে আসে।ইতিমধ্যে প্যাণ্টের চেন খুলে ফেলেছি আমি। আপার অজ্ঞাতে জাংগিয়াও নামিয়ে দিলাম। পাদুটোকে সোজা আকাশ মুখো করে দিলাম। Bangla Chuda Chudi Golpo গুদ আপার চেষ্টা স্বত্ত্বেও আলগা হয়ে গেল। হাত দিয়ে মুখ ঢাকল আপা। তাড়াহুড়া করলাম না, চেনের ফাক দিয়ে ধোনটাকে বের করে একহাত দিয়ে আপার দু’পা ধরে রাখলাম, আরেক হাত দিয়ে ধোনের মাথা দিয়ে গুদের মুখে ঘসতে লাগলাম আস্তে আস্তে। ইতিমধ্যে ভিজে গেছে। ধোনের অস্তিস্ত পেয়ে আপা উঠে বসতে গেলেন, সুযোগ দিলাম না, আস্তে আস্তে ঠেলে ভিতরে ঢুকাতে লাগলাম, ধোনের চাপে আপা আবার শুয়ে পড়লেন। দরজা খোলা, আর আমি চুদে চলেছি আপাকে ধীরে ধীরে। কোন বাধা দিচ্ছে না আর। গুদের মধ্যে ঠাপাতে লাগলাম, ধীরে ধীরে, মাঝে মাঝে গতি বাড়াতে লাগলাম। ভয় করছিল, কেউ যদি এসে পড়ে। কিন্তু থামলাম না। বেশিক্ষণ লাগল না, আপার। হঠাৎ দু’পা ছড়িয়ে আমার মাজা জড়িয়ে ধরলেন, বুঝলাম হচ্ছে তার। এবার আর দেরি করলাম না, ঠাপের গতি বাড়ালেন। এতক্ষণে কথা বললেন আপা।বিরাট বদ তুই, তাড়াতাড়ি কর, খোকা আসার সময় হয়ে গেছে। বুঝলাম পার্মানেণ্ট গুদ পেয়ে গেলাম। চুদতে লাগলাম। আপা মাজা ছেড়ে দিয়েছ আমার। দুই পা কাধে তুলে নিলাম, আর গুদে ঢুকাতে লাগলাম, হঠাৎ যেন ছায়া দেখলাম দরজায়। আতকে উঠতে যাচ্ছিলাম, কিন্তু যাকে দেখলাম, আর যে অবস্থায় দেখলাম আতকে না উঠে খুশি হলাম। তার মুখে আংগুল অর্থাৎ শব্দ করতে নিষেধ করছে। জান-প্রাণ দিয়ে চুদতে লাগলমা।ভেতরে ফেলব।মাথা নেড়ে হ্যা বললেন আপা। আমার এখন সেফ পিরিয়ড। মনের আনন্দে গুদ ভরে দিলাম টাটকা বীর্যে। আপার শাড়ী দিয়ে ধোন মুঝে বাইরে আসলাম প্যাণ্টের চেন লাগাতে লাগাতে। বারান্দায় খাটের উপরে বসে আছে আমার চাচী।
  5. বাংলা চটি কাহিনি ফারুক ভাইয়ের আমেরিকা যাবার সব কাগজপত্র প্রায় ঠিক হয়ে গেছে। কিন্তু হঠাৎ করে সব ভেস্তে যায়। এদিকে বয়স হয়ে যাচ্ছে তার। তাই পরিবারের সবাই মিলে তাকে পীড়াপীড়ি করলো বিয়ে করার জন্য। ফারুক বাইয়ের এক কথা তিনি আগে আমেরিকা যাবেন তারপর সবকিছু। সবাই বোঝাল আমেরিকা থেকে ফিরে এসে তোর বিয়ের বয়স থাকবে না।অনেক বোঝানোর পর ফারুক ভাই রাজি হল এবং বিয়ের পিড়িতে বসল। খুব সুন্দরী সেক্সি খাসা মাল। যাকে দেখলে যেকোন সামর্থবান পুরুষের ধন লাফালাফি করবে। কন্যা লাখে একটাও পাওয়া যায় না। বাংলা চটি কাহিনি বয়স বিশ কি একুশ শরীরের গঠন বেশ চমৎকার। মাই দুটু উচু টান টান ঢিবির মত। গায়ের রঙ ফর্সা, চেহারা গোলগাল, উচ্চতা ৫ ফুট ৬ ইঞ্চি।বিয়ের পর তার শরীরের গঠন আরো সুন্দর হতে লাগল। রুপ যেন ফুটতে লাগল প্রস্ফুটিত গোলাপের মত। ফারুক ভাই বউ পেয়ে দারুন খুশি, সুপার গ্লু’র মত সারাক্ষন বউএর সাথে লেগে থাকত। কিন্তু সেই লেগে থাকা আর বেশি দিন স্থায়ী হল না। প্রায় সাড়ে চার মাস পর তিনি যত তাড়াতাড়ি সম্ভব ফিরে আসার প্রতিশ্রুতি দিয়ে আমেরিকার পথ পাড়ি দিলেন।ফারুক ভাইয়ের বউ আর্থাৎ আমার চাচাত ভাবী ভাই থাকতে যেমন কলকল ছলছল করত আস্তে আস্তে তা মিলিয়ে যেতে শুরু করল। বাংলা চটি কাহিনি বাংলা চটি কাহিনি পুরো বাড়িতে দেবর বলতে আমি ই তার একটি। আমি ইন্টারমিডিয়েটে পড়ি। স্বাস্থ্য খুবই ভাল বলা যায়। কারন আমি একজন এথলেট। ফারুক ভাইয়ের অবর্তমানে আমার সাথে বেশি মাখামাখি করলে লোকে খারাপ বলবে ভেবে সে আমার সংগে একটু নিরাপদ দুরত্ব বজায় চলাফেরা করত।কিন্তু মাঝে মাঝে আমার দিকে এমনভাবে তাকাতো আর বাকা ভাবে হাসত তাতে আমার শরীর শিরশির করত। একদিন আমি সান বাধানো ঘাটে খালি গায়ে লুঙ্গি পরে গোসল করছি তখন সে ঘাটে আসল। আমার শরীরের দিকে তাকিয়ে সে তার দাঁত দিয়ে তার ঠোট কামড়ে ধরল। ভাবি একদৃষ্টিতে তাকিয়ে থাকল আমার দিকে। ভাবি এবাড়িতে বউ হায়ে আসার পর আমার মনে একটি সুপ্ত ইচ্ছা হল আমি একদিন ভাবিকে জরিয়ে ধরে চুমু খাব। আজ পর্যন্ত আমার ইচ্ছা পুর্ন হয়নি। কিন্তু বোধহয় প্রকৃতি কারও ইচ্ছাই যেন অপুর্ন রাখে না। বাংলা চটি কাহিনি ফারুক ভাইয়ের ছোট বোনের বিয়ের দিন সেই ইচ্ছেটা পুর্নতা পেল। গায়ে হলুদের অনুষ্ঠান চলছে। বরপক্ষ একটু আগে কন্যাকে হলুদ লাগিয়ে চলে গেছে। এখন আমাদের মধ্যে হলুদ ও রঙ মাখামাখি। আমি রঙের হাত থেকে বাচার জন্য একটু নিরাপদ দুরত্বে দাঁড়িয়ে আছি। হঠাৎ দেখলাম ভাবি আমার দিকে এগিয়ে আসছে। হাতে হলুদ। আমার কাছে এসে বলল, দেবরকে হলুদ দিয়ে দিই, তাড়াতাড়ি বর হবে।ভাবি আমার কপালে ও গালে হলুদ লাগাতে থাকল। হলুদ লাগানোর পর যখন রঙ লাগাতে গেল তখন আমি কৃত্রিম জোড়াজোরি করার ভান করে তার হলুদ শারীর নিচে অবস্থান করা স্তন যুগলে আমার হাতের ছোয়া লাগিয়ে দিলাম। বাংলা চটি কাহিনি Bangla Cotti Golpo ভাবি আমার বুকে একটি হালকা কিল মেরে অসভ্য অসভ্য বলে দৌড়ে পালিয়ে গেল। এরপর থেকে যতবারই আমার সাথে ভাবির দেখা হত ভাবি আমাকে ভেংচি কাটত আর হাত দিয়ে কিল দেখাত। মনে মনে ভাবছি, আমি পাইলাম, ইহাকে পাইলাম। হলুদের পর্ব শেষ হবার পর সবাই ঠিক করল বাড়ির পাশের নদীতে সবাই মিলে গোসল করব। ছেলে মেয়ে বাচ্চা কাচ্চা সবাই। আমরা ত্রিশ পয়ত্রিশ জনের একটি দল রওনা হলাম নদীতে গোসল করার উদ্দ্যশ্যে। আমি ভাবির পাশ দিয়ে আসার সময় বললাম আমি ডুব দিয়ে তোমার কাছে আসব, তুমি সবার থেকে একটু আলাদা থেকো। এবারো তিনি আমাকে ভেংচি কটলেন, বোঝলাম আমার আর্জি কবুল হয়েছে।সাত আট হাত দুরত্ব রেখে ছেলে মেয়েরা নদীতে নামল। নদী পাড়ের এক কোনায় হ্যাজাক বাতি জ্বলানো আছে, তাই চারপাশ আলোতে ভরে গেছে। আমি দেখলাম মেয়েদের দলের মধ্যে ভাবী আসরের মাধ্যমান হয়ে অবস্থান করছে। আমি তার দৃষ্টি আকর্ষন করার চেষ্টা করলাম। বাংলা চটি কাহিনি একসময় সে আমার দিকে তাকালো। তাকিয়ে আশেপাশে কি যেন দেখল। তারপর একপর্যায়ে জ্বিব বের করে আবার ভেংচি কাটলো। সাত রাজার ধন হাতে পেলে মানুষের অবস্থা যেমন হবার কথা আমার ও সেই অবস্থা হল। সবাইকে আলাদা করে ভাবী একটি স্থানে চলে এল আর আমি ডুব দিলাম।এক ডুবে পায়ের কাছে চলে এলাম। আমি ভাবীর ফর্সা পায়ে ঠোট দিয়ে চুমু খেলাম। তারপর তার দুই পায়ের গোড়ালি হতে হাটু পর্যন্ত চুমু খেলাম, কামড়ালাম। হালকা পড়পড়ে পশম ভাবীর পা যুগলে। সেই পশমের দুই একটি দাঁত দিয়ে ছিড়লাম আর তখুনি বুঝলাম আমার দম শেষ হয়ে আসছে। তাকে ছেড়ে যেখানে ছিলাম সেখানে এসে মাথা তুললাম। প্রথমেই তাকালাম ভাবীর দিকে। একটি অনুচ্চারিত শব্দ তার মুখ দিয়ে বের হল, বাব্বা। বাংলা চটি কাহিনি Bangla New Hot Coti অর্থাৎ ডুব দিয়ে যে আমি এতক্ষন থাকতে পারি হয়ত তার বিশ্বাষ হচ্ছে না। আমি একটু রেস্ট নিয়ে তার প্রতি একটি ছোট্ট ইঙ্গিত দিয়ে আবার ডুব দিলাম। এবার তার কলাগাছের মত ফর্সা উরু নিয়ে খেলা শুরু করলাম। আমি তার উরুতে হালকা কামড় দিচ্ছি আর হাতাচ্ছি। এবার তার উরুর ফাটলে আঙ্গুল দিয়ে নাড়াচাড়া করার ফলে সে তার পা দুটি নাচাতে শুরু করলো। একটু পরে আমি আবার আগের জায়গায় এসে মাথা তুলে শ্বাস নিলাম। একটু বিশ্রাম নিয়ে আবার গেলাম ডুব দিয়ে। এবার তার পদ্মফুলের মত ভোদা নিয়ে কজ করার পালা। আমার দমের পরিমান কমে যাবার কারনে তাড়াতাড়ি করার সিদ্ধান্ত নিলাম। আমার দাঁড়িয়ে থাকা বাড়াটি আমি তার মুখে পুড়ে দিলাম। এতে ভাবী আমার বাড়াটি মজা কড়ে চুষতে লাগলো। জ্বিব দিয়ে কিছুক্ষন ভাবীর সাথে সঙ্গম করলাম। দ্রুত ফেরার সময় ভাবী আমার বাড়ার মধ্যে আলতো করে দুটি কামড় বসিইয়ে দিল। বাংলা চটি কাহিনি আবার ফিরে এসে ভাবীকে ইঙ্গিত করে বললাম ব্লাউজ খুলে নাক পানির উপরে দিয়ে উপুর করে বসতে। ভাবী তাই করল। আমি আবার গিয়ে ভাবীর সুন্দর মাই দুটি ইচ্ছামত টিপতে থাকলাম। তার নিপলদুটি মটর দানার মত শক্ত হয়ে গেছে। কিছুক্ষন টিপার পর আমি আমার জায়গায় ফিরে আসলাম। দেখলাম ভাবীও নিজের জায়াগায় ফিরে যাচ্ছে।গোসল শেষে আসার পথে আমাকে আবার ভেংচি কেটে মেয়েদের দলে হারিয়ে গেল। বুঝলাম ভালোই কাজ হয়েছে। আমাদের দলটি বাড়িতে আসার পথে একসময় ভাবীকে জিজ্ঞেষ করলাম কেমন হয়েছে। বলল, ডাকাত কোথাকার, বদমাইশ। বললাম আজ রাতে বদমাইশি হবে? বলল জানি না। মুখ দেখে বুঝলাম আমার চেয়ে ভাবীই বেশি উন্মুখ হয়ে আছে। বাড়িতে ফিরে ভাবীকে স্থান ও সময় জানিয়ে দিলাম। স্থানটি হল গাবতলার ভিটে যেখানে কেউ সচরাচর আসে না। সময় নির্ধারন করলাম রাত তিনটা। বাংলা চটি কাহিনি বলল আমি এত রাতে যেতে পারব না। আমি বললাম তুমি শুধু পেছনের দর্জা দিয়ে বের হয়ে এস আমি নিয়ে যাব। বলল ঠিক আছে।ঠিক তিনটায় তিনি দর্জা খুলে বের হলেন। আমি তাকে নিয়ে চললাম নির্দিষ্ট স্থানে। ভাবিকে জড়িয়ে ধরলাম। আস্তে আস্তে আমি ভাবীর পরনের শাড়ি, ব্লাউজ, পেটিকোট সব খুলে ফেললাম। দু হাতে জড়িয়ে ধরে চুমু খেতে শুরু করলাম। ভাবীও তাই করল। একসময় হাত রাখলাম ভাবীর উচু বুকের উপর। তারপর স্তন টিপতে টিপতে হাত নামাতে থাকলাম নাভী হয়ে ভোদার দিকে। ভোদায় আঙ্গুলি করা শুরু করলাম। ভাবী আমার কামনায় ভেসে যাচ্ছে। এক পর্যায়ে ভাবী আমার পরনে তোয়ালে খুলে আমার লৌহদন্ডটিকে তার হাতে নিয়ে মনের আনন্দে চুষতে লাগল। আমিও এই ফাকে তার দুধ টিপে যাচ্ছি ইচ্ছামত। ভাবীকে বললাম, তুমি খুশি? ভাবী বলল, খুশি হব যদি তুমি আমার ভোদা চুষে দাও। যেই কথা সেই কাজ। ভাবীকে অর্শেক শোয়া অবস্থায় বসিয়ে দু পা ফাক করে তার ভোদা চুষতে লাগলাম। কি যে এন অনুভুতি তা ভাষায় প্রকাশ করার মত না, ভোদার কি মিষ্টি মৃদু গন্ধ। এভাবে প্রায় পাঁচ মিনিট করার পর ভাবী আমাকে বলল, উফঃ মরে যাচ্ছি, আর থাকতে পারছি না, ও আমার চোদনবাজ দেবর আমাকে এবার তুমি চোদা শুরু কর। বাংলা চটি কাহিনি আমি ভাবীকে উপুর করে আমার ধন ভাবীর ভোদায় ঢুকিয়ে ঠাপাতে থাকলাম। ভাবী মৃদু চিৎকার করতে থাকল। এভাবে কতক্ষন চোদার পর আমি চিৎ হয়ে শোয়ে পড়ে ভাবীকে বললাম তুমি আমার ধনের উপর বসে ঠাপাতে থাক। কথামত ভাবী তাই করল। আমার ধনটাকে তার ভোদার ভেতর ঢুকিয়ে নিজে নিজেই ঠাপাতে থাকল। আমরা দুজনেই তখন সুখের সাগরে ভাসছি। আরও কিছুক্ষন পর আমি মাল ঢেলে দিলাম ভাবীর ভোদাতেই। ভাবীও দেখলাম ক্লান্ত হয়ে আমার বুকে শুয়ে পড়ল। কিছুক্ষন পরে আমরা যার যার জামাকাপড় ঠিক করে যার যার রুমে গেলাম ঘুমাতে।এভাবেই প্রতিরাতে চলতে লাগল আমাদের কামলীলা। ভাবী বলে, যতদিন না তোর ভাই আমেরিকা থেকে দেশে ফিরে আসবে ততদিন তোর ভাইয়ের কাজ তুই করবি। বলল, প্রয়োজনে যৌনশক্তি বর্ধক ভায়াগ্রা খেয়ে নিবে।
  6. কাজের মেয়ে চটি ওর নাম ফাগুন, আমাদের বাসার নতুন কাজের মেয়ে। অন্য দশটা কাজেরমেয়ের সাথে ওর তুলনা করা যাবে না। আমি হলফ করে বলতে পারি আমাদের সম্ভ্রান্ত ফ্যামিলির অনেক মেয়েদের থেকে ও অনেক সুন্দর ছিল, বিশেষ করে ওর বুক। আসলে মেয়েটার বয়স হার্ডলি ১৫,১৬, হাইট ৫' ১-২" কিন্তু বুকের গড়ন অনেক বড় সাইজের ছিল। প্রথম দিন থেকেই আমার সুনজরে ছিলো ফাগুন। আমি নানাভাবে সিস্টেম করার চেষ্টা করেছি ওকে।আমি প্রথম দিন দেখেই বুঝলাম এইমেয়ে সিস্টেমের মেয়ে। যেই বড় বড় দুধ তার, কোনো ছেলে হাত না দিলে সিম্পলি ইম্পসিবল, যতই বাড়ন্ত ফিগার হোক না কেন? আর বাড়ন্ত ফিগার হলে শুধু দুধ কেন, সব কিছুই তো বড় হওয়ার কথা।তো যে কথা বলছিলাম। আমি মেয়েটাকে অনেক অনেক ভাবে সিস্টেম করার চেষ্টা করছিলাম। মাগী কিছুতেই সিস্টেম হয় না। গেলো আমার মেজাজ খারাপ হয়ে। শেষে এমন শুরু করল যে ডাইরেক্ট আমাকে ইগনোর করা শুরু করলো। এইবার তো সত্যিই মেজাজ খারাপ হওয়ার যোগাড়। কাজের মেয়ে কে চোদার গল্প খুবই আশ্চর্য হলেও সত্য, ফাগুন জানত যে সে আকর্ষনীয়া। এবং আমাদের বাসায় কাজ করেও ফাগুন এই সুবিধাটা আমার কাছ থেকে নিতে চাইতো। এমন একটা ভাব যেন আমাকে নাচাচ্ছে। আমি এর পর আর কিছু বললাম না।আমি পুরা ঠিক করে ফেললাম যে আমি এইটাকে জোর করেই করবো। যা হওয়ার পরে দেখা যাবে।এইভাবে আস্তে আস্তে প্রায় এক বছর কেটে গেলো ওর আমাদের বাসায়।একদিন আমার দাদাভাই অনেক অসুস্থ হয়ে ফোন করলো, আব্বা, আম্মা এমনকি আমাকেও যেতে বললো। কিন্তু আমার সেমিস্টার ফাইন্যাল ছিল সামনে। তাই আমার পক্ষে যাওয়া সম্ভব ছিল না। আমি বললাম তোমরা যেয়ে দেখে আসো। যদি সিরিয়াস কিছু হয় তাহলে খবর দিও যাই হোক, আমি চলে যাবো।তো কথা মতো আব্বা, আম্মু তার পরের দিনই চলে গেলো গ্রামের বাড়ি। ঘরে রইলাম আমি, আমার বোন আর ফাগুন। আর এক মামাও ছিল। কিন্তু মামা সকালে অফিস চলে যেত, আসতো একদম রাতে। পরের দিন সকালেই আব্বু আম্মু রওনা দিলো। বোনকেও কলেজ নামিয়ে দিয়ে আসলাম। আর মামা তো সকালেই অফিস চলে গেলো, রইলাম শুধু আমি। কাজের মেয়ে কে চোদার গল্প Kajer Meye Chodar Golpo কাজের মেয়ে চোদার গল্প প্রথমেই কোনো কথা বার্তা ছাড়া আমি এক প্যাকেট কনডোম কিনে আনলাম। যা হওয়ার একটা কিছু আজকে হবেই। আসলে সেক্স আমাকে যত না চাড়া দিয়েছিলো তার চেয়ে বেশি চাড়া দিয়েছিলো ফাগুনের আমাকে ইগনোর করাটা। আসলে আমার মেজাজটাই খারাপ হয়ে গেছিলো।তো সেই দিনের ঘটনাটা যা ছিল-সবাই চলে গেলে আমি ফাগুনকে বললাম আজকের খবরের কাগজটা আনতে। আরো বললাম আমাকে ভালো করে এক কাপ চা বানিয়ে দিতে। ও নিয়ে আসলো।আমি বললাম, ফাগুন শোনো।বলল, জী ভাইয়া, বলেন?আমি বললাম, তুমি কিন্তু অনেক সুন্দরী, এইটা জানো? যদিও তুমি বাসায় কাজ করো কিন্তু আসলেই তুমি সুন্দরী।ও কি বুঝলো জানিনা, হঠাৎ আমাকে বললো, আমি কাজ করার মেয়ে না। আমার বাবা গ্রামের মাতব্বর। আমার এক চাচা এইখানে ঘুরাবার কথা বইলা কাজে দিয়া গেছে।আমি অবাক হয়ে বললাম, তাই নাকি! আসলেই তো তোমাকে দেখে কিন্তু মনে হয় না।ও বলল, আমার বাসায় টিভি, ভিসিআর সব আছে। কাজের মেয়ে কে চোদার গল্প আমি আর এই ব্যাপারে কথা বললাম না। আমি ওকে জিগ্গেস করলাম, আচ্ছা তোমার সাথে কি কারো প্রেম ছিল;,ও কিছু না বলে চুপ করে রইলো।আমি বললাম না মানে তোমার বুকগুলো অনেক সুন্দর, এতো বড় বড় দুধ তোমার আমি সরাসরি বলে ফেললাম। তোমার বয়সের মেয়ের তো এতো বড় দুধ হয় না।ও বললো, ভাইয়া, আমার অনেক কাজ আছে, আমি যাই।আমি সাথে সাথে ডাকলাম, আরে শুনো, আচ্ছা তুমি দেখতে এতো সুন্দর, তোমার এতো সুন্দর বুক, একটু আদর করতে দিলে কি হয়? এমন করো কেন?ও,কে, যাও, আমি এখনই তোমাকে ১০০ টাকা দিচ্ছি।ও সাথে সাথে বললো, দেখেন ভাইয়া, আমাকে এইসব কথা বলবেন না। আমি এইগুলা করি না।মাগী আমাকে আর কোনো কথা বলার চান্স না দিয়ে চলে গেলো। আমার মেজাজ তো ৪৪০ ভোল্ট মাগী আমি জন্মেও বিশ্বাস করুম না তরে কেউ কিছু করে নি।আর কেউ না চুদলেও এটলিস্ট তোর বুক অনেক টিপেছে। কারণ একবার দুইবার টিপলেও এতো বড় দুধ কারো হয় না।আমি আস্তে আস্তে উঠে ঘরের সব গুলো জানলা বন্ধ করলাম, যাতে শব্দ বাইরে যেতে না পারে। বারান্দার দরজাগুলো আটকে দিলাম। জানালার পর্দাগুলো টেনে দিলাম। পুরো ঘরটাই কেমন জানি অন্ধকার হয়ে গেলো। আমি আমার রুমে গেলাম। যেয়ে একটু চিত্কার করে বললাম, কি ব্যাপার, সারাদিন কি খালি টি.ভি দেখলেই হবে নাকি? আমার রুমে তো পা দেওয়া যাচ্ছে না, এতো ময়লা আসলো কোথা থেকে? কাজের মেয়ে কে চোদার গল্প Bangla Choti Kajer Bua এই ফাগুন, ফাগুন ঘর ঝাড়ু দাও নাই?আমার রুমটা আমাদের বাসার একদম প্রান্তে যেখান থেকে চিত্কার করলে অন্য কারো শোনার মোটামুটি সুযোগ নেই, আর শোনা গেলেও তা খুবই ক্ষীন হবে।ও দেখলাম দৌড়ে আসলো। বলল, কি হয়েছে, চিল্লাচ্ছেন কেন?আমি এমন একটা ভাব করলাম যেন আমি খুব একটা জরুরি কাজে ব্যাস্ত আর ময়লা আমার মেজাজ খারাপ করেছে। আমি ওকে বললাম, আমার ঘরটা ঝাড়ু দিতে কি তোমার ইচ্ছা করে না? নাকি নিজেরে মহারানী ভাবতে আরম্ভ করেছ?ও কিছু না বলে ঘর ঝাড়ু দেওয়া শুরু করলো। আমি আস্তে করে উঠে ওর পিছনে গিয়ে এমন একটা ভাব নিলাম যেন কিছু খুঁজতেছি মহা ব্যাস্ত ভাব। ফাগুনও ভাবছে আমি কাজে ব্যাস্ত। ও আমার পিছন দিকে ঘুরে ঘুরে টেবিলের নিচে চেয়ারের নিচে ঝাড়ু দিচ্ছিলো। আমি আস্তে করে আমার রুমের দরজা লক করে দিলাম যাতে পুরো ঘর সাউন্ড প্রুফ হয়ে যায়। আমি কোনো কথা বার্তা না বলে আস্তে করে যেয়ে পিছন দিক থেকে ওকে জাপটে ধরলাম।ধরেই আমার দুই হাত দিয়ে ওর দুই দুধে দুইটা চাপ একবার, দুইবার, তিনবারবেশ কয়েকটা চাপ দিয়ে নিলাম ও কিছু বোঝার আগেই। ও সাথে সাথে ঝটকা মেরে সরে যেতে চাইলো। আমি ওকে পেঁচিয়ে ধরে রইলাম। আমি বললাম, আমি এখনও কোনো জোরাজোরি করতে চাই না। তুমি আমাকে এমনিতেই দাও, তোমারও সুখ আমারও সুখ। কাজের মেয়ে কে চোদার গল্প তাও দেখি মেয়ের জিদ ছোটে না। খালি বলে, ছাড়েন বলতেছি, ভালো হবে না। আমারও মাথা গেছে খারাপ হয়ে।আমি এক ঝটকা টানে ওকে আমার বিছানায় শুইয়ে দিলাম। ও উঠে আসার আগেই আমি ওর উপর শুয়ে ওর গলায়, ঘাড়ে চুমাইতে শুরু করলাম। ও অনেক ছটপট করছিলো ঠিক যেমনটা কই মাছ করে পানি থেকে উঠালে।আমি ওর উপর শুয়ে নিজেকে একটু সেট করে নিলাম কারণ ওর হাইট ৫'য়ের মতো আর আমি ৫'১০"। আমি আমার দুই পা দিয়ে ওর দুই পা সরিয়ে আমার পায়ের সাথে পেঁচিয়ে নিলাম যাতে পা নাড়াচাড়া করতে না পারে। আমার দুই হাত দিয়ে ওর দুই হাত চেপে ধরলাম। এইবার ইচ্ছামতো খানিকক্ষণ ওকে চুমাতে লাগলাম, ওর গলায়, ওর মুখে, কিন্তু ঠোঁটে চুমানো সম্ভব হচ্ছিলো না। ও খালি মুখ এদিক ওদিক সরিয়ে নিচ্ছিল। আমাকে থ্রেট দিয়ে বললো, আমি কিন্তু আপুকে বলে দেবো। আমি বললাম, আমিই বইলা দিমু, তোমার কষ্ট করা লাগবো না।ও অসহায়ের মতো আমাকে বাধা দেওয়ার চেষ্টা করছিলো। কিন্তু একটা ১৫ বছরের মেয়ের কি আর শক্তিতে কুলায়? আমি এবার ওই অবস্থাতেই ওর উপর হাঁটু মুড়ে উঠলাম। উঠে আমার দুই বাহু দিয়ে ওর দুই হাত চেপে রেখে ওর দুধ চিপতে লাগলাম। দেখলাম ও চোখ বন্ধ করে খালি ভাইয়া ছাড়েন, ভাইয়া ছাড়েন করছে। আমি ওকে এক হ্যাঁচকা টানে পিছন ঘুরিয়ে দিয়ে ওর চেন টেনে খুলে ফেললাম।কম্পিউটারে মিউজিক বাজছিলো। সেইদিন প্রয়োজনের তুলনায় অনেক জোরেই সাউন্ড দেওয়া ছিল। কাজের মেয়ে কে চোদার গল্প ওর ভাইয়া ছাড়েন, ভাইয়া ছাড়েন মিউজিকে ঢাকা পড়ে গেল। কিন্তু ওর কাপড় আমি কিছুতেই টেনে নিচে নামাতে পারছিলাম না।আবার ওকে ঘুরালাম। ঘুরিয়ে বললাম, চুপ, একদম চুপ, নইলে খুন করবো মাগী, আমারে শিখাস না? এই দুধ কয়জনরে দিয়া টিপাইছস কে জানে। আবার সাধু সাজস?ও আমাকে একটা ধাক্কা দেওয়ার চেষ্টা করতেই আমি ওকে সজোরে দুইটা থাপ্পড় দিলাম। বললাম, একদম চুপ, আজকে তরে খাইসি। যদি চিল্লাচিল্লি লাফালাফি করস তাইলে তোরই ক্ষতি। আজকে যেমনেই হোক তোরে আমি খাইসি। এই বলে আমি ওর সালোয়ার বুকের নিচে নামিয়ে ওর বিশাল দুধের একটা আমার মুখে নিয়ে পাগলের মতো চুষতে লাগলাম। প্রথম মুখ লাগাতেই একটা ধাক্কা দিলো। তারপর আমি আরো জোরে চেপে ধরে ওর দুধ আমার মুখে নিলাম। পাগলের মতো চুষতে লাগলাম যেন আমি কতদিনের ক্ষুধার্ত। এইবার দেখি ও একটু চুপ হয়ে গেছে। আমি আবার টিপতে শুরু করলাম।আমি বললাম, কিরে, সত্যি করে বলতো, খারাপ লাগতেসে তোর?ও বললো, ভাইয়া ছাড়েন, যদি বাচ্চা হইয়া যায়?আমি বললাম না, হবে না। আমি কনডম নিয়া আসছি। এইটা দিয়া করলে কিছু হয় না। আমি ওর হাতে আমার ধোনটাকে ধরিয়ে দিতে চাইলাম। ও নিচ্ছিল না। আমি জোর করে ওর হাতে ধরিয়ে দিলাম। ও মনে হয় অনেক ভয়ও পেয়ে গেছে। সাথে সাথে অনেক জোরে আমাকে ধাক্কা দিলো। আমি এইবার চুলের মুঠি ধরে বললাম, একদম চুপ। দেখলাম ও ওর বুকটা অনেকটাই আমাকে দিয়ে ওর দুই হাত ওর পাজামার মধ্যে দিয়ে রেখেছে। আমি ভাবলাম বেশি দেরি করা ঠিক হবে না। আমি তো আগেই ওর দুই পা আমার পা দিয়ে পেঁচিয়ে ফাঁক করে রেখেছিলাম। কাজের মেয়ে কে চোদার গল্প কাজের মেয়ের সাথে চোদাচুদি এইবার আমি আমার শরীর দিয়ে ওর বুকে চাপ দিয়ে আমার হাত দিয়ে ওর পায়জামার ফিতা টানতে চেষ্টা করলাম কিন্তু নড়াচড়াতে ফিতা গেলো আটকে। মহা মুশকিল!এইদিকে ও বললো, ভাইয়া, আমি কিন্তু চিল্লানি দিব। আমি একটু ঘাবড়ে গেলাম। কিন্তু ভয় না পেয়ে বললাম, তুই চিল্লাইলে তোরই ক্ষতি, আমায় কেউ কিছু বলব না। আমারে কি কেউ বের করে দিবে? উল্টা তরেই লাথি দিয়া বের করে দেবে। আমি বলবো তুই বাজে মেয়ে।এই বলে একটা হ্যাঁচকা টান দিলাম। ফিতা কিন্তু এমন ফাঁসান ফেঁসেছিলো যে মনে হল ওটা ছুরি দিয়ে কাটা ছাড়া আর উপায় নাই। ওর পায়জামার মধ্যে ছোটো একটা ফুটা ছিল উপরে, মনে হয় সব পায়্জামাতেই থাকে। তাছাড়া সে তো আর হাল ফ্যাসনের মেয়ে ছিল না যে তার পায়জামা অন্যরকম হবে? আমি ওই জায়গায় হাত ঢুকিয়ে এক হ্যাঁচকা টানে ওর পায়জামা ছিঁড়ে ফেললাম।ওর শরীরের আর একটু উপরে উঠে ওর হাত চেপে রেখে কোনো রকমে কনডমটা পরলাম। আবার নিচে নেমে কথা বার্তা ছাড়া ওকে জোরে জোরে দুইটা চড় দিলাম। এইবার যেন একটু নেতিয়ে পড়ল। আমি সাথে সাথে আমার ধোনটা ওর ভোদার মুখে সেট করলাম। ক্লিন একটা ভোদা, লাল টুকটুকে, আমি প্রথমেই অনেক জোরে একটা চাপ দিলাম।ও মাগো বলে ও অনেক জোরেই একটা চিত্কার দিলো। আমি তাও ঢুকানোর চেষ্টা করলাম। কাজের মেয়ে কে চোদার গল্প দেখি বাল ঢুকে না মহা মুস্কিল? আবার বের করলাম। বের করে অনেক থুতু মাখলাম কারণ ওই সময় ওকে একবার ছেড়ে দিলে আবার ধরা সম্ভব ছিল না। আমি ওকে বললাম, একদম চুপ, নাহলে ব্যথা পাবি। আজকে তোরে আমি ছাড়তেছি না।ও যেন অনেকটাই অসহায় হয়ে পড়েছিল। আমি ওর ভোদা আমার দুই আঙ্গুল দিয়ে ফাঁক করলাম। তারপর থুতু মাখানো ধোনটা ঢুকিয়েই একটা চাপ দিলাম দেখলাম ও চোখ বন্ধ করে চোখ মুখ বিকৃত করলো। মনে হলো অনেক ব্যথা পেয়েছে। আমি আর কয়েকটা চাপ দিতেই আমার ধোনটা ঢুকে গেলো ওর মধ্যে। এইবার আর মাগী তুই কি করবি?আমি আমার দীর্ঘ এক বছরের রাগ মিটিয়ে ওকে চুদতে লাগলাম। ওর দুধে কামড় দিয়ে পুরো শেষ করে দিলাম। অনেক জোরে জোরে ওর দুধ দুইটা চাপছিলাম। আবার শুরু করলাম ঠাপানো। বেশ কয়েকবার ঠাপ দিয়েই আমি মাল ফেলে দিলাম। কাজের মেয়ে কে চোদার গল্প কিছুক্ষণ ও চুপ, আমিও চুপ।এরপর আস্তে করে উঠে বসলাম। উঠে বললাম, তোমার জন্য এমনটা হয়েছে নাইলে এতদিনে তুমি অনেক আরাম পাইতা, আমিও পাইতাম। যাও এইবার দিছি তোমার দেমাগ ভাইঙ্গা, আর তোমারে চোদনের টাইম নাই।আমার আসলে অনেক রাগ ছিল ওর উপরে।ও কিছু বলছিলো না। আমি আবার ওর বুকে হাত দিয়ে বেশ কিছুক্ষণ টিপলাম মনের সমস্ত শান্তি মিটিয়ে। তারপর ওই দেখি এক সময় আমার কাছ থেকে উঠে কাপড় তুলে নিয়ে বাথরুমে চলে গেলো।যদিও আমি সেইদিন অনেক ভয়ে ছিলাম যদি ও বলে দেয়। কিন্তু মাগী কাউকে কিছু বলে নাই। এরপর আমিও আর তেমন কথা বলতাম না ওর সাথে। কিছুদিন পরে ও ওর গ্রামের বাড়িতে চলে গেছিলো। ওর মনে হয় বিয়ে ঠিক হয়ে গেছিলো।
  7. डाईवोर्सी भाभी सेक्स कहानी एक अनजान भाभी से मिस काल पर बात होने के बाद दोस्ती की है. हम फोन पर सेक्स की बातें करने लगे और एक दिन हम सेक्स के लिए मिले. दोस्तो, मैं अन्तर्वासना का नियमित पाठक रहा हूं. मैंने बहुत लोगों की कहानियां पढ़ी हुई हैं. इसलिए मैंने भी सोचा कि क्यों न मेरे साथ हुई सेक्स कहानी को आपके साथ साझा किया जाए. मेरा नाम कमल (बदला हुआ नाम) है. मेरी उम्र अभी 21 साल है. मैं पूर्वी उत्त्तरप्रदेश के जिले देवरिया का रहने रहने वाला हूं. ये बात उस समय की है जब कोरोना के कारण भारत में पूर्ण लॉकडाउन लगा हुआ था. और लोगों की तरह मेरा भी समय इसी अन्तर्वासना की कहानियां पढ़ कर ही बीत रहा था. एक रात एक अनजान नंबर से मुझे व्हाट्सएप मैसेज आया. मैं अन्य नंबर की तरह उसे भी इग्नोर करके सो गया. जब मैं अगले दिन मॉर्निंग में उठा तो उस व्हाट्सएप को चैक किया. उस पर न कोई डीपी थी और न ही कोई व्हाट्सएप के बारे में कुछ लिखा था … और न ही लास्ट सीन शो कर रहा था. मैंने भी एक एसएमएस करके उस नंबर को डिलीट कर दिया. मुझे उसी दिन फिर से उसी नंबर से व्हाट्सएप से हाय लिखकर आया. मैंने उस व्हाट्सएप वाले की जानकारी ली तो मुझे मालूम हुआ कि वह एक भाभी का नम्बर है. वो मेरे ही शहर से कुछ ही दूरी पे एक शहर की रहने वाली हैं. मैंने उनसे पूछा कि क्या आप मुझे जानती हैं? उन्होंने ना में उत्तर दिया. मुझे न जाने कुछ ऐसा लगा कि यह झूठ बोल रही होंगी क्योंकि इतनी कम दूरी से किसी का रॉन्ग नंबर आना जल्दी संभव नहीं होता है. फिर मैंने उनसे उनकी फोटो मांगी, उन्होंने मुझे बड़ी आसानी से अपनी फोटो भेज दी. उनकी फोटो देखने के बाद मेरा मन बन गया और मैंने उनसे बात करना शुरू कर दी. उस समय तो हम दोनों में ज्यादा बात नहीं हो पाई. उन्होंने रात को कॉल करने की बात बोलकर फोन रख दिया. फिर रात को 11 बजे मुझे उन्होंने कॉल किया. उन्होंने बताया कि वह शहर में लगभग दो साल से रूम लेकर रहती हैं. उनके साथ उनकी एक छोटी सी बेटी भी रहती है. वह अपने पति को छोड़ चुकी हैं क्योंकि उनका पति उनको शराब पीकर मारता पीटता था और गलियां देता था. वो उनको बिल्कुल भी प्यार नहीं करता था. सॉरी दोस्तो, मैं भाभी के बारे में बताना ही भूल गया. उनका नाम रूबी (बदला हुआ नाम) था और वह अभी 24 साल की ही थीं मतलब मुझसे केवल 3 साल बड़ी थीं. उनकी शादी काफी पहले ही हो चुकी थी. उन डाईवोर्सी भाभी का फिगर 34-32-36 का था. जो मुझे बाद में मालूम हुआ था. मैंने जब भाभी से पूछा कि भाभी आपकी शादी भी हो चुकी है और आपकी एक बेटी भी है. तो आप बिना पति के कैसे रह लेती हैं? रूबी भाभी- क्या कर सकती हूँ. बस मन मार के रहना ही पड़ता है. मैंने- भाभी मन मार कर से क्या मतलब है? रूबी भाभी- आप नहीं समझोगे. मैंने- बताइए ना भाभी, मुझे आपसे सुनना अच्छा लग रहा है. रूबी भाभी- देखो कमल जी मुझे सेक्स किए हुए दो साल से ऊपर हो गए हैं. मुझे करने का बहुत मन करता है. परंतु मैं ऐसे आदमी के साथ करना चाहती हूं. जो मेरी गोपनीयता का पूरा ध्यान रखे और मुझे उसके साथ किसी भी प्रकार की जोखिम न हो. मैंने- अच्छा भाभी ऐसी बात है. मैं ये आपकी कमी पूरी कर सकता हूं. रूबी भाभी- आप तो मुझसे छोटे हो. आप शायद नहीं कर पाओ. मैंने- छोटे बड़े होने की बात नहीं होती है भाभी … बात एक दूसरे को संतुष्ट करने की होती है. मैं आपको गारंटी देता हूं कि मैं आपको संतुष्ट कर दूंगा. रूबी भाभी- अच्छा कैसे कर पाओगे … और आपका सामान कितना बड़ा है? मैंने- सामान की बात छोड़ो भाभी. मैं आपको गारंटी देता हूं कि आपको बिना संतुष्ट किए नहीं हटूंगा. वैसे मेरे लंड की साइज अभी 6 इंच है और ये 2.5 इंच मोटा है. रूबी भाभी- अच्छा. दिखाइए तो जरा अपने औजार को! मैंने अपने लंड की पिक लेकर भाभी को सेंड कर दिया. रूबी भाभी- देखने में तो बड़ा मस्त है. परंतु इसका टेस्ट लेने के बाद ही मालूम चलेगा कि वाकयी में इसमें दम है कि नहीं. मैंने- जी हां भाभी, बंदा टेस्ट कराने के लिए हर वक्त हाजिर है. रूबी भाभी- ठीक है. जरूर टेस्ट करेंगे. जरा लॉकडाउन बीतने दीजिए. आपकी ताकत को जरूर टेस्ट करूंगी. लॉकडाउन बीतने तक हमारी और भाभी की बातें होती रहीं. मैं हर दिन कॉल पर ही भाभी को गर्म करके उनकी चूत से पानी टपकवा दिया करता था. फिर वह दिन आ गया, जब मैं भाभी से मिलने जाने वाला था. यहां लॉकडाउन की पाबंदियां खत्म धीरे धीरे होती जा रही थीं परंतु अभी भी सारी बंदिशें नहीं खुली थीं. हमारे सामने एक समस्या यह थी कि आखिर हम मिलेंगे कहां. क्योंकि उस टाइम कोई भी होटल नहीं खुल रहे थे. मैं उनके रूम पर भी नहीं जा सकता था क्योंकि वहां उनको जानने वाले रहते थे. अगर मुझे देखते तो शक करते. हम दोनों में वासना की आग बहुत बढ़ चुकी थी और यह आग हम दोनों को बिना मिले शांत होने वाली नहीं थी. मैंने अपने एक दोस्त को फोन किया और उससे पूछा कि मुझे एक रूम चाहिए कुछ घंटों के लिए, अगर कोई जुगाड़ हो सकती है, तो बता. उसने कहा- देख भाई, मेरा एक फ्रेंड है वो उसी शहर में रहता है. मैं उससे बात करके बताता हूं. मैंने ओके बोलकर फोन रख दिया. दस मिनट बाद दोस्त ने कमरे की जुगाड़ करवा दी थी. बस वो साफ़ नहीं था क्योंकि लॉकडाउन में उधर कोई गया ही नहीं था. इधर रूबी भाभी बार बार फोन करके पूछ रही थीं कि रूम की व्यवस्था हुई कि नहीं. मुझसे अब सहन नहीं हो रहा है. मुझे जल्दी से आपसे जम कर चुदाई करवानी है. मेरी चूत में आग लग चुकी है. मैंने भी उनसे अगली सुबह मिलने को बुला लिया और मैं उनके शहर अगले दिन 10 बजे तक पहुंच गया. मैंने रूम पर पहुंच कर भाभी को कॉल करके रूम का पता भेज दिया. वहां भाभी को आने में आधा घंटा लगना था, तब तक मैंने रूम को अच्छे से साफ कर दिया. ये रूम शहर से थोड़ा बाहर था, जहां कुछ दूर दूर घर बने हुए थे. इसलिए मुझे भी ये कमरा अच्छा लगा. मैंने भी सोच लिया था कि आज भाभी को जम कर चोदूंगा. मैं रूम के बाहर ही बैठा हुआ था, तभी भाभी अपनी स्कूटी से आ गईं. भाभी क्या मस्त लग रही थीं. उन्होंने नीके रंग की साड़ी पहनी हुई थी जिसमें वो पूरी अप्सरा बन कर आई थीं. ऐसा लग रहा था कि आसमान से रम्भा उर्वशी उतर कर आई हो. मैं उनको देखता ही रह गया. भाभी आते ही रूम में चली गईं. मैं भी उनके पीछे रूम में आ गया और अन्दर जाकर दरवाजा बंद कर दिया. दरवाजा बंद करते ही भाभी मुझसे चिपक गईं और कहने लगीं- मेरी दो साल से प्यासी जमीन को अपना पानी पिला दीजिए. मैं बहुत प्यासी हूं. मैंने भी भाभी के रसीले होंठों पर अपने होंठ रखकर चूसना शुरू कर दिया. मैं उनके मोटे होंठों को रगड़ता हुआ रसपान करने लगा. वे अपने दोनों हाथ मेरे बालों में फेरती हुई किस किए जा रही थीं. इधर मैं भी उनके दोनों मोटे चूतड़ों को और मम्मों को दबाए जा रहा था. हम दोनों एक दूसरे को किस करते हुए कपड़े निकालने लगे. मैंने भाभी का पेटीकोट और ब्लाउज भी खोलकर अलग कर दिया. अब भाभी बस सफेद ब्रा और पैंटी में रह गई थीं. भाभी की उभरी हुई चूचियां और अनकी फूली हुई गांड क्या मस्त लग रही थी. भाभी की पूरी बॉडी एकदम दूध सी गोरी थी. ऊपर से सफेद रंग की ब्रा पैंटी गजब की कयामत ढा रही थी. मैं भाभी को बेड पर लिटाते हुए उनको किस किए जा रहा था. मेरा हाथ अब उनकी पैंटी में चला गया था और उनकी चूत को सहलाने लगा था. भाभी भी जोश में आ गई थीं और मेरे लंड को कच्छे के भीतर ही सहलाने लगी थीं. मैंने भाभी को किस करते हुए उनकी ब्रा को निकाल फैंका और उनके मम्मों पर टूट पड़ा. मैं उनके मम्मों को मसलते हुए चूसे जा रहा था और भाभी ‘सी … सीई …’ की मादक आवाज निकाले जा रही थीं. फिर मैंने नीचे आते हुए भाभी की पैंटी को निकाल दिया. भाभी अपनी चूत को साफ़ करके आई थीं. उनकी चूत पर एक भी बाल नहीं था. उनकी फूली हुई चूत की खुशबू सच में बड़ा आनन्द दे रही थी. भाभी कुछ संभल पातीं, उससे पहले ही मैंने भाभी की चूत पर मुँह लगाकर उनकी चूत चाटनी शुरू कर दी. मैं अपनी जीभ भाभी की चूत में घुसाए जा रहा था और भाभी लगातार कराहें भर रही थीं- आह … आह … और जोर से चूसो … पूरी खा जाओ मेरी चूत को … आह! भाभी मेरा सिर अपनी चूत पर दबाए जा रही थीं. फिर मैंने भाभी को अपने मुँह पर अपनी चूत रखकर बैठने का इशारा किया. जैसे ही भाभी मेरे मुँह पर चूत रखकर बैठीं, मैंने अपनी जीभ उनकी चूत में घुसा दी. भाभी- आह … खा जाओ चूत को … आह … मर गई. चूत चाटने के साथ ही मैं भाभी के मम्मों को पकड़ कर दबाए जा रहा था. लगभग 5 मिनट के बाद भाभी मेरे मुँह में ही झड़ गईं और बेड पर गिर कर हांफने लगीं. अब उनकी बारी मेरा लंड चूसने की आ गई थी. मैंने भी अपने लंड को निकालते हुए उनके मुँह के सामने कर दिया. भाभी पूरा लंड मुँह में लेकर चूसने लगीं. मेरे मुँह से ‘आह … आह …’ की आवाजें आने लगीं और भाभी के मुँह से गुंग … गुंग …’ की आवाजें पूरे कमरे में गूंजने लगी थीं. मैंने भाभी को इशारा किया कि मैं आने वाला हूं. भाभी इशारा करती हुई बोलीं कि मुँह में आ जाओ. मैंने ‘आह …’ की आवाजें करते हुए अपना पूरा माल उनके मुँह में गिरा दिया. भाभी मुँह में मेरा पानी लिए हुए बाथरूम में चली गईं और उधर से कुल्ला करके वापस आकर बेड पर लेट गईं. अब हमारा चुदाई का समय आ चुका था. मैंने भाभी को किस करते हुए उनकी चूत में उंगली करनी शुरू कर दी. भाभी अपनी गांड उठा उठा कर उंगली अन्दर लेने लगी थीं. जैसे ही भाभी गर्म हुईं, वह लंड पेलने के लिए चूत में बोलने लगीं. मैंने भी सही समय देख कर उनके पैरों के बीच आकर अपना लंड उनकी चूत पर सैट कर दिया. मुझे पता था कि भाभी दो साल से चुदी नहीं है, तो उनको थोड़ा दर्द होगा. मैंने भाभी के होंठों को अपने होंठों में जकड़ते हुए एक जोर का झटका दे मारा. मेरे जोरदार झटके से भाभी की चीख तो निकली परंतु मेरे मुँह में ही दब कर रह गई. मैं अपने लंड को भाभी की चूत में पेले ही उनको किस किए जा रहा था और उनके मम्मों को दबाए जा रहा था. भाभी ने एक मिनट बाद अपनी गांड हिलाते हुए मुझे इशारा दे दिया कि मैं अब चुदने के लिए तैयार हूं. तब मैंने अपने लंड को आगे पीछे करना शुरू कर दिया. मेरे मुँह के उनके होंठों से हटते ही भाभी ने एक लंबी सांस ली और मुस्कुराने लगीं. मैंने अपने दोनों हाथ उनके बूब्स पर रखे और उनको पूरी ताकत से चोदने लगा. भाभी ‘आह … आह …’ की आवाजें निकालती हुई अपनी चूत को सहलाने लगीं. धकापेल चुदाई चलती रही. इस दौरान मैंने कई पोजीशन में भाभी को सैट किया और उनकी चुदाई करता रहा. बाद में जब मैं चरम सीमा पर आ गया तो मैंने अपनी स्पीड शताब्दी एक्सप्रेस के जैसी बढ़ाई और उनकी चूत में पूरा लंड पेलने लगा. भाभी- आह … मजा आ रहा है … और जोर से चोदो मुझे … आह … फक मी … मैं- भाभी कैसा लग रहा है? भाभी- बहुत अच्छा लग रहा है राजा. चोदो मुझे जोर जोर से चोदो … आंह फाड़ दो मेरी चूत को … आज से मैं आपकी रानी रंडी सब … जो मजा चुदाई में है … वह किसी में भी नहीं … आह! वे बड़बड़ाती रहीं और उनकी टांगें अकड़ने लगीं. मैं समझ गया कि भाभी झड़ने वाली हैं. मैंने अपने धक्कों की स्पीड और तेज कर दी. भाभी ने ‘आह … आह …’ करते हुए मेरे लंड पर अपने चूत का गर्म पानी छोड़ दिया. भाभी झड़ चुकी थीं पर अभी मेरा काम नहीं हुआ था, बस मैं आने ही वाला था. तभी मैंने एक जोर का झटका मारा और उनकी बच्चेदानी तक अपना लंड पेल दिया. फिर दस या बारह धक्के के बाद मैं भी झड़ने के कगार पर आ गया. मैंने भाभी से पूछा- भाभी, माल कहां लेना चाहोगी? भाभी मुझे किस करती हुई बोलीं- जान मेरी चूत को आज हरी भरी कर दो, मैं गर्भ निरोधक गोली ले लूंगी. पर आपका पानी अपनी चूत में ही लूंगी. मैंने भी तीन चार झटकों के बाद डाईवोर्सी भाभी की चूत में ही लंड झाड़ दिया. मैंने उस दिन भाभी को 4 बार चोदा. एक बार उनके मना करने के बाद भी उनको जबरदस्त तरीके से चोदा. चुदाई के बाद भाभी बहुत खुश नजर आ रही थीं. भाभी का अच्छा मूड देखकर मैंने उसी दिन भाभी की गांड भी चोदने को बोला परंतु भाभी ने अगली बार बोलकर मना कर दिया. मैंने दस दिन के बाद ही भाभी की गांड भी मारी, वह चुदाई घटना मैं बाद में लिखूंगा. मैं आशा करता हूँ कि आप लोगो को यह डाईवोर्सी भाभी की चुदाई कहानी अच्छी लगी होगी. यह मेरी पहली कहानी है, अगर कोई चूक हो गई हो तो आप कमेंट में बता सकते हैं या मुझे ईमेल भी कर सकते हैं. मैं आपके ईमेल का जरूर जवाब दूंगा. आप सभी के रिव्यूज का मुझे इंतज़ार रहेगा. 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  8. हॉट वाइफ हार्ड सेक्स कहानी में पढ़ें कि मेरी बीवी मेरी मौजूदगी में मेरे चार दोस्तों से चुद गयी. चारों ने मेरी बीवी की चूत गांड मुंह सब जगह लंड घुसा कर मजा लिया. फ्रेंड्स, आप सभी का मेरी चुदाई कहानी में स्वागत है. कहानी के पहले भाग मेरी कमसिन बीवी को मेरे दोस्तों ने चोदा में आपने अब तक पढ़ा था कि उम्र में मुझसे कई साल छोटी मेरी बीवी एक निम्फो हो गई थी. उसकी चुदाई की भूख इतनी ज्यादा बढ़ गई थी कि मैं अकेला उसे ठंडी कर पाने में असमर्थ था. फिर हालात ऐसे बन गए कि मेरी बीवी को अपनी प्यास बुझाने के लिए मर्द मिल गए और मुझे जिल्लत के साथ ही सही … मगर काम मिलने लगा. अभी तक आपने पढ़ा था कि एक दिन मेरे घर में एक नेता जी और तीन अधिकारी जी मेरी बीवी को चोद रहे थे. मैं नेता जी को अपनी बीवी की गांड मारने की तैयारी करते देख रहा था. अब आगे हॉट वाइफ हार्ड सेक्स कहानी: नेता जी मुझसे बोले- स्वप्निल, जाकर क्रीम या तेल ले आ. मैं बेडरूम में गया और क्रीम लेकर आया. जब मैं पहुंचा तो अरुणिमा हंस कर बोल रही थी- उनका तो घुस नहीं पाता आपका कैसे जाएगा? शमशुद्दीन जी नेता जी से बोल रहे थे- आप इसकी गांड मारेंगे, तब तक हम सब क्या करेंगे? इस पर विश्वेश्वर जी बोले कि तब तक तुम सब इस रांड से अपना लंड चुसवा सकते हो. मैं कमरे में घुसा तो विश्वेश्वर जी बोले- आ गया स्वप्निल, चल पहले मेरे लंड पर थोड़ी क्रीम लगा दे. मैंने अपने हाथ में क्रीम लेकर उनके आठ इंच के लंड पर मल दी. उसके बाद उन्होंने अरुणिमा को टेबल पर पेट के बल लिटाया और उसी समय शमशुद्दीन जी ने अपना लंड अरुणिमा के मुँह में डाल दिया. विश्वेश्वर जी ने मेरी बीवी के चूतड़ों को अलग अलग किया और उसकी गांड के छेद पर अपना लंड टिका दिया. फिर धीरे धीरे उन्होंने अपना लंड अन्दर डालना चालू किया. अरुणिमा का छटपटाना शुरू हुआ और वो अपने हाथ से उनकी तोंद को धकेलने लगी. उसके मुँह से आवाज निकली कि आप मेरी गांड क्या मारोगे, आपकी तोंद तो स्पीडब्रेकर बन रही है. अरुणिमा की इस बात से विश्वेश्वर जी थोड़ा चिढ़ गए और बोले- साली रंडी! क्यों मज़ा ख़राब कर रही है कुतिया … गांड खोल और लंड अन्दर ले. ये कह कर उन्होंने एक जोर का तमाचा उसके एक चूतड़ पर मार दिया. फिर उन्होंने उसके दोनों हाथों को पकड़ा और मुझसे बोले- स्वप्निल! इस रंडी के दोनों हाथ तो पकड़ ज़रा. मैंने आगे बढ़ कर अपनी बीवी की दोनों कलाइयों को जकड़ लिया और विश्वेश्वर जी ने उसकी कमर को कसके पकड़ लिया. विश्वेश्वर जी ने शमशुद्दीन जी से कहा- चेहरा पकड़ इसका … और लंड मुँह में अन्दर तक ठेल दे, मुझे दिक्कत नहीं होना चाहिए. शमशुद्दीन जी ने अरुणिमा का चेहरा पकड़ कर उसका मुँह अपने लंड से चोदना चालू कर दिया. इसी बीच विश्वेश्वर जी अरुणिमा की कमर को पकड़ कर धीरे धीरे अपना लंड उसकी गांड में घुसाना चालू कर दिया. धीरे धीरे लंड अन्दर समाने लगा और अरुणिमा छटपटाने लगी. वो मुझे आस भरी नज़रों से देखने लगी कि मैं उसकी गांड फटने से उसे बचा लूं लेकिन मैं तो खुद बुरी परिस्थिति में फंसा हुआ था. लगभग दस मिनट की जोर आजमाइश के बाद आखिरकार विश्वेश्वर जी का पूरा लंड अन्दर घुस गया. ये विश्वेश्वर जी ने खुद बताया क्यूंकि मैं तो अरुणिमा के सामने की तरफ खड़ा था. विश्वेश्वर जी बोले- साली रंडी ने पूरा लंड ले ही लिया, मज़ा आ गया. इस वेश्या की गांड बहुत टाइट है. उसके बाद उन्होंने मेरी बीवी की कमर पकड़ कर उसकी गांड मारना चालू कर दी. धीरे धीरे गांड में लंड चलता रहा. पूरे टाइम अरुणिमा छटपटाती ही रही थी. लगभग दस मिनट के बाद अरुणिमा का छटपटाना कम हो गया और वो आंखें बंद करके अपनी गांड चुदाई का मजा लेने लगी. उसने अपने मुँह से लंड निकाल कर कहा- जान कलाई छोड़ो ना! मैंने कलाई छोड़ दी और वो शमशुद्दीन जी की कमर पकड़ कर अच्छे से उनका लंड चूसने लगी. शमशुद्दीन जी ने अपनी आंखें बंद कर लीं और बोले- अब ये रंडी फॉर्म में आई है, साली लंड तो ऐसा मस्त चूस रही है, जैसे सालों से कोठे पर बैठी हो. अरुणिमा ये सुनकर हंस दी. अब वो दोनों कमर हिला हिला कर अरुणिमा को दोनों तरफ से चोदने लगे और बीच बीच में थोड़ा रुक कर उसके संतरे बराबर मम्मों को मसल देते थे. दोनों जी भर कर अरुणिमा को गालियां भी दे रहे थे. मुझे याद आ रहा था कि किस प्रकार आते समय सब उसे अपनी बेटी और बहन बता रहे थे और अभी कैसे वो सब उसी बेटी और बहन को चोद रहे थे. कुछ उम्र का तकाजा और कुछ अरुणिमा का टैलेंट और कुछ उसकी पहली बार चुदने वाली गांड का टाइट होने के कारण विश्वेश्वर जी और शमशुद्दीन जी अगले पांच मिनट में उसकी गांड और मुँह में झड़ गए. अरुणिमा शमशुद्दीन जी का पूरा माल पी गई. ये देख कर शमशुद्दीन जी चौंक कर बोले- साले स्वप्निल, तूने अपनी वाइफ को अच्छी ट्रेनिंग दी हुई है. लगता है फ्यूचर में और लोगों से भी इसे चुदवाएगा. मैं कुछ नहीं बोला. विश्वेश्वर जी बोले- पूरी रंडियों वाली प्रकृति है इस अरुणिमा की … लेकिन ताज़ा बदन है … तो चोदने में मज़ा बहुत आया. विश्वेश्वर जी अरुणिमा की गांड थपथपा कर बोले- जा, जाकर नहा ले और फ्रेश हो कर नंगी ड्राइंग रूम में आ जा. दोनों ने अपना अपना लंड बाहर निकाला और अरुणिमा गांड मटकाती हुई बाथरूम में घुस गई. सबके सब ड्राइंग रूम में बैठ गए और शराब का दौर फिर से चालू हो गया. दस मिनट बाद अरुणिमा ड्राइंग रूम में आई तो विश्वेश्वर जी उससे बोले- आ जा, मेरी गोद में आकर बैठ जा. अरुणिमा चुपचाप उनकी गोद में बैठ गई और विश्वेश्वर जी उसके मम्मों को मसलने लगे. बीच बीच में उसकी जांघों को सहला देते और चूत में उंगली कर देते थे. थोड़ी देर बाद गुरबचन जी ने उसे अपनी गोद में खींच लिया और अब वो उसके बदन से खेलने लगे. हर दो तीन मिनट बाद राजशेखर जी, शमशुद्दीन जी, गुरबचन जी और विश्वेश्वर जी उसको अपने गोद में खींच लेते और उसके बदन से जी भर कर खेलते. अरुणिमा को भी इस सबमें मजा रहा था. वो हंस हंस सबको अपने दूध चुसा थी और चूत में उंगली करवा रही थी. लगभग तीस मिनट के इस समय में उन सबने मसल मसल कर अरुणिमा की जांघों और मम्मों को लाल कर दिया था. उसके बाद विश्वेश्वर जी बोले- अरुणिमा रंडी! एक काम कर, घुटनों पर बैठ और हम सब का लंड बारी बारी से चूस. मूड बन जाएगा, तो एक बार फिर तुझे चोदेंगे. फिर हम सबको आराम भी करना है. अरुणिमा एक प्रोफेशनल रंडी और उनकी आज्ञाकारी रखैल की तरह तुरंत विश्वेश्वर जी के टांगों के बीच आ गई और उनके सोये हुए लंड को मुँह में लेकर चूसने लगी. थोड़ी देर वो एक का लंड चूसती, फिर दूसरे के पैरों के बीच बैठ जाती और उसका लंड चूसने लगती. चारों बीच बीच में उसके मम्मों को मसल दे रहे थे. लगभग चालीस मिनट के बाद सबका लंड तन गया था और चोदने के दूसरे राउंड का प्रोग्राम बन गया. गुरबचन जी बोले- अब जब विश्वेश्वर जी ने इसकी गांड मार ही ली है, तो मैं सोच रहा था कि मैं भी पहले इसकी गांड ही मार लेता. अरुणिमा तुरंत उनका लंड मुँह से निकाल कर बोली- विश्वेश्वर जी, का बहुत मुश्किल से अन्दर गया था. आपका तो और मोटा तगड़ा है, नहीं जाएगा. गुरबचन जी बोले- विश्वेश्वर जी का भी नहीं जाने वाला था, गया ना … मेरा भी चला जाएगा. अब चल बेडरूम में कार्यक्रम चालू करते हैं. अरुणिमा चुपचाप उठी और गुरबचन जी उसकी कमर पर हाथ रख कर चल दिए. मैं भी उठा तो गुरबचन जी बोले- तुझे भी चोदना है क्या? मैंने ना में सर हिलाया तो वो बोले- तो यहीं बैठ ना …. पीछे पीछे क्यों आ रहा. मैं अनमने ढंग से वापस बैठ गया. थोड़े देर बाद बेडरूम से आवाज आने लगी- ठीक से क्रीम लगा, हां चूतड़ फैला कर रख, हां हां जा रहा अन्दर, थोड़ा धैर्य रख … घुस जाएगा. साथ में बीच बीच में अरुणिमा के कराहने की मादक आवाजें भी आ रही थीं. थोड़ी देर बाद फिर से आवाज आई- देख घुस गया ना पूरा! इस पर अरुणिमा की खिलखिलाने की आवाज आई. उसी टाइम विश्वेश्वर जी उठे और बेडरूम में जाने लगे. वो बेडरूम का गेट खोल कर अन्दर घुस गए और मैं भी पीछे पीछे अन्दर आ गया. बेड के पास अरुणिमा झुक कर खड़ी थी और गुरबचन जी का लंड उसकी गांड में पूरा अन्दर समाया हुआ था. विश्वेश्वर जी बोले- थोड़ा इस रंडी को सीधा कर, ऐसे में ही मैं भी इसकी चूत मार लेता हूँ. अरुणिमा बोली- दोनों एक साथ? विश्वेश्वर जी- हां अब तू सैंडविच चुदाई का मजा भी ले ले. गुरबचन जी ने अरुणिमा के बाल पकड़ कर पीछे खींचे और विश्वेश्वर जी उसके सामने खड़े होकर, उसकी जांघों को फैला कर आ गए. वो खुद झुक कर, उसकी चूत में अपना लंड घुसाने लगे. थोड़ी कोशिश करने के बाद लंड अन्दर घुस गया और दोनों आगे पीछे से एक साथ उसको चोदने लगे. विश्वेश्वर जी बोले- मजा आ रहा है ना रांड? अरुणिमा कुछ नहीं बोली. उसके चेहरे पर दोनों लंड का एक साथ चूत गांड में होने की असहजता झलक रही थी. विश्वेश्वर जी ने उसके गुलाबी होंठों को अपने मोटे मोटे होंठों से जीभर कर चूमा, चूसा और धीरे धीरे साथ में उसकी चूत मारते रहे. गुरबचन जी इस टाइम रुक कर अरुणिमा के मम्मों को जोर जोर से मसल रहे थे और उसके निप्पलों को उमेठे दे रहे थे. फिर विश्वेश्वर जी चोदना रोक कर अरुणिमा के मम्मों को और निप्पलों को चूसने लगे. उस टाइम गुरबचन जी उसकी गांड को तेजी से मारने लगे. अब ये दूसरा राउंड था तो स्वाभिक तौर पर झड़ने में टाइम तो लगना ही था और ये दोनों रुक रुक कर अरुणिमा को चोद रहे थे तो और ज्यादा समय लगने की उम्मीद थी. लगभग तीस मिनट से ज्यादा ही लगा होगा, जब दोनों एक साथ उसकी चूत गांड तेजी से चोदने लगे. अरुणिमा को दोनों के प्रहार झेलने के लिए थोड़ा उचकना पड़ रहा था. आखिरकार दोनों एक साथ उसकी चूत और गांड में झड़ गए. दोनों ने अपना अपना लंड बाहर निकाल लिया. अरुणिमा थक कर धाम से बिस्तर पर लोट गई. ये दोनों बेडरूम के बाहर चले गए. अभी दो मिनट भी नहीं हुए थे कि शमशुद्दीन जी और राजशेखर जी अन्दर आ गए. शमशुद्दीन जी ने अरुणिमा को बांह से पकड़ कर उठाया और खड़ा कर दिया. जैसे तैसे अरुणिमा उठी और जैसे ही झुकने लगी तो थोड़ा लड़खड़ा गई. वो मेमने जैसी मिमियाई- शमशुद्दीन जी प्लीज और गांड मत मारिये, पहले ही बहुत दुःख रहा है. शमशुद्दीन जी बोले- गांड मार भी नहीं रहा तेरी रंडी, कुतिया है तू, तो तुझे कुतिया टाइप ही चोदने वाला हूँ. चूत में लंड डाल रहा हूँ लेकिन पीछे से चोदूंगा. बिना बहस किए अरुणिमा झुक गई और शमशुद्दीन जी ने उसकी चूत में अपना लंड घुसेड़ दिया. राजशेखर जी ने पूछा- अब मैं क्या चोदूँ? या तेरे खत्म होने तक रुकूँ? शमशुद्दीन जी बोले- राजशेखर! लंड चुसवा इस वेश्या से, साली रंडी प्रोफेशनल वेश्याओं को भी फेल कर रही है. राजशेखर जी अरुणिमा के मुँह के पास आ गए और बोले- चल रंडी अपना टैलेंट दिखा और चूस मेरा लंड. अरुणिमा ने बिना बहस किए उनकी कमर पकड़ कर उनका लंड अपने मुँह में ले लिया. शमशुद्दीन जी उसकी कमर को पकड़ कर ताबड़तोड़ उसके चूत का भुर्ता बना रहे थे और अरुणिमा पूरा ध्यान राजशेखर के लंड पर केंद्रित करके चूस रही थी. थोड़ी देर में राजशेखर जी को अहसास हुआ कि सच में अरुणिमा बहुत अच्छे से लंड चूस रही थी. राजशेखर जी बोले- स्वप्निल! कोठे पर बिठा दे इसको, बहुत कमाई होने लगेगी तेरी, इसके टैलेंट के सामने तो सच की रंडियां फेल हैं. वैसे चार लोगों से दो राउंड में चुद गई, ये साली भी कम बड़ी रंडी नहीं है. अरुणिमा सहित सब हंसने लगे, बस मैं ही अपनी वाइफ हार्ड सेक्स देखते हुए गांडुओं सा चुप खड़ा था. दोनों लोग दोनों तरफ से अरुणिमा को तीस मिनट तक चोदते रहे और फिर लगभग एक साथ उसके मुँह और चूत में झड़ गए. रूम से निकलने से पहले राजशेखर जी अरुणिमा से बोले- फ्रेश होकर रूम में आ जा. अरुणिमा फिर बाथरूम में घुस गई. लगभग दस मिनट तक अरुणिमा बाथरूम में रही. तब तक चारों ने एक एक पैग मार लिया. उसके बाद चारों बेडरूम में घुस गए. मैं भी घुस गया, तो देखा कि अरुणिमा नंगी बेड पर लेटी हुई है. विश्वेश्वर जी ने उसे पेट के बल पलटा और उसके चूतड़ों को चूमने लगे. वो पहले चूतड़ों से बोले- मज़ा आ गया. वो विश्वेश्वर जी के लंड को सहलाने लगी. फिर विश्वेश्वर जी अरुणिमा से बोले- बिल्कुल स्कूल की छोरियों के जैसे चूतड़ हैं तेरे, जी कर रहा है चूमता रहूं बस. ये बोल कर विश्वेश्वर जी अरुणिमा के चूतड़ों पर सर रख कर लेट गए. बाकी लोग भी इधर उधर बेड पर लेट गए. तभी गुरबचन जी मुझे देख कर बोले- अबे अरुणिमा के दल्ले, यहां कहां घुस रहा? बाहर जाकर सोफे पर सो जा भोसड़ी के. मैं कुछ बोलने को हुआ तो विश्वेश्वर जी बोले- भड़वे! उठा कर नहीं ले जा रहे इस वेश्या को, बाहर जाकर पसर जा मादरचोद … बहरा हो गया है क्या? बिना कुछ बोले मैं बाहर आकर सोफे पर लेट गया. रात में चार पांच बार मेरी नींद अरुणिमा की मादक आवाजों से टूटी और बेडरूम में झांक कर देखा तो पाया कि कोई न कोई उसे चोद ही रहा था. गनीमत थी कि सब चूत ही मार रहे थे, किसी ने दोबारा उसकी गांड नहीं मारी. सुबह उठते उठते देरी हो गई. घड़ी देखी तो दस बज रहे थे. जैसे तैसे उठ कर डाइनिंग रूम में गया तो देखा कि सब बैठ कर नाश्ता कर रहे हैं. पर अरुणिमा नहीं दिख रही थी. मैंने इधर उधर देखा तो गुरबचन जी मुस्कुरा कर आंख के इशारे से नीचे दिखाने लगे. मैंने झुक कर देखा तो पता चला कि चारों कमर के नीचे नंगे होकर बैठे थे और अरुणिमा पूरी नंगी डाइनिंग टेबल के नीचे थी. वो बारी बारी से सबका लंड चूस रही थी. राजशेखर जी ने कहा- तुम तो घोड़े बेच कर सो रहे थे. कमाल की बात है, जब तुझे पता था कि तेरी वाइफ नंगी चार लोगों के बीच पड़ी है, तो तुझको इतनी चैन की नींद कैसे आ गई थी? गुरबचन जी बोले- अरे तो इसमें कौन सी बड़ी बात है, स्वप्निल अपनी वाइफ को अपनी मर्जी से हमसे चुदवा रहा था और उसे हम पर भरोसा है, तभी तो उसने अपनी फ्रेश वाइफ को हमारे हवाले किया था. शमशुद्दीन जी बोले- वो तो स्वप्निल का हमारे प्रति प्रेम है, लेकिन तुम सब कम हरामी नहीं हो. एक तो इस रंडी को कल दो दो बार चोद ही चुके थे और रात में फिर एक एक बार चोद चुके हो. ऊपर से साथ नहाने के बहाने बाथरूम में भी एक एक बार चोद लिए हो. साली वेश्या की चूत और गांड का भुर्ता बना दिया है. विश्वेश्वर जी बोले- एक बार और चोदने का मन था लेकिन हम समझते हैं कि ये बहुत ज्यादा चुद चुकी है, इसलिए तो आखिरी बार लंड चुसवा कर काम चला रहे हैं. फिर वो लोग मुझे भी बैठ कर नाश्ता करने को बोलने लगे. जब तक नाश्ता चल रहा था, एक एक करके लोग बता रहे थे कि वह अरुणिमा रंडी के मुँह में झड़ गए हैं. जो झड़ जाता था, वो हट कर अपने कपड़े पहनने लगता था और ड्राइंग रूम में बाकी का इंतज़ार करने लगता था. जब चारों का रस निकल गया और चारों उठ गए तो मुझे अरुणिमा की उंगलियां मेरे पैंट पर महसूस हुईं. वो मेरा लंड निकाल कर चूसने लगी. गुरबचन जी जाते जाते बोल गए कि तेरा काम हो जाएगा, जो हम सबने तुझसे वादा किया है. अरुणिमा पूरी तन्मयता से मेरा लंड चूसती रही और लगभग बीस मिनट में मैं उसके मुँह में झड़ गया. मेरा माल पीने और मेरा लंड चाट कर साफ़ करने के बाद वो टेबल से बाहर निकली. वाइफ हार्ड सेक्स से उसके पूरे बदन पर खरोंचें दिख रही थीं और चूत पूरी लाल हो गई थी. गांड भी फूली फूली दिख रही थी, जिससे पता चल रहा था कि चूत सूज गई है. अरुणिमा ने तुनक कर कहा- अब दो चार दिन मुझे मत चोदना, तो भी मैं कुछ नहीं कहूँगी. मैंने सर हिला दिया तो उसने कहा- आप भी कमाल करते हैं, मुझे उन सबसे चुदवाना था, ये मुझे पहले ही बता देते. मुझे समझने समझाने में टाइम लग गया था. अब मैं उसे क्या बताता कि उन लोगों ने अपना दोगलापन दिखा कर उसको चोदा है और इसमें मेरी मर्जी शामिल नहीं थी. अरुणिमा सोने चली गई और मैं अपने ऑफिस निकल गया. मुझे लगा था कि यदि अब उसे बता दिया, तो पता नहीं उस पर क्या बीतेगी. इसलिए मुझे अरुणिमा को सच्चाई ना बताना ही सही लगा. मगर मुझे ये कहां मालूम था कि मेरी कमसिन बीवी को इस चुदाई में न केवल मजा आया था बल्कि वो इस तरह की चुदाई की आदी बनती जा रही थी. उस घटना के चार दिन तक मैंने अरुणिमा को बिल्कुल भी नहीं चोदा और आराम करने दिया. निम्फ़ो बीवी की सेक्स की बातें में मैं आपको उसकी आगे की चुदाई कहानी सुनाऊंगा. आप मेरे साथ बने रहिए और इस हॉट वाइफ हार्ड सेक्स कहानी पर किसी भी प्रकार की राय देने के लिए आप मेल पर मुझसे संपर्क कर सकते हैं. 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  9. टीनेज़ गर्ल सेक्स कहानी मेरी मौसेरी बहन की बुर चुदाई की है. मैं मौसी के घर गया, वहां मौसी की बेटी मेरे साथ छेड़खानी करने लगी. मैं समझ गया कि बहन की चूत लंड मांग रही है। मैं आपको अपने जीवन की एक सेक्स घटना के बारे में बताना चाहता हूं। कहानी लिखने में कोई गलती हो तो कृपया नजरअंदाज करें। यह टीनेज़ गर्ल सेक्स कहानी तब की है जब मैं अपनी गर्मी की छुट्टियों में मौसी के घर गया हुआ था। मैं उनके घर छुट्टियां बिताने पहली बार गया था। मेरे जाने पर मौसी ने खुशी-खुशी मेरा स्वागत किया। मेरी बहनें यानि मौसी की लड़कियां भी मुझे देखकर खुश हुईं। मेरी मौसी के तीन लड़की हैं। हम सबने काफी सारी बातें कीं और फिर खाना साथ में ही खाया। उनकी बीच वाली लड़की मुझ पर कुछ ज्यादा ही ध्यान दे रही थी, वो बार-बार मुझे देखकर मुस्करा रही थी। उसने अपना पैर मेरे पैर पर रखा हुआ था। मैं उसके पैर को हटाता तो वो फिर से अपना पैर मेरे पैर चढ़ा लेती थी। जैसे-तैसे करके मैंने खाना खाया और फिर वहीं पास में पड़े बेड पर लेटकर सो गया। दोपहर में मेरी आंख खुली तो मुझे अपने सीने पर कुछ वजन सा महसूस हुआ। मैंने पाया कि मंझली बहन मेरे सीने पर सिर रखकर सो रही है। मैं एकदम से सहम गया और आसपास देखा तो सब लोग सो रहे थे। मैंने धीरे से उसके सिर को हटाया और फिर से सोने लगा। कुछ देर के बाद उसका हाथ मेरे सीने पर आ गया। मैंने हाथ को हटा दिया। मैं दोबारा सोने की कोशिश करने लगा तो उसका हाथ फिर से मेरे सीने पर आ गया। अब मैं समझ गया कि ये सो नहीं रही है, बस सोने का नाटक कर रही है। मैंने उसके कान के ऊपर मुंह रखा कर हंसना शुरू किया तो वो भी अपनी हंसी नहीं रोक पाई और हंसने लगी। तभी उसने अपनी आंखें खोल दीं। उसके आंख खोलते ही मैंने धीरे से पूछा- ऐसे क्यों कर रही हो तुम? वो बोली- मुझे तुमसे प्यार हो गया है, पहली ही नज़र में! अब तक कहां थे तुम? मुझे नहीं पता था कि मेरी मौसी का लड़का इतना सुंदर है। अगर पता होता तो मैं पहले ही तुमसे मिलने तुम्हारे घर पर आ जाती। ये कहते हुए वो टीनेज़ गर्ल मुझसे लिपटने लगी। मैंने डरते हुए कहा- सब लोग सो रहे हैं यहां, अगर किसी ने देख लिया तो बहुत पिटाई होगी। वो बोली- ठीक है, जब घर में कोई नहीं होगा तो तुम बस मेरे होगे। मैंने कहा- ठीक है। फिर रात हुई और हम सबने खाना खाया और फिर मैं और मेरी मौसी की तीनों लड़कियां, हम चारों एक ही बेड पर सो गये। सोने के बाद उसी रात करीब 2 बजे मेरे पैर में कुछ काटने जैसा महसूस हुआ और मेरी आँख खुल गयी। जब मैं उठा तो देखा कि मौसी की मंझली लड़की मेरे पैर के पास बैठी मुस्कुरा रही थी। उसने ही मुझे पैर में काटकर उठाया था। वो मुझे अपने कम्बल में बुलाने लगी। मैंने उससे कहा कि सब लोग जाग जाएंगे। और मैंने वापस से अपना कम्बल ओढ़ लिया और लेट गया। कुछ देर बाद मुझे महसूस हुआ कि मेरे कम्बल में कोई है। मैंने आंख खोली तो मौसी की लड़की ही थी। वो मुझसे लिपट कर लेटी हुई थी और मुझे चूमना चाह रही थी। मैं डर गया था। वो बोली- तुम डरो मत, मैं सब संभाल लूंगी। मैं चुपचाप लेटा रहा। उसने मुझे चूमना शुरू कर दिया; मेरे चेहरे पर वो किस करने लगी। उसके बाद चूमते हुए वो मेरे होंठों पर आ गई। अब तक मेरा लंड भी पूरा खड़ा हो गया था। मैंने भी उसको चूमना शुरू कर दिया। फिर कम्बल के अंदर ही उसके कपड़े उतार दिए। मैंने उसके पूरे बदन को चूमा, उसके पेट के नीचे, उसकी चूत के पास, जहां से सौंधी सौंधी सी खुशबू आ रही थी। मैं चूत के पास सूंघने लगा और उसकी चूत को खूब चाटा। उसने मेरे लंड को भी चूमा और चूसा। अब मेरा लंड उसकी चूत में जाने के लिए पूरी तरह से तैयार था। तभी मौसी की दूसरी बेटी जाग गई और मैं कम्बल में चुपचाप नंगा ही लेट गया, जैसे साँप सूंघ गया हो हमें! अब हम उसके सोने का इंतजार करने लगे। वो पानी पीकर वापस से लेटकर सो गई। फिर मैंने उससे कहा कि हमारा काम यहां नहीं हो सकता है। वो बोली- तो फिर क्या करें? मैंने कहा- ऊपर दूसरी मंजिल पर चलते हैं। फिर हम चुपके से उठकर दूसरी मंजिल पर चले गए। मैं नीचे लेट गया और उसे मैंने लंड पर बिठाया और नीचे से धक्के मारने लगा। मेरा लंड उसकी चूत की दरार पर रगड़ रहा था, अंदर नहीं गया था. कुछ देर के बाद फिर मैंने उसको घोड़ी बनाकर उसकी चूत में लंड डालना चाहा। मुझे अहसास हुआ कि उसकी चूत एकदम से कोरी थी। मौसी की लड़की की कुंवारी चूत में लंड की रगड़ से ही जलन होने लगी थी। मैंने उसे समझाया कि लंड जब अंदर जाएगा तो दर्द होगा. वो बोली- मुझे मालूम है. मेरी कई सहेलियाँ सेक्स कर चुकी हैं, उन्होंने बताया है. तभी उसने मुझे कोल्ड क्रीम की डिबिया दी और बोली- इसे लगा लो अपने पर भी मेरे में भी! तब करो! मैंने ऐसे ही किया. जैसे ही मेरी लंड मेरी बहन की बुर के अंदर घुसने लगा, वो दर्द से एकदम काम्पने लगी. पर उसने अपने डांट भींच कर अपनी चीख रोक ली. मैं धीरे धीरे लंड आगे पीछे करने लगा, लंड थोड़ा थोड़ा सरक सरक कर पूरा अंदर चला गया. मुझे भी लंड पर रगड़ का अहसास हो रहा था. 3-4 मिनट में ही मैं झड़ने लगा तो मैंने लंड बाहर खींच लिया. और वीर्य नीचे गिरा दिया. उस रात वो पहली बार चुदी थी। आधे घंटे बाद मैंने उसको दोबारा चोदना चाहा। उसने लंड एक बार तो डलवा लिया पर उसके पेट में दर्द होने लगा और वो रोने लगी। फिर मैं नीचे आया और धीरे से फ्रिज खोलकर उसमें से बर्फ निकाल कर ले गया। मैंने बर्फ को उसकी चूत पर रगड़ना शुरू किया और उसकी चूत की जलन कम होने लगी। ऐसे ही करते करते वो चुदने के लिए फिर से गर्म होने लगी। मैंने उसकी चूत को चाटा तो ऐसा लगा जैसे ठंडी आइक्रीम हो। उसके बाद मैंने थोड़ी बर्फ अपने लंड पर भी रगड़ी। उससे मैंने कहा कि मेरा ठंडा लॉलीपोप भी चूस ले। उसने मेरे ठंडे लॉलीपोप को इतना चूसा कि मैं उसके मुंह में ही झड़ गया। मेरे लंड से निकले पानी को वो पी गई। कुछ देर तक हम दोनों ऐसे ही लेटे रहे। फिर मेरा लंड दोबारा से खड़ा होना शुरू हो गया। मेरा लंड एक बार फिर उसकी चूत में जाने के लिए तैयार था। मैंने उसको चोदना शुरू कर दिया। कुछ देर तो उसको तकलीफ होती रही लेकिन 2 मिनट बाद चुदाई में हमें पूरा मजा आने लगा। अब वो कभी मेरी पीठ को सहला रही थी तो कभी होंठों को चूमने लग जाती थी। मेरी मौसी की लड़की की चूत अब पूरी तरह से गर्म हो चुकी थी। मैं भी जोर लगाकर उसकी चूत में धक्के लगा रहा था। मैं अब उसकी चूचियों को भींचने लगा। चूचियां दबाते हुए मैं धीरे धीरे उसकी चूत में लंड को चला रहा था। वो कभी मेरी गर्दन को चूम रही थी तो कभी मेरी पीठ को सहला रही थी। मुझे लगा मैं जल्दी ही झड़ जाऊंगा क्योंकि चूत मारने में मजा ही इतना आ रहा था कि मैं वीर्य को रोक नहीं पा रहा था। इसलिए मैंने थोड़ा ब्रेक देने की सोची। मैं चुदाई रोक कर उसकी चूचियों को पीने लगा। वो मेरे सिर को सहलाने लगी और आराम से अपनी गोरी गोरी टाइट चूचियों को पिलाने लगी। नीचे से मेरा हाथ उसकी चूत को सहला रहा था। फिर मैंने उसकी चूत में उंगली दे दी और तेजी से अंदर बाहर करने लगा। वो आवाज को दबाते हुए आह्ह … आह्ह … करने लगी। कुछ देर तक उसकी चूत में उंगली करते हुए मेरी दोनों उंगलियां उसकी चूत के रस में नहा गईं। मैंने वो चूत रस से सनी उंगलियां उसके मुंह में दे दीं जिनको वो चूस-चाट गई। फिर मैंने उसको घोड़ी बनाकर झुका लिया। मैंने पीछे से उसकी चूत में लंड को पेल दिया। अब मैं दोनों हाथों से कमर को थाम कर चोदने लगा। मैंने तेजी से धक्के लगाने शुरू कर दिए। विराम देने के बाद भी मैं ज्यादा देर टिक नहीं पाया और जैसे ही वीर्य निकलने को हुआ, मैंने उसकी चूत से लंड को बाहर निकाल लिया। लंड बाहर आते ही वीर्य की पिचकारी छूट पड़ी और मैं वहीं पर झड़ गया। कुछ पल मैं वैसे ही हाँफता रहा और फिर शांत हो गया। उसके बाद नीचे जाकर हम दोनों आराम से लेट गए। उसने भी कुछ नहीं कहा और मैंने भी कुछ नहीं कहा। फिर लेटे हुए नींद आ गई। सुबह वो जल्दी उठ गई थी। मैं देर तक सोता रहा। फिर उठने के बाद मैंने देखा कि वो ठीक से चल नहीं पा रही थी। कोई और उसकी चाल को पहचान नहीं पा रहा था लेकिन मैं जान गया था कि रात की चुदाई के बाद उसकी चूत में दर्द हो रहा है। मैं पास की मेडिकल शॉप से उसके लिए दर्द की दवाई ले आया। उसने सबकी नजर बचाते हुए दवाई ले ली। कुछ घंटे के बाद वो बिल्कुल नॉर्मल हो गई। रात में उसकी चूत चोदने की बात सोचकर ही मेरा लंड पूरा दिन खड़ा रहा। वो भी चलते-फिरते हुए मेरे लंड के तनाव को भांपकर मुस्करा देती थी। उसकी चुलबुली हरकतें और कमसिन जवानी की अदाएं मुझे अब पागल कर रही थीं। बार बार उसकी टाइट कुंवारी चूत चोदने का मन कर रहा था। शायद वो दोबारा से चुदने के मूड में लग रही थी। तो उस रात के बाद से मैं और मेरी मौसी की लड़की आपस में पूरी तरह से खुल गए। अब तो दिन में कभी भी मौका पाकर वो मेरे लंड को सहला देती थी। मैं भी उसकी चूचियों को भींचकर उसकी चूत को सलवार के ऊपर से ही रगड़ दिया करता था। कई बार वो अपनी चूचियां मुझे चलते फिरते पिला देती थी और मैं लंड उसके मुंह में दे देता था। इस तरह से मौसी की मंझली लड़की के साथ मेरी मस्ती चलती रही। काफी दिन हमने मजे किए। तो दोस्तो, उसके बाद जितने दिन भी मैं वहां पर रहा, हम दोनों ने खूब मस्ती की। लेकिन इस बीच शायद उसकी बड़ी बहन यानि मेरी मौसी की सबसे बड़ी लड़की को हम पर शक हो गया था। उसने इस बारे में कुछ कहा नहीं लेकिन वो अब थोड़ी चौकन्नी सी रहने लगी थी। अब हमने चुदाई की एक नई तरकीब निकाली। हम लोग घर में चुदाई करने का रिस्क नहीं लेते थे; मार्केट जाने के बहाने हम दोनों साथ में घर से निकल जाया करते थे। फिर पहले मैं होटल में चला जाता और उसके दस मिनट के बाद मेरी बहन अंदर आ जाती थी। हम जल्दी से चुदाई का एक राउंड करके आ जाया करते थे। कई बार रात को जब बहुत मन करता था तो मैं धीरे से अपनी बहन की पजामी को नीचे करके उसकी चूत में लंड को घुसाकर लेट जाता था। वो धीरे-धीरे अपने चूत़ड़ों को हिलाते हुए लेटी हुई ही चुदती रहती थी। कई बार हम लोग रात में छत पर जाकर चुदाई करते थे। मैंने अपनी मंझली बहन की चूत एकदम से खोल दी थी। उसके बाद मेरे वहां रहने का टाइम खत्म हो गया और मैं वापस अपने घर आ गया। घर आने के बाद भी मुझे उस टीनेज़ गर्ल की चूत की याद सताया करती थी। कई बार मैंने उसके वहां जाकर चोदने की कोशिश की लेकिन फिर मौका नहीं लग पाया। उसके बाद अब तक मुझे उसकी चूत मारने का मौका नहीं मिला है। मैं इंतजार में हूं कि कब ऐसा टाइम आएगा कि हमें एक दूसरे की प्यास बुझाने का मौका मिलेगा। मैं फिर से जमकर उसकी चुदाई करूंगा। तो दोस्तो, आपको मेरी टीनेज़ गर्ल सेक्स कहानी कैसी लगी मुझे बताना जरूर। मुझे आप सबकी प्रतिक्रियाओं का इंतजार रहेगा। मेरा ईमेल आईडी है [email protected]
  10. দিদি কে চোদার নতুন গল্প আমি আমার স্কুলের পড়াশোনা শেষ করে কলেজ যেতে লাগলাম।কলেজে কিছু মেয়েবন্ধু হয়ে গেল।দু একটা মেয়েবন্ধুর সঙ্গে আমি এক দু বার চোদাচুদির আনন্দ নিতে লাগলাম।আমি যখনি কোন মেয়ে বন্ধুকে চুদতাম তখন আমি ভাবতাম যে আমার বাড়াটা আমার দিদির রসভর্তি গুদে ঢোকানো আছে। আমি বারবার চেষ্টা করতাম যে আমার মনটা দিদির ওপর থেকে সরে যাক কিন্তু তা হচ্ছিল না। আমার মন ঘুরে ফিরে বারবার দিদির দিকে চলে যেত।আমি দিনে ২৪ ঘণ্টা দিদির বিষয়ে আর দিদিকে চুদবার ব্যাপারে ভাবতে থাকতাম। আমি যতক্ষণ বাড়িতে থাকতাম আমি দিদির দিকে তাকিয়ে থাকতাম। কিন্তু আমার মনের ব্যাপারটা দিদি কিছু জানত না। যখন দিদি নিজের জামাকাপড় ছাড়ত বা মার সঙ্গে কিচেনে কিছু কাজ করত আমি চুপচাপ দিদিকে দেখতাম আর কখনো কখনো আমি দিদির বুকের সুন্দর গোল গোল আর খাড়া খাড়া মাইগুলো দেখতে পেতাম অবিশ্যি ব্লাউজের উপর থেকে। দিদির সঙ্গে ছোট ফ্ল্যাটে থাকাতে আমার কখনো কখনো খুব লাভ হত। কখনো কখনো আমার হাত দিদির গায়ে লেগে যেত। আমি সব সময় দিদির গোল গোল আর খাড়া খাড়া মাই আর পাছা ছোঁবার জন্য পাগল হয়ে থাকতাম।আমার খালি সময়ে আমি ব্যালকনিতে দাঁড়িয়ে রাস্তার লোকদের দেখতাম আর যখন আমার দিদি আমার পাশে দাঁড়াত আমি তার মাই ধীরে ধীরে ছোঁবার জন্য চেষ্টা করতাম।আমাদের বাড়ির ব্যালকনিটা বেশ সরু ছিল আর এমন ছিল যে তার পুরো লম্বাইটা আমাদের গলির দিকে ছিল আর তার সরু কোনাতে দাঁড়ালে রাস্তা দেখা যেত। bangla choti didi ke choda ব্যালকনিটা এত সরু ছিল যে দুজন লোক পাশাপাশি গা ঘেঁষে দাঁড়িয়ে রাস্তা দেখতে পেত।আমি যখন ব্যালকনিতে দাঁড়িয়ে রাস্তা দেখতাম তখন আমার হাতদুটো বুকের উপর বেঁধে রেখে ব্যালকনির রেলিঙে ভর দিয়ে রাস্তা দেখতাম। কখনো কখনো দিদি আমার পাশে এসে দাঁড়াত।আমি একটু সরে গিয়ে দিদিকে দাঁড়াতে দিতাম। আমি এমন আস্তে করে ঘুরে দাঁড়াতাম যে দিদিকে আমার সঙ্গে গায়ে গা লাগিয়ে দাঁড়াতে হত।দিদির বড় বড় মাইদুটো আমার বুকে এসে লাগত।আমার হাতের আঙুলগুলো যেগুলো রেলিঙের উপরে থাকত দিদির মাইতে ছুঁত। আমি আমার আঙুলগুলো আস্তে আস্তে দিদির মাইয়ের উপরে বোলাতাম আর দিদি এই ব্যাপারটা জানত না। আমি আঙুল দিয়ে ছুঁয়ে ছুঁয়ে দেখতাম যে দিদির মাইদুটো কত নরম আর মোলায়েম কিন্তু তবুও দিদির মাইদুটো সব সময় খাড়া হয়ে থাকত।কখনো কখনো আমি আমার হাত দিয়ে দিদির পাছাদুটো ছুঁতাম। যখন দিদি আমার পাশে এসে দাঁড়াত আমি এরকম করে দিদির সেক্সি শরীরটা আস্তে আস্তে ছুঁতাম।আমি জানতাম যে আমার দিদি আমার ব্যাপার কিছু বোঝে না।আমি জানতাম যে দিদি এটা বুঝত না যে তার ছোট ভাই তার শরীরের আনাচে কানাচে ইচ্ছে করে হাত লাগায় আর ভাই তাকে একেবারে উলঙ্গ দেখতে চায়‚ তাকে ন্যাংটো করে চুদতে চায়।কিন্তু আমি ভুল জানতাম। bangla choti didi ke choda একদিন দিদি আমাকে ধরে নিল।সেই দিন কিচেনে গিয়ে কাপড় চেঞ্জ করছিল।হল আর কিচেনের মাঝখানের পর্দাটা একটু সরে গিয়েছিল।দিদি আমার দিকে পেছন ফিরে নিজের কুর্তাটা খুলে নিয়েছিল আর আমার চোখের সামনে দিদির ব্রাতে ঢাকা মাইগুলো ছিল।রোজকার মতন আমি টিভি দেখছিলাম আর চোখ ঘুরিয়ে দিদিকে দেখছিলাম।হঠাৎ দিদি সামনের দিকে দেওয়ালে লাগানো আয়নাতে দেখতে পেল যে আমি তার দিকে হাঁ করে দেখছি।দিদি দেখল যে আমি তার ব্রা–ঢাকা মাইগুলোর দিকে তাকিয়ে আছি।ফের আয়নার মধ্যে আমার আর দিদির চোখ মিলে গেল।আমি লজ্জা পেয়ে আমার চোখটা ঘুরিয়ে আবার টিভি দেখতে লাগলাম।আমার বুকটা ধড়ফড় করছিল।আমি বুঝতে পেরে গিয়েছিলাম যে দিদি জানতে পেরে গেছে যে আমি তার মাই দেখছিলাম।আমি বুঝতে পারছিলাম না যে এবার দিদি কী করবে? দিদি কি আমার কথা মা আর বাবাকে বলে দেবে?নাকি দিদি আমার ওপর রাগ করবে? আমার মাথাতে এই সব প্রশ্ন ঘুরতে লাগল।আমি এবার থেকে দিদির দিকে তাকাবার সাহস করতে পারছিলাম না।সেইদিন আর তারপর ২,৩ দিন আমি দিদির কাছ থেকে দূরে থাকলাম।দিদির দিকে তাকালাম না।এই দু তিন দিনে কিছু হল না।আমি খুশি হয়ে গেলাম আর এবার থেকে চুপিচুপি দিদির দিকে তাকাতে লাগলাম।দিদি আমাকে ২,৩ বার হাতেনাতে ধরে নিল যে আমি তার দিকে চুপিচুপি দেখছি কিন্তু কিছু বলল না।আমি বুঝতে পারলাম যে দিদি বুঝে গেছে যে আমি কী চাই আর সে আমাকে কোন কিছু বলবে না।দিদি আমার সঙ্গে বা অন্য কারুর সঙ্গে এই বিষয়ে কোন কথা বলল না।এটা আমার কাছে খুব আশ্চর্যের ব্যাপার ছিল। bangla choti didi ke choda যাক যত দিন দিদি কিছু না বলে আমি দিদিকে চুপিচুপি দেখতে থাকলাম।এক দিন আমি আর দিদি আগের মত ব্যালকনিতে দাঁড়িয়ে রাস্তার লোকদের দেখছিলাম।দিদি আমার হাতের সঙ্গে সেঁটে দাঁড়িয়েছিল আর আমার হাতের আঙুলগুলো দিদির মাইতে আস্তে আস্তে ঘুরছিল।আমি ভাবছিলাম যে হয়ত দিদি এটা জানে না যে আমার হাতের আঙুলগুলো দিদির মাইতে আস্তে আস্তে ঘোরাফেরা করছে। আমি এটা এই জন্য বুঝছিলাম যে আমার আঙুলগুলো দিদির মাইতে চলা সত্ত্বেও দিদি আমার সঙ্গে সেঁটে দাঁড়িয়েছিল। কিন্তু আমি এটা বুঝে গিয়েছিলাম যে যখন দিদি আমাকে আগে কোনদিন টোকেনি আমি আরাম করে দিদির মাইগুলো ছুঁতে পারি আর দিদি আমাকে কিছু বলবে না।আমরা ব্যালকনিতে গায়ে গা লাগিয়ে দাঁড়িয়ে ছিলাম আর কথা বলছিলাম। আমরা আমাদের কলেজের স্পোর্টস নিয়ে আলোচনা করছিলাম।আমাদের ব্যালকনির সামনেকথা বলতে বলতে দিদি হাত দিয়ে আমার আঙুলগুলোকে ধরে নিজের মাই থেকে আলদা করে দিল।দিদি নিজের মাইয়ের উপর আমার আঙুলের চলাফেরা বুঝতে পেরে গিয়েছিল।দিদি খানিক ক্ষণের জন্য কথা বলা বন্ধ করে দিল আর তার শরীরটা বেশ শক্ত হয়ে গেল।কিন্তু দিদি নিজের জায়গা থেকে নড়ল না আর আমার হাতের সঙ্গে সেঁটে দাঁড়িয়ে রইল।দিদি আমাকে কিছু বলল না আর আমার সাহস বেড়ে গেল।তারপর আমি আমার হাতের পুরো পাঞ্জাটা দিদির গোল গোল মোলায়েম আর খাড়া খাড়া মাইয়ের উপর রেখে দিলাম।আমি ভীষণ ভয় পাচ্ছিলাম।কি জানি দিদি আমাকে কী বলবে?আমার পুরো শরীরটা ভয়ে আর উত্তেজনায় কাঁপছিল।কিন্তু দিদি আমাকে কিছু বলল না।দিদি খালি একবার আমাকে দেখল আর আবার রাস্তার দিকে দেখতে লাগল।আমি ভয়ে দিদির দিকে তাকাতে পারছিলাম না আর আমিও রাস্তার দিকে তাকিয়ে ছিলাম আর আমার হাতের পাঞ্জা দিয়ে দিদির মাইটাতে ধীরে ধীরে হাত বোলাচ্ছিলাম।আমি আগে হাতের পাঞ্জা দিয়ে দিদির একটা নরম মোলায়েম মাইতে হাত বোলাচ্ছিলাম। bangla choti didi ke choda দিদি কে চোদার গল্প Didi Ke Chodar Bangla Golpo তার পর ধীরে ধীরে আমি একটা মোলায়েম আর খাড়া মাইটাকে হাতের মুঠোতে নিয়ে জোরে টিপতে লাগলাম।দিদির মাইগুলো বেশ বড় বড় ছিল আর আমার একটা হাতের পাঞ্জাতে আঁটছিল না।আমি আগে দিদির মাইটা নীচ থেকে ধরছিলাম আর তার পর হাতটা আস্তে আস্তে উপরে নিয়ে যাচ্ছিলাম।কিছুক্ষণ পর দিদির কুর্তা আর ব্রার উপর থেকে মাই টিপতে টিপতে বুঝতে পারলাম যে দিদির মাইয়ের নিপলটা শক্ত হয়ে দাঁড়িয়ে গেছে‚ তার মানে দিদি আমাকে দিয়ে মাই টেপাতে টেপাতে গরম হয়ে গেছে।দিদির কুর্তা আর ব্রার কাপড়গুলো খুব মোলায়েম ছিল আর তাই আমি দেখতে পেলাম যে দিদির মাইয়ের নিপলদুটো শক্ত হয়ে একটা ছোট রবারের মতন দাঁড়িয়ে আছে।ওঃ ভগবান! আমার মনে হতে লাগল যে আমি স্বর্গে আছি।দিদির মাই টিপতে টিপতে আমার স্বর্গের সুখ হচ্ছিল।দিদির মাইগুলোকে ভাল করে ছোঁবার আমার আজ প্রথম অবসর ছিল আর আমি বুঝতেই পারলাম যে আমি কতক্ষণ ধরে দিদির মাই টিপছি।আর দিদিও আমাকে একবারের জন্য মানা করে নি।দিদি চুপচাপ আমার পাশে দাঁড়িয়ে দাঁড়িয়ে নিজের মাই আমাকে দিয়ে টেপাচ্ছিল।দিদির মাই টিপতে টিপতে আমার ল্যাওড়াটা খাড়া হতে লাগল।আমি খুব আরাম পাচ্ছিলাম আর এই ভেবে আরো খুশি হচ্ছিলাম যে আমার থেকে ৫ বছরের বড় দিদি চুপচাপ আমার পাশে দাঁড়িয়ে নিজের ছোট ভাইকে দিয়ে নিজের মাই টেপাচ্ছিল।আমি জানি না যে আমি আরো কতক্ষণ দিদির মাই টিপতাম তবে খানিক ক্ষণ পরে মার গলার আওয়াজ পেলাম।মার আওয়াজ পেতেই দিদি আমার হাতটা আস্তে করে মাই থেকে হটিয়ে দিয়ে মার কাছে চলে গেল।সে রাতে আমি একদম ঘুমোতে পারিনি।সারা রাত খালি দিদির মোলায়েম মোলায়েম খাড়া খাড়া মাইয়ের কথা ভাবছিলাম।পরের দিন আমি রোজকারের মতন ব্যালকনিতে দাঁড়িয়ে রাস্তার লোক দেখছিলাম।কিছুক্ষণ পরে দিদি ব্যালকনিতে এসে আমার থেকে ২–৩ হাত দূরে দাঁড়িয়ে থাকল।আমি দু তিন মিনিট অব্দি চুপচাপ থাকলাম আর দিদির দিকে দেখতে থাকলাম।দিদি আমার দিকে দেখল।আমি হালকা ভাবে মুচকি হাসলাম।কিন্তু দিদি পালটে মুচকি হাসল না আর রাস্তার দিকে তাকিয়ে দাঁড়িয়ে রইল।আমি দিদিকে আস্তে করে বললাম‚ দিদি আরো কাছে এসো না।কেন? দিদি আমাকে জিজ্ঞেস করল।‘আমি ছুঁতে চাই। দিদি কে চোদার চটি আমি পরিষ্কার ভাবে দিদিকে কিছু বলতে পারছিলাম না।‘কী ছুঁতে চাস? পরিষ্কার করে বল’‚ দিদি আমাকে বলল।তখন আমি দিদিকে আস্তে করে বললাম‚ ‘আমি তোমার দুদু দুটো ছুঁতে চাই।’ দিদি আমাকে আবার বলল‚ ‘কী ছুঁতে চাস? পরিষ্কার করে বল।’তখন আমি দিদির দিকে তাকিয়ে মুচকি হেসে আস্তে করে বললাম‚ ‘আমি তোমার বুকের উপর গোল গোল খাড়া খাড়া মোলায়েম মাইদুটো ছুঁতে চাইআর সেগুলো চটকাতে চাই।’‘কিন্তু এখুনি মা আসতে পারে।’, দিদি তখন মুচকি হেসে বলল।আমি তখন আবার মুচকি হেসে দিদিকে বললাম‚ ‘মা এলে আমরা আগেথেকে জানতে পারব।’আমার কথা শুনে দিদি কিছু বলল না আর নিজের জায়গাতে দাঁড়িয়ে থাকল।তখন আমি দিদিকে আস্তে করে বললাম‚ ‘প্লিজ‚ দিদি আরো কাছে এসো।তখন দিদি আমার কাছে চলে এল। দিদি আমার খুব কাছে দাঁড়িয়ে ছিল‚ কিন্তু তার মাই কালকের মতন আমার হাতের কাছে ছিল না।আমি বুঝতে পারলাম যে দিদি আমার গা ঘেঁষে দাঁড়াতে লজ্জা পাচ্ছে।এখন অব্দি দিদি আমার গা ঘেঁষে দাঁড়াত অজান্তে।কিন্তু আজ জেনে বুঝে আমার গা ঘেঁষে দাঁড়াতে দিদি লজ্জা পাচ্ছে‚ কেননা আজ দিদি জানে যে গা ঘেঁষে দাঁড়ালে আমি কী করব।যেই দিদি আমার কাছে এসে দাঁড়াল আমি তাড়াতাড়ি দিদিকে হাতে করে ধরে নিজের কাছে আরো টেনে নিলাম। দিদিকে চোদার গল্প এইবার দিদির মাইগুলো কালকের মতন আমার হাতে ছুঁচ্ছিল।আমি প্রায় পাঁচ মিনিট অব্দি চুপ করে থাকলাম আর তারপর আমার হাতটা দিদির মাইয়ের উপর নিয়ে গেলাম।দিদির মাই ছুঁতে আমি কালকের মতন স্বর্গের সুখের অনুভূতি পেলাম।আমি প্রথমে দিদির মাইদুটোয় আস্তে আস্তে হাত বোলালাম আর তারপর জোরে জোরে আমি দিদির মাইদুটো টিপতে লাগলাম।কালকের মতন দিদি আজকেও পাতলা কাপড়ের কুর্তা আর তার তলায় ব্রা পরেছিল।পাতলা কাপড়ের উপর থেকে দিদির মাইয়ের বোঁটাদুটোর খাড়া হওয়া আমি বেশ ভাল করে বুঝতে পারছিলাম।আমি এইবারে আমার আঙুল দিয়ে দিদির মাইয়ের বোঁটাগুলো টিপতে লাগলাম।আমি যতবার দিদির মাইয়ের বোঁটাগুলো টিপছিলাম ততবার দিদি একটু নড়েচড়ে উঠছিল আর দিদির মুখটা লজ্জায় লাল হয়ে যাচ্ছিল।খানিক পর দিদি আমাকেফিসফিস করে বলল‚ ওঃহহহ্! আঃহহহ্! আস্তে আস্তে টেপ দিদির কথা শুনে আমি দিদির মাইদুটো আস্তে আস্তে টিপতে লাগলাম।আমি আর দিদি মাই টেপাটেপি করতে করতে আলতু ফালতু কথা বলছিলাম যাতে যদি কেউ দেখে তো বুঝবে যে আমরা কোন বিষয়ে আলোচনা করছি।আসলে আমি তখন দিদির মাইদুটো কখনো আস্তে আস্তে আর কখনো কখনো জোরে জোরে টিপছিলাম আর চটকাচ্ছিলাম।খানিক পর মা ভেতর থেকে দিদিকে ডেকে নিল আর দিদি তাড়াতাড়ি ভেতরে চলে গেল।আমার আর দিদির মধ্যে এমনি ২,৩ বার মাই টেপাটেপি চলল। দিদিকে চোদার বাংলা চটি গল্প আমি রোজ সন্ধ্যে বেলা দিদির মাই টিপতাম আর দিদি আমার পাশে দাঁড়িয়ে আমার হাত দিয়ে নিজের মাইদুটো টেপাত।কিন্তু একটা প্রব্লেম ছিল‚ এমনি করে মাই টেপাটেপিতে আমি দিদির খালি একটা মাই টিপতে পারতাম।মানে যখন দিদি আমার বাঁয়ে দাঁড়াত তো আমি দিদির ডান দিকের মাইটা টিপতাম আর যখন দিদি আমার ডান দিকে দাঁড়াত তো আমি দিদির বাঁ দিকের মাইটা টিপতাম।আসলে আমি কিন্তু দিদির দুটো মাই আমার দুটো হাতের মুঠোতে নিয়ে টিপতে আর চটকাতে চাইতাম।কিন্তু ব্যালকনিতে দাঁড়িয়ে এটা সম্ভব ছিল না।আমি এটা নিয়ে দু তিন দিন চিন্তা করলাম।একদিন সন্ধ্যেবেলা আমি হলঘরে বসে টিভি দেখছিলাম।মা আর দিদি কিচেনে রাতের খাবার রান্না করছিল।খানিক পরে দিদি নিজের কাজ শেষ করে হলে এসে বসল।আমি হলে বিছানার উপর দেওয়ালে হেলান দিয়ে পা ছড়িয়ে বসে ছিলাম।দিদি রান্নাঘর থেকে এসে আমার কাছে বিছানাতে বসে পড়ল।দিদি খানিকক্ষণ টিভি দেখল আর তারপর পেপার নিয়ে নিজের মুখের ওপর পেপারটা পড়তে লাগল।কিছুক্ষণ পেপারের সামনের পেজটা পড়ার পর দিদি পেপারের পাতা পালটে ভেতরের পাতার নিউজ়গুলো পড়তে লাগল।দিদি বিছানাতে পা মুড়ে বসে ছিল আর আমার পা দুটো দিদির গায়ে ছুঁচ্ছিল।আমি আমার পা দুটো আরো একটু এগিয়ে দিলাম আর তাতে আমার পা এইবার দিদির উরুতে ছুঁয়ে গেল।মা কিচেনে রান্না করছিল আর আমি আমার সামনে বসা দিদিকে দেখছিলাম।আজকে দিদি একটা কালো রঙের টি–শার্ট পরেছিল আর টি–শার্টের কাপড়টা খুব পাতলা ছিল। didike chodar choti টিশার্টের উপর থেকে আমি দিদির ব্রাটা দেখতে পাচ্ছিলাম।আমি দিদির সেক্সি পিঠ আর কালো রঙের টিশার্ট আর তার ভেতরে ব্রাটা দেখতে দেখতে আমার মাথা ঘুরে গেল আর আমার মাথায় একটা দুষ্ট বুদ্ধি খেলে গেল।আমি আস্তে করে আমার একটা হাত দিদির পিঠে রাখলাম আর টি–শার্টের উপর থেকে দিদির পিঠে হাত বোলাতে লাগলাম।যেই আমার হাত দিদির পিঠে লাগল অমনি দিদির শরীরটা একটু কেঁপে উঠল।দিদি তখন ফিসফিস করে আমাকে জিজ্ঞেস করল‚ পার্থ তুই এটা কী করছিস?কিছু না খালি তোমার পিঠে আমি আমার হাতটা ঘষছি’‚ আমি দিদিকে বললাম। ‘তুই কি পাগল হয়ে গেছিস? মা এখুনি আমাদের দুজনকে রান্নাঘর থেকে দেখে ফেলবে।দিদি আবার আমাকে আস্তে করে বলল।মা কেমন করে দেখবে? আমি দিদির পিঠে হাত বোলাতে বোলাতে আস্তে করে বললাম।তুই কী বলতে চাস?’‚ দিদি আমাকে জিজ্ঞেস করল।আমি বলতে চাই যে তোমার সামনে পেপারটা খোলা আছে আর যদি মা রান্নাঘর থেকে দেখে তো খালি পেপারটা দেখবে আমি জবাব দিলাম। ‘তুই ভীষণ স্মার্ট আর শয়তান হয়েছিস’‚ দিদি আমার দিকে তাকিয়ে মুচকি হেসে বলল।ফের দিদি চুপ করে নিজের সামনে পেপারটা ভাল করে ছড়িয়ে পেপার পড়তে লাগল।আমিও চুপচাপ নিজের হাতটা দিদির মসৃণ পিঠেবোলাতে লাগলাম আর কখনো কখনো আমার আঙুল দিয়ে টি–শার্টের উপর থেকে দিদির ব্রাটা ছুঁতে লাগলাম।কিছুক্ষণ পরে আমি আমার একটা হাত দিদির ডান দিকের বগলের কাছে নিয়ে গেলাম আর বগলের চার ধারে হাত বোলাতে লাগলাম। new choti didi ke choda আমি বগলের কাছে দু তিন বার হাত ঘুরিয়ে আমার হাতটা আরো একটুখানি বাড়িয়ে দিদির ডানদিকের মাইয়ের উপরে রাখলাম।যেই আমার হাতটা দিদির মাইতে গেল দিদি একবার একটু কেঁপে উঠল।আমি তারপর আরাম করে দিদির ডানদিকের মাইটা হাতের মুঠোতে ভরে টিপতে লাগলাম।খানিকক্ষণ ডানদিকের মাইটা টেপার পর আমি আমার অন্য হাতটা বাড়িয়ে দিদির অন্য দিকের মাইটা ধরে টিপতে লাগলাম।এমনি করে আমি আমার দু হাত দিয়ে দিদির দুটো মাই একসঙ্গে টিপতে লাগলাম।দিদি আমাকে কিছু বলল না আর নিজের সামনে পেপারটা তুলে পড়তে থাকল।আমার সাহস আরো খানিকটা বেড়ে গেল।আমি নিজের জায়গা থেকে আরো একটু এগিয়ে দিদির টিশার্টটা পিছন থেকে একটু একটু করে তুলতে লাগলাম।দিদির টিশার্টটা দিদির পাছার তলায় চেপে ছিল বলে বেশি উপরে উঠল না।আমি একটু জোর লাগালাম কিন্তু কোন লাভ হল না।তখন আমি দিদিকে আস্তে করে বললাম‚ ‘প্লিজ দিদি‚ একটু দাও না।দিদি আমার কথা বুঝতে পেরে একটু আগের দিকে ঝুঁকে পাছাটা তুলে নিজের পাছার তলা থেকে টিশার্টটা বার করে দিল।আমি এবার থেকে দিদির পিঠে উপর নীচে হাত বোলাতে লাগলাম আর খানিক পরে আমার একটা হাত দিদির টিশার্টের ভেতরে ঢুকিয়ে দিলাম।ওফফফ! দিদির পিঠটা কত মোলায়েম আর পলিশড। didi ke chudlam আমি আস্তে আস্তে দিদির পিঠ থেকে দিদির টিশার্টটা তুলে দিয়ে দিদির পিঠটা ন্যাংটো করে দিলাম।এইবার দিদির মাইয়ের কিছু কিছু ভাগ দিদির ব্রায়ের আশপাশ থেকে দেখতে পেলাম।আমি এইবার আমার দুটো হাত দিদির খোলা পিঠে আর ব্রায়ের উপরে ঘোরাতে লাগলাম।যেই আমি দিদির ব্রাটা ছুঁলাম দিদি কাঁপতে লাগল।ফের আমার হাত দুটো ব্রায়ের পাশ থেকে আস্তে আস্তে এগিয়ে এগিয়ে দিদির বগল অব্দি নিয়ে গেলাম।তারপর আমি দিদির ব্রাঢাকা দুটো মাই আমার দু হাতে ধরে জোরে জোরে চটকাতে লাগলাম।দিদির মাইয়ের বোঁটাদুটো এই সময় খুব ভাল করে খাড়া খাড়া ছিল আর সেগুলোকে আঙুল দিয়ে টিপতে খুব ভাল লাগছিল।আমি তখন আরাম করে দিদির দুটো ব্রাঢাকা মাই হাতের মুঠোয় নিয়ে টিপতে লাগলাম আর কখনো কখনো বোঁটাদুটো আঙুল দিয়ে ধরে টানতে লাগলাম।মা এখনো রান্নাঘরে রান্না করছিল।আমরা মাকে পরিষ্কারভাবে রান্নাঘরে কাজ করতে দেখতে পাচ্ছিলাম।মা কখনো কখনো আমাদের দিকে দেখে নিচ্ছিল‚ তবে দেখতে পাচ্ছিল খালি দিদির পেপার পড়া।মা আমদের দেখে এটা বুঝতে পারছিল না যে হলঘরেআমি আর দিদি বিছানায় বসে মাই টেপার সুখ নিচ্ছিলাম আর দিদি নিজের মাই আমাকেদিয়ে টিপিয়ে টিপিয়ে মাইয়ের সুখ নিচ্ছিল।আমি দিদির মাই টিপতে টিপতে এই ভেবে খুশি হচ্ছিলাম যে বাড়িতে মা থাকার সময়েও কেমন করে দিদি আমাকে দিয়ে মাই টিপিয়ে টিপিয়ে মাইয়ের সুখ নিচ্ছে।আমি এই স্বর্ণ অবসর ছাড়তে চাইছিলাম না।আমি আবার আমার হাতদুটো দিদির পিঠে নিয়ে এলাম আর দিদির পিঠ আর ব্রায়ের হুকের উপর হাত বোলাতে লাগলাম আর ধীরে ধীরে দিদির ব্রায়ের হুকটা খুলতে লাগলাম।দিদির ব্রায়ের হুকটা খুব টাইট ছিল আর তাই হুকটা তাড়াতাড়ি খুলছিল না।যতক্ষণে দিদি বুঝতে পারত যে আমি তার ব্রায়ের হুকটা খুলছি‚ তার মধ্যে সেটা আমি খুলে দিলাম আর তার স্ট্র্যাপদুটো দিদির দু বগলের কাছে ঝুলতে লাগল।দিদি আমাকে মুখ ঘুরিয়ে কিছু বলতে যাচ্ছিল কিন্তু ততক্ষণে মা রান্নাঘর থেকে হলঘরে এসে গেল।আমি তাড়াতাড়ি দিদির থেকে নিজের হাতটা টেনে দিদির টিশার্টটা নীচে করে দিলাম আর খোলা ব্রাটা টি–শার্ট দিয়ে ঢেকে দিলাম।মা হলঘরে এসে বিছানার পাশ থেকে কিছু জিনিস নিচ্ছিল আর দিদির সঙ্গে কথা বলছিল।দিদিও পেপার থেকে মুখ না উঠিয়ে মার সঙ্গে কথা বলছিল। didir sathe chuda chudir kahini মা আমাদের কার্যকলাপ কিছু বুঝতে পারল না আর আবার রান্নাঘরে চলে গেল।তখন দিদি আমাকে ফিসফিস করে বলল‚ ‘বাবলু আমার ব্রায়ের হুকটা লাগিয়ে দে।’‘কী? আমি এই টাইট ব্রা’র হুকটা লাগাতে পারব না।’ আমি দিদিকে বললাম।কেন তুই হুকটা খুলতে পারিস আর লাগাতে পারিস না? দিদি একটু গরম সুরে আমাকে বলল।না সে কথা নয়‚ তোমার ব্রাটা ভীষণ টাইট’‚ আমি বললাম।দিদি পেপার পড়তে পড়তে বলল‚ আমি কিছু জানি না‚ তুই আমার ব্রায়ের হুকটা খুলেছিস‚ তাই তুইই সেটা লাগাবি।’ দিদি আবার আমাকে বকুনি দিতে দিতে বলল। ‘কিন্তু দিদি‚ তোমার ব্রায়ের হুকটা তুমিওতো লাগাতে পারো?’ আমি দিদিকে আস্তে করে জিজ্ঞেস করলাম।‘পাগল‚ আমি হুকটা লাগাতে পারি না। হুক লাগাতে হলে আমাকে পেপারটা নীচে করতে হবে আর মা দেখতে পাবে যে আমি তোর কাছে বসে এসময় ব্রায়ের হুক লাগাচ্ছি। তাতে মা বুঝে যাবে যে আমরা এতক্ষণ কী করছিলাম। বুঝলি? দিদি আমাকে বলল।আমি কিছু বুঝতে পারছিলাম না কী করব।আমি দিদির টি–শার্টের ভেতরে হাত নিয়ে গিয়ে ব্রা’র স্ট্র্যাপদুটো ধরে পেছনদিকে টানতে লাগলাম।যখন স্ট্র্যাপ একটু পেছনে এলো তো আমি হুকটা লাগাবার চেষ্টা করলাম। কিন্তু ব্রাটা এত টাইট ছিল যে আমি হুকটা টেনে লাগাতে পারছিলাম না।আমি বার বার চেষ্টা করছিলাম কিন্তু হুকটা লাগছিল না।মা রান্নাঘরে রাতের খাবার প্রায় প্রায় বানিয়ে নিয়েছিল আর মা কখনো হলঘরে আসতে পারে।দিদি কিছুক্ষণ অব্দি চুপচাপ বসে রইল তারপর আমাকে বলল‚ ‘ধ্যাত বোকা ছেলে এই পেপারটা ধর আমার সামনে।আমাকেই ব্রায়ের হুকটা লাগাতে হবে।’ আমি দিদির বগলের তলা থেকে হাতদুটো বাড়িয়ে পেপারটা দিদির মুখের সামনে ধরলাম আর দিদি হাতদূটো পেছনে করে ব্রায়ের স্ট্র্যাপদুটো টেনে হুকটা লাগাতে লাগল।আমি দিদির পেছনে বসে বসে হুক লাগানো দেখতে লাগলাম। দিদির ব্রাটা এত টাইট ছিল‚ দিদিরও হুক লাগাতে অসুবিধে হচ্ছিল। খানিক পরে দিদি ব্রায়ের হুকটা লাগিয়ে নিল।যেই দিদি ব্রায়ের হুকটা লাগিয়ে হাতটা সামনে আনল আর আমি আমার হাতটা পেছনে করলাম অমনি মা রান্নাঘর থেকে হল ঘরে এসে গেল।মা বিছানাতে দিদির পাশে বসে দিদির সঙ্গে কথা বলতে লাগল।আমি বিছানা থেকে উঠে বাথরুমের দিকে চলে গেলাম কেননা আমার ল্যাওড়াটা খুব গরম হয়ে গিয়েছিল আর এখুনি হাত না মারলে আমি খেতে বসতে পারতাম না।পরের দিন যখন আমি আর দিদি ব্যালকনিতে দাঁড়িয়ে ছিলাম তখন দিদি আমাকে জিজ্ঞেস করল বাবলু কাল রাতে আমরা আর একটু হলে ধরা পড়ে যেতাম।আমার ভীষণ লজ্জা করছিল।হ্যাঁ আমি জানি আর কাল রাতের পর থেকে আমি ভীষণ লজ্জিত।তোমার ব্রাটা এত টাইট ছিল যে আমি তোমার ব্রায়ের হুকটা লাগাতে পারছিলাম না আমি দিদিকে বললাম। bangla choti didi ke choda দিদি তখন আমাকে বলল হ্যাঁ আমারও ব্রায়ের হুকটা লাগাতে হাত পেছনে করতে খুব অসুবিধে হচ্ছিল আর ভীষণ লজ্জা করছিল।’কিন্তু দিদি তুমি তো রোজ তোমার ব্রাটা পরো‚ তখন কেমনকরে হুক লাগাও? আমি দিদিকে আস্তে করে জিজ্ঞেস করলাম।দিদি বলল‚ মানে আমরা রোজ রোজ’ ফের দিদি চুপ করে গেল‚ বোধহয় বুঝে গিয়েছিল যে আমি ঠাট্টা করছি তারপর আবার বলল‚ তুই এটা পরে বুঝতে পারবি।ফের আমি আবার দিদিকে জিজ্ঞেস করলাম‚ ‘দিদি তোমাকে একটা কথা জিজ্ঞেস করব?’দিদি ফট করে বলল‚ হ্যাঁ জিজ্ঞেস কর।’আমি দিদিকে জিজ্ঞেস করলাম‚ তুমি সামনে হুক দেওয়া ব্রা কেন পরো না?’দিদি তখন মুচকি হেসে আমাকে বলল এটা একান্ত প্রাইভেট ব্যাপার। এই প্রশ্নের আমি কোন জবাব দেব না।আমি তখন দিদিকে বললাম‚ দিদি তুমি জান যে আমি এখন আর ছোট নই‚ তাই তুমি আমাকে বলতে পারো।’তখন দিদি আমতা আমতা করে বলল কেননা কেননা কোন বিশেষ ব্যাপার নয়! হ্যাঁ একটা কারণ হচ্ছে যে সামনে হুক দেওয়া ব্রায়ের খুব দাম।আমি চট করে দিদির একটা হাত ধরে বললাম‚ এটা কোন ব্যাপার নয়। তুমি পয়সার জন্য ঘাবড়িও না। আমি তোমাকে যত পয়সা লাগে দেব।’ আমার কথা শুনে দিদি মুচকি হেসে বলল‚ আচ্ছা তোর কাছে বুঝি অনেক পয়সা আছে? চল আমাকে এখুনি ১০০টা টাকা দে।আমি তক্ষুনি আমার পার্সটা বার করে দিদির হাতে একটা ১০০ টাকার নোট দিয়ে বললাম নাও তোমার কথা মতন আমি তোমাকে ১০০টা টাকা দিলাম।দিদি ১০০ টাকার নোটটা ফিরিয়ে দিয়ে বলল‚ আরে না না‚ আমি টাকা চাই না।আমি তো তোর সাথে ঠাট্টা করছিলাম।আমি টাকাটা আবার দিদির হাতে দিয়ে বললাম‚আমি কিন্তু ঠাট্টা করছি না‚ আমি কিন্তু সিরিয়াস।দিদি তুমি না কোরো না আর এই টাকাটা আমার কাছ থেকে নিয়ে নাও। bangla choti didi ke choda দিদি খানিক ভেবে আমার হাত থেকে ১০০ টাকার নোটটা নিয়ে বলল‚ ‘ঠিক আছে বাবলু‚ আমি তোকে দুঃখ দিতে চাই না আর তাই আমি তোর টাকাটা নিয়ে নিচ্ছি।কিন্তু মনে রাখিস যে আমি এই প্রথম আর শেষ বার তোর থেকে টাকা নিচ্ছি।’আমি দিদিকে ‘থ্যাংক ইউ’ বললাম আর ব্যালকনি থেকে হলঘরে যেতে লাগলাম।ভেতরে যাবার সময় আমি দিদির কানে কানে বললাম‚ ‘দিদি খালি কালো রঙের ব্রা কিনবে। আামার কালো রঙের ব্রাটা বেশি পছন্দ হয়।’দিদি একটু হেসে বলল‚ ‘শয়তান!! তোর দেখছি যে দিদির আণ্ডারগার্মেন্টের প্রতি খুব একটা আকর্ষণ।’আমিও হেসে দিদিকে বললাম‚ ‘দিদি আরো একটা কথা মনে রেখ। কালো রঙের ব্রায়ের সঙ্গে কালো রঙের প্যান্টিটাও কিনে নিও।’দিদি আমার কথা শুনে খুব লজ্জা পেয়ে গেল আর প্রায় দৌড়ে ভেতরে মার কাছে চলে গেল।পরের দিন বিকেলে দিদি কোন বন্ধুর সঙ্গে ফোনে কথা বলছিল। আমি শুনতে পেলাম যে দিদি তাকে নিয়ে মার্কেট যেতে চায়। দিদির বন্ধু পরে কনফার্ম করবে বলে ফোন রেখে দিল।খানিক পরে আমি দিদিকে একলা পেয়ে বললাম‚ ‘দিদি‚ আমিও তোমার সঙ্গে মার্কেটে যেতে চাই।তুমি কি আমাকে তোমার মার্কেট নিয়ে যেতে পারো?’ দিদি খানিকক্ষণ ভাবার পর আমাকে বলল‚ কিন্তু পার্থ আমি তো আমার বান্ধবীর সঙ্গে কথা বলে নিয়েছি আর সে আমার সঙ্গে বিকেলে মার্কেটে যাবে বলে আমাদের বাড়ি আসছে। তার উপর আমি এখনো মাকে বলি নি যে আমি মার্কেটিঙে যাচ্ছি। bangla choti didi ke choda আমি দিদিকে বললাম‚ ‘ঠিক আছে‚ তুমি গিয়ে মাকে বল যে তুমি আমার সঙ্গে বাজারে যাচ্ছ। দেখবে মা রাজি হয়ে যাবে। তারপর আমরা বাইরে গিয়ে তোমার বান্ধবীকে ফোন করে দেব যে মার্কেটিং প্রোগ্রামটা ক্যানসেল হয়ে গেছে‚ তার আর আসার দরকার নেই। ঠিক আছে না?’ দিদি আস্তে করে হেসে বলল‚ ‘হ্যাঁ‚ এটা ঠিক আছে। আমি গিয়ে মার সঙ্গে কথা বলছি।’ আর দিদি মার সঙ্গে কথা বলতে চলে গেল। মা যেই শুনল যে দিদি আমার সঙ্গে মার্কেট যাচ্ছে‚ মা রাজি হয়ে গেল।
  11. কচি গুদ চোদার গল্প এসএসসি পরিক্ষার পর ফল প্রকাশের পূর্ব পর্যন্ত যে সময়টা পাওয়া যায়, আমার মতো সবার কাছেই সেটা খুব সুখের সময়। দির্ঘদিন পর পড়ালেখা থেকে এতো বড় বিরতি এর আগে আর নেই।ক্লাস টেন পর্যন্ত ফাইনাল পরিক্ষা শেষ হলেই ১০,১৫ দিন বিশ্রাম দিয়েই আমার বাবা পরের ক্লাসের বই এনে দিতেন, আর শুরু কর দিতেন পড়াশুনা যাতে আমি অন্য সবার থেকে এগিয়ে থাকতে পারি।কিন্তু সেবারই পেলাম নির্ঝঞ্ঝাট লম্বা ছুটি। সুতরাং এতো বড় ছুটিতে বাড়িতে বসে থাকে কোন গাধা? আমিও থাকলাম না। আমার বড়কাকা বিশাল টেক্সটাইল মিলের ইঞ্জিনিয়ার। অনেকদিন কাকার বাসায় যাওয়া হয়না। লোকেশনটাও ভাল। বাবাকে বলতেই উনি রাজি হয়ে গেলেন আর আমাকে গাড়িভাড়া বাবদ বেশ কিছু টাকাও দিলেন, যদিও আমার নিজেরও বেশ কিছু জমানো টাকা ছিল। কাকার বাসায় পৌঁছাতেই আমার বড়চাচি আর তার দুই ছেলেমেয়ে রবি আর রানি হৈ চৈ করে আমাকে বরন করে নিল। বড় ইঞ্জিনিয়ার হওয়ার কারনে কাকার বাসাটা অনেক বড়, সে তুলনায় লোকসংখ্যা খুবই কম। অনেকগুলি রুম আর লোক মাত্র ৪ জন, না ভুল বললাম, আরেকজন ছিল ঐ বাসায়। সে হলো আমার বড়চাচির কাজের মেয়ে সুমি লম্বায় ৪ ফুট মতো হবে। বেশ ভাল ও সুঠাম স্বাস্থ্য, কোঁকড়ানো চুল, গায়ের রংটা শ্যামলা। Kajer Meye Chodar Golpo কাজের মেয়ে চোদার গল্প তবে ঐ বয়সেই ওর টেনিস বলের মত সাইজের দুধগুলি সহজেই আমার নজর কাড়লো। কারণ ও ফ্রক পড়ে, চাচি ওর ফ্রকের সামনে দুধের উপর দিয়ে একটা অতিরিক্ত ঘের লাগিয়ে দিলেও ও যখন যে কোন কাজের জন্য হামা দেয় তখুনি দুধগুলি ফুটে ওঠে। একেবারে প্রথম থেকেই কেন জানিনা সুমি আমাকে দেখে খালি হাসে। আমি ওর দিকে তাকালেই ও হাসে আর একদৃষ্টিতে তাকিয়ে থাকে। দিনে দিনে মেয়েটা আমার কাছে কেমন যেন রহস্যময় হয়ে ওঠে। আমি কয়েকদিন ওকে খুব ভালভাবে খেয়াল করলাম, আর এটা করতে গিয়েই আমার মাথার পোকা নড়ে উঠলো। তখনই সিদ্ধান্ত নিলাম, যে করেই হোক এই আনকোড়া নতুন মালটাকে চুদতেই হবে। সুতরাং আমি আস্তে আস্তে ওর সাথে ভাব জমাতে শুরু করলাম। ও তাকালে আমিও তাকিয়ে থাকি ওর চোখে চোখে, ও হাসলে আমিও হাসি। সুমি ক্রমে ক্রমে আমার সাথে অন্তরঙ্গ হয়ে ওঠে আর আমার প্রতি ওর জড়তাও কেটে যায়। এর পর থেকেই ও আমার সাথে ঠাট্টা ইয়ার্কি করতে থাকে। সুযোগ পেলেই চিমটি দেয় অথবা কিছু একটা দিয়ে খোঁচা দেয় এসব। আমিও আস্তে আস্তে ওর ঠাট্টা ইয়ার্কির উত্তর দিতে শুরু করি। হয়তো চিমটি কাটি বা আঙুলের গাঁট দিয়ে ওর মাথায় গাট্টা মারি এসব। Kajer Meye Chodar Golpo কাজের মেয়ে চোদার গল্প এভাবে চলতে চলতে আমি মনে মনে সুযোগ খুঁজতে থাকি, ওর মনোভাবটা আমার জানা দরকার। কিন্তু সুমিকে নির্জনে একাকি পাওয়াই মুসকিল। স্কুলে না থাকলে হয় রবি বা রানি থাকে আশেপাশে, আর চাচি তো সারাদিনই বাসায় থাকে। তবুও একদিন সেই সুযোগটা পেয়ে গেলাম। রবি আর রানি স্কুলে, চাচি বাথরুমে গোসল করতে গেলে সুমি ঘর মোছার জন্য আমার রুমে এলো। আমি শুয়ে শুয়ে গল্পের বই পড়ছিলাম। সুমি আমার গায়ে পানি ছিটিয়ে দিল। আমি লাফ দিয়ে উঠে ওকে ধরতে গেলে ও দৌড়ে পালাতে গেল কিন্তু আমি ধরে ফেললাম। মনে মনে সংকল্প ছিলই, সুযোগটাও পেয়ে গেলাম, সুতরাং সিদ্ধান্ত নিলাম আজই ওর দুধ টিপবো। কিন্তু ভয় করতে লাগলো, যদি চিৎকার দেয়? কিন্তু ভয় করলে তো হবে না, আমাকে জানতেই হবে সুমির মতিগতি কি। আমি ধরতেই সুমি দুই কনুই দিয়ে দুধ আড়াল করে কুঁজো হয়ে দাঁড়ালো আর হিহি হিহি করে হাসতে লাগলো। আমি ধমক দিলাম, এতো হাসছিস কেন? চাচি শুনলে দেবেনে তোরে। সুমি আবারো হাসতে লাগলো, হাসতে হাসতেই বললো, খালাম্মা শুনবি কেমতে, খালাম্মা তো গুসল করতিছে।ওওওওওও সেজন্যেই তোমার এতো কিলকিলানি বাড়ছে না? দাঁড়াও তোমার কিলকিলানি আমি থামাইতেছি।এ কথা বলেই আমি ওকে জাপটে ধরলাম। তারপর ওকে কিছু বুঝতে না দিয়ে দুই হাতে দুই টেনিস বল চেপে ধরলাম। ওফ্, দারুন নরম আর কি সুন্দর। আমি কয়েকবার চাপ দিতেই সুমি আরো জোরে খিলখিল করে হাসতে লাগলো। আমি চাচির ভয়ে তাড়াতাড়ি ছেড়ে দিলাম। সুমি দুরে গিয়ে আমাকে বুড়ো আঙুলে কাঁচকলা দেখাতে দেখাতে বললো, আমার লাগে নাই, লাগে নাই।আমি বললাম তোমাকে পরে লাগাবোনে দাঁড়াও। .সুমি হাসতে হাসতে বলে, ভিতু ভিতু ভিতু। Kajer Meye Chodar Golpo কাজের মেয়ের সাথে চোদাচুদি সেদিনের পর থেকে আমি কেবল সুযোগ খুঁজতাম চাচি কখন বাথরুমে যায়, আর চাচি বাথরুমে গেলেই আমি সুমিকে চেপে ধরে ওর দুধ টিপতাম আর ও শুধু হাসতো। সুমির হাসির শব্দ যাতে বাথরুম থেকে শোনা না যায় সেজন্যে আমি সুমিকে টেনে বাইরের দিকের বারান্দায় নিয়ে যেতাম, ওদিকটা নির্জন। ৫ তলার বাসা থেকে অন্য কেউ শুনতে পাবেনা। এভাবে দুধ টিপতে টিপতে আমি মাঝে মধ্যে সুমির ভুদাতেও হাত লাগালাম। পায়জামার উপর দিয়েই ওর ভুদা চিপতে শুরু করলাম। সুমির ভাল ভাল জিনিস চুরি করে খাওয়ার অভ্যেস ছিল। পরে ও সেগুলি আর একা খেতো না। ভাজা মাছ, দুধের সর, মিস্টি এগুলি চুপি চুপি এনে আমাকে বলতো, হাঁ করেন।আমি মুখ হাঁ করলে আমার মুখে ঢুকিয়ে দিয়েই দৌড়ে পালাতো। ওর এই ছেলেমিপনা আমার দারুন লাগতো, আমিও এ ব্যাপারে চাচিকে কিছু বলিনি। সুমির দুধ আর ভুদা টেপা আমার প্রতিদিনের নেশা হয়ে উঠলো, পায়জামার উপর দিয়েই আমি ওর ভুদার ফুটোতে আঙুল ঢুকানোর চেষ্টা করি কিন্তু পারিনা। আমার আর সুমির সম্পর্ক এমন দাঁড়ালো যে, ওকে চুদা এখন শুধু সময় আর সুযোগের অপেক্ষা ছাড়া আর কিছু নেই। কিন্তু সেই সুযোগটাই পাচ্ছিলাম না। চাচি কোথাও বেড়াতেও যায়না। যদিও বিকালে টিকালে কোন বাসায় যায়, তখন সুমিকে সাথে নিয়ে যায়। আমি সুমির কাছে জেনেছি, এটা তার পুরনো অভ্যাস, চাচি একা কোথাও যায় না, কেউ না কেই সাথে থাকবেই, তাই তিনি সুমিকে সাথে নিয়ে যান। প্রথমে আমি ভেবেছিলাম, আমাকে আবার সন্দেহ করে না তো? চোরের মন পুলিশ পুলিশ। বাংলা চটি কাজের মেয়ে একদিন সুযোগ পায়ে হেঁটে এসে আমার হাতে ধরা দিল। হঠাৎ করেই সেদিন রাতে রানির প্রচন্ড জ্বর হলো। বাসায় যা ওষুধ ছিল তাই দেওয়া হলো কিন্তু জ্বর সহজে কমলো না। অনেক রাত পর্যন্ত জেগে জেগে রানির মাথায় পানি ঢালা হলো। একমাত্র রবি ছাড়া সবাই জেগে। মাঝরাতের দিকে জ্বর একটু কমলো। সবাই যার যার রুমে ঘুমাতে গেলাম। আমার সহজে ঘুম এলো না। মনে হয় শেষ রাতের দিকে ঘুমিয়ে পড়েছিলাম। তাই সকালে কখন রবি স্কুলে গেছে, কখন কাকা অফিসে গেছে আর কখন রানিকে নিয়ে চাচি হাসপাতালে গেছে বুঝতেই পারিনি। হঠাৎ একটা খিলখিল হাসির শব্দে আমার ঘুম ভেঙে গেলো। আমি প্রথমে কিছুই বুঝতে পারিনি, পরে খেয়াল করে দেখি সুমি খাটের পাশে দাঁড়িয়ে হাসছে। ওর দৃষ্টি আমার কোমড়ের নিচের দিকে, দেখি লুঙ্গি আমার বুকের উপর উঠে আছে আর নিচের দিকে পুরো উলঙ্গ। সুমি আমার উলঙ্গ ধোন দেখে ওভাবে হাসছে। আমার মনে পড়লো শোয়ার সময় আমি একটা কাঁথা গায়ে দিয়ে শুয়েছিলাম। ঘড়ির দিকে তাকিয়ে দেখি তখন সকাল প্রায় ১০টা। অর্থাৎ সুমি আমার উঠতে দেরি দেখে গরম লাগবে ভেবে গায়ের কাঁথা টান দিয়েছে আর কাঁথার সাথে লুঙ্গি উঠে গেছে উপরে।সম্বিৎ ফিরে পেয়ে আমি তাড়াতাড়ি আমার ধোনটা আগে ঢাকলাম তারপর ধমক দিয়ে বললাম, এই এতো জোরে হাসছো কেউ শুনে ফেলবে না? kajer meye ke chodar choti সুমি হাসতে হাসে বললো, কিডা শুনবি? কেউই তো বাসায় নাই। আমি অবাক হয়ে বললাম, মানে? গেছে কোথায় সবাই? সুমি আঙুল গুনে গুনে বলতে লাগলো, ভাইয়া স্কুলি গেছে, খালজান আপিসে আর খালাম্মা আপুরে নিয়া ডাকতরের কাছে গেছে।আমার কাছে ততক্ষনে সব পরিষ্কার হয়ে গেছে, আর বাসায় কেউ নেই শুনে আমার ভিতরের রক্তখেকো পশুটা জেগে উঠতে আরম্ভ করলো। ভাবলাম, এই-ই তো সুযোগ, এই সুযোগ কিছুতেই হাতছাড়া করা যাবে না। আমি লাফ দিয়ে খাট থেকে নামলাম তারপর সুমির হাত ধরে টেনে নিয়ে খাটে বসালাম। বললাম, আমাকে ন্যাংটো করলি কেন?সুমি নিরিহ ভঙ্গিতে বলল, বা-রে, আমি কি করলেম, আ কি জানতেম যে আপনে খ্যাতার তলে ন্যাংটা হয়া রইছেন। গরম লাগতিছে ভাব্যে আমি খ্যাতাখেন টা’নে নিছি আর দেহি হি হি হি হি হি হি হি হা হা হা হা হা হা হো হো হো হো হো হো হো হি হি হি হি।হইছে থামো, শোনো, তুমি আমারটা দেখেছো, এবারে আমি তোমারটা দেখবো, তাহলে শোধবোধ, নাহলে খবর আছে। .সুমি প্রথমে কিছুতেই ওর ভুদা দেখাতে রাজি হচ্ছিল না, শেষে আমি ওকে ভয় দেখালাম, বললাম, ঠিক আছে, যদি তুমি তোমারটা আমাকে না দেখাও তাহলে চাচি আসুক, তারপরে তুমি আমার সাথে যা যা করেছো আমি চাচিকে সব বলবো, তোমার চুরি করে খাওয়ার কথাও বলবো।তখন সুমি ওর ভুদা আমাকে দেখাতে রাজি হলো কিন্তু দুর থেকে, কাছে আসবে না ও। আমি তাতেই রাজি হলাম এবং খাটের সাথে হেলান দিয়ে মেঝেতে বসলাম, যাতে ওর ভুদাটা ভাল করে দেখতে পারি। সুমি ওর পায়জামার ফিতা টেনে খুললো এবং তারপর সেটা টেনে ওর হাঁটু পর্যন্ত নামিয়ে দিয়ে সোজা হয়ে দাঁড়ালো। bangla hot choti kajer meye chuda সুমি কচি ভুদার শুধু ফাটার কিছু অংশ আর তলপেটের নিচের অংশে পাতলা পাতলা সামান্য কিছু বাল গজিয়েছে সেটুকু দেখতে পেলাম। আর দুই পায়ের ফাঁক দিয়ে ক্লিটোরিসের মাথা সামান্য বের হয়ে আছে দেখতে পেলাম। ওটুকু দেখেই আমার শরীর উত্তেজনায় কাঁপতে লাগলো। ধোনটা শক্ত হয়ে ফুসেঁ উঠতে লাগলো, কিছুতেই কন্ট্রোল করতে পারছিলাম না। সুমি প্রায় ২ মিনিট ওর ভুদাটা বের করে রাখলো, তারপর নিচু হয়ে পায়জামা উঠাতে উঠাতে বললো,শান্তি হয়ছে? আমি এগিয়ে গিয়ে ওর হাত চেপে ধরে বললাম, না, ক্ষিধে আরো বেড়ে গেছে। .সুমি কিছু বলতে যাবে এমন সময় কলিং বেল বেজে উঠলো। আমি সুমিকে দরজা খুলতে বলে দৌড়ে গিয়ে বাথরুমে ঢুকলাম। কিঝুক্ষণ পর সুমি বাথরুমের দরজায় টোকা দিয়ে বলল, বাইরইয়া আসেন, ভয়ের কিস্যু নাই, নিচতলার খালাম্মা আমাদের খালাম্মারে খুঁজতে আইছিলো, চইল্যা গেছে। .আমি দরজা খুলে বের হলে সুমি আমার দিকে তাকিয়ে বললো, সত্যিই আপনে একটা ভিতুর ডিম এ্যাতো ভয় পান ক্যান? আমি চট করে গিয়ে সুমির একটা হাত চেপে ধরলাম, বললাম, আমি ভিতু, তাই না? সুমি আবারও বললো, ভিতুই তো, অতো ভয় করলি কি চলে, ব্যাডা মানুষ, বুকে সাহস রাখা লাগে। আমি ওর ইঙ্গিতটা ঠিকই বুঝলাম। বললাম, ঠিক আছে তোমাকে দেখাচ্ছি আমার সাহস আছে কিনা। বাংলা কাজের মেয়ে কে চোদার চটি গল্প এই বলে আমি ওর একটা দুধ চেপে ধরলাম আর টিপতে লাগলাম। মনে হয় একটু জোরেই হয়ে গেল, সুমি উহ করে উঠে বলল আস্তে ব্যাথা লাগেনা? আমি তখন ওকে পিছন থেকে জাপটে ধরে দুই হাতে দুই দুধ টিপতে লাগলাম। কি সুন্দর নরম তুলতুলে কিন্তু গলগলা নয়। কিছুক্ষণ টেপার পর আমি ওকে দুই হাতে উঁচু করে তুলে আমার বিছানায় নিয়ে ফেললাম। ওকে চিৎ করে শুইয়ে দিয়ে আমি ওর বুকের উপর শুয়ে পরে শক্ত করে বুকের সাথে চেপে ধরলাম। সুমির দুধগুলো আমার বুকের সাথে পিষ্ট হচ্ছিল আর সুমি বাধা তো দিলই না বরং খিলখিল করে হাসতে লাগলো। আমি ওর পায়জামার ফিতে খুলে টেনে পায়জামা খুলে ফেললাম। দুর থেকে দেখা সেই সুন্দর ভুদাটা এখন আমার নাগালের ভিতরে। ভুদাটা ওর গায়ের রঙের মতই শ্যামলা। ছাড়াছাড়া কিছু বাল কেবল এখানে সেখানে এলোমেলোভাবে কালো রং ধরছে, কতকগুলো বেশ লম্বা হয়েছে, বিশেষ করে ভুদার ঠোটেঁর কাছেরগুলি। বাকিগুলো এখনো ছাইরঙা আর ছোট, ভাল করে না দেখলে প্রায় দেখাই যায়না। আমি সুমির দুই পায়ের ফাঁকে মুখ ঢুকিয়ে দিয়ে ওর ভুদাটা চাটতে গেলাম। প্রথমে ও কিছুতেই ওর ভুদায় জিভ লাগাতে দিচ্ছিল না। পরে যখন আমি জোর করে চাটতে লাগলাম আর ওর ভুদার চেরার মধ্যে জিভ ঢুকিয়ে ওর ক্লিটোরিস চাটতে লাগলাম তখন ও শান্ত হলো আর দুই পা বেশি করে ফাঁক করে দিল। আমি ওর দুই পা দুদিকে ছড়িয়ে দিয়ে ভুদাটা অনেকখানি ফাঁক করে নিয়ে চাটতে লাগলাম। পরে আমি ওর ফ্রক গুটিয়ে বুকের উপর গলার কাছে তুলে দিয়ে অনাবৃত দুধদুটো দুই হাতে আয়েশ করে চটকাতে লাগলাম। আমার ধোন প্রচন্ড শক্ত হয়ে টিংটিং করে লাফাচ্ছিল আর মাথা দিয়ে গোল্লার রস বের হচ্ছিল। আমি উঠে সুমির দুই পায়ের ফাঁকে হাঁটু পেতে বসলাম। আমার ধোন তখন লোহার রডের মত শক্ত হয়ে আমার মুখের দিকে খাড়া হয়ে আছে। আমি প্রথমে মুখ থেকে খানিক লালা হাতের আঙুলে নিয়ে সুমির ভুদার ফুটোতে মেখে পিছলা করে নিলাম। কাজের মেয়ে কে চুদার নতুন চটি গল্প Bangla Choti Kajer Bua তারপর ধোনটা টেনে নিচের দিকে বাঁকিয়ে কেবল ওর ভুদার সাথে লগিয়েছি, অমনি ও দুই পা চাপিয়ে ভুদা দুই হাতে ঢেকে গুঁঙিয়ে উঠলো, বললো না ভাইয়া না ব্যাথা লাগবে আমি মরে যাবো।আমার মাথায় তখন খুন চড়ে গেল। এরকম অবস্থায় যদি কেউ বাধা দেয় তাহলে মাথায় রক্ত ওঠাটাই স্বাভাবিক। কিন্তু আমি অনেক কষ্ট করে নিজেকে ঠান্ডা রাখলাম। ওর চোখে তাকিয়ে মিষ্টি করে হেসে বললাম দুর পাগলি, ব্যাথা লাগবে কেন? ব্যাথা লাগলে কেউ এসব করে? দেখিসনি আল্লার দুনিয়ায় সবাই এসব করে, মানুষ, গরু, ছাগল, ঘোড়া সবাই করে, দেখিস নাই?সুমি ভয়ে ভয়ে আমার দিকে তাকিয়ে মাথা ঝাঁকিয়ে বলল হ দেখছি। .আমি হাসলাম, বললাম, তাহলে? কষ্ট পেলে বা ব্যাথা লাগলে কেউ এসব করে? বরং মজা পায়, আনন্দ লাগে, তাই সবাই এটা করে, আয় আমরাও মজা পাই দেখবি আমিও মজা পাবো তুইও পাবি।তবুও সুমি রাজি হয় না, কিন্তু পরিষ্কার করে কিছু বলেও না। আমি বিভিন্নভাবে বোঝানোর চেষ্টা করলাম যে ও ব্যাথা পাবে না কিন্তু ও কিছুতেই মানতে রাজি নয়, বলে, ব্যাথা লাগে, খুউব ব্যাথা লাগে, আমি জানি।. তখন আমি ওকে চেপে ধরলাম, যে ও কিভাবে জানে? প্রথমে কিছুতেই বলতে চায় না, শেষ পর্যন্ত আমার পিড়াপিড়িতে যেটা বললো সেটা হলো, আরো বছর দুই আগে, ওর এক দুলাভাই ওকে নানারকম লোভ দেখিয়ে চুদতে রাজি করায় এবং সেই প্রথমবার যখন দুলাভাইয়ের ধোন ওর সতিপর্দা ফাটায় স্বাভাবিকভাবেই ও প্রচন্ড ব্যাথা পেয়েছিল এবং রক্তক্ষরন হয়েছিল। সেই থেকে ভুদায় ধোন ঢুকাতে ওর প্রচন্ড ভয়। তখন আমি ওকে বোঝালাম যে,এখন ও বড় হয়েছে, তাই এখন আর ব্যাথা লাগবে না। তাছাড়া আমি সতিপর্দার ব্যাপারটাও বুঝিয়ে বললাম। শেষ পর্যন্ত ও ব্যাপারটা বুঝলো, আর সন্দেহভরা কন্ঠে আমার চোখে তাকিয়ে জিজ্ঞেস করলো, হাচা কইতাছেন? আমি কিরে কসম কেটে বললাম যে আমি সত্যি বলছি, তাছাড়া ওকে আরো বললাম, আমি ধোন ঢোকানোর সময় তুমি যদি ব্যাথা পাও, আমি সঙ্গে সঙ্গে আমরাটা বের করে নেবো। Kajer Meye Chodar Golpo শেষ পর্যন্ত ও নিমরাজি হলো এবং পুনরায় দুই পা ফাঁক করে ভুদাটা ধোন ঢোকানোর জন্য সেট করে দিল। আমি একটু সামনে ঝুঁকে আবারো মুখ থেকে থুতু নিয়ে ওর ভুদায় লাগালাম, তারপর আমার ধোনটা টেনে বাঁকিয়ে নিচের দিকে নামিয়ে ধোনের মাথায় টিপ দিতেই গলগল করে বেশ খানিকটা গোল্লার রস সুমির ভুদার ঠোঁটের উপর পড়লো। আমি ধোনের মাথা দিয়ে সেগুলি ঘষে ঘষে ওর ভুদার ফুটোতে লাগিয়ে নিলাম। ঠেলা দিয়ে দেখলাম বেশ পিছলা হয়েছে। আমি প্রথমে আমার একটা আঙুল সুমির ভুদার ফুটোতে ঢুকালাম এবং আঙুলটা নাড়িয়ে চাড়িয়ে ফুটোটা একটু শিথিল করে নিলাম। তারপর ধোনের মাথাটা ওর ফুটোর গর্তে সেট করে ধোনটা হাত দিয়ে ধরে রাখলাম যাতে পিছলে এদিকে সেদিক চলে না যায়। ঐ অবস্থায় একটু সামনে ঝুঁকে কোমড়ে চাপ দিলাম। প্রথমে একটু শক্ত লাগলো, তারপর পক্ করে মাথাটা ঢুকে গেল। সুমি উউউউউহহহহ করে উঠলো। আমি বিরতি দিয়ে জিজ্ঞেস করলাম, কি হলো, ব্যাথা পাচ্ছো? সুমি হেসে বললো, ইকটু।আমি ঢুকাবো কিনা জানতে চাইলে সুমি মাথা কাৎ করে সম্মতি জানালো। Kajer Meye Chodar Golpo আমি ঐ অবস্থাতেই সামনে ঝুঁকে ওর বুকের উপর শুয়ে পড়লাম আর ওর দুই পা পুরো আমার দুই পায়ের উপর দিয়ে পেটের সাথে চেপে ধরলাম। তারপর ওর দুই কাঁধ শক্ত করে ধরে কোমড়ে চাপ বাড়ালাম। পকপকপক করে আমার ধোন অনেকখানি ওর ভুদার মধ্যে ঢুকে গেলো। আমি ধোনটা একবারে পুরো না ঢুকিয়ে ওর অজান্তে একটু একটু করে ঢোকানোর সিদ্ধান্ত নিলাম। আমি আবারো সুমিকে ব্যাথা পাচ্ছে কিনা জানতে চাইলাম। সুমির মুখে ষ্পষ্ট ব্যাথা পাওয়ার চিহ্ন, চোখমুখ কোঁচকাচ্ছে, কিন্তু মুখে হাসি দিয়ে মাথা নেড়ে জানালো ব্যাথা পাচ্ছে না। আমি ধোন চালানো শুরু করলাম। যেটুকু ঢুকেছে সেটুকুই টেনে মাথা পর্যন্ত বের করে আবার ঢুকাতে লাগলাম। এভাবে আস্তে আস্তে একটু একটু করে বেশি ঢোকাতে ঢোকাতে এত সময় দেখি ধোনের গোড়া পর্যন্ত ওর ভুদার মধ্যে ঢুকে গেছে। আমি ফ্রি স্টাইলে কোমড় চালাতে লাগলাম। সুমি মাঝে মধ্যেই চোখ মুখ কুঁচকিয়ে নিচের ঠোঁট দাতেঁ চেপে ধরছিল, অর্থাৎ ও ব্যাথা পাচ্ছিল কিন্তু সব ব্যাথা হজম করে আমি ওর দিকে তাকাতেই মিষ্টি করে হাসি দিচ্ছিল। সুমির ভুদার ছিদ্র আমার ধোনের বেড়ের তুলনায় বেশ চাপা, ওর ভুদার পাইপ আমার ধোনটাকে কামড়ে চেপে ধরেছিল কিন্তু পাইপটা সুন্দর পিছলা থাকার কারনে ধোন চালাতে বেশি বেগ পেতে হচ্ছিল না কিন্তু আমাকে বেশ ঠেলে ঠেলে ধোন ঢোকাতে হচ্ছিল। Kajer Meye Chodar Golpo কাজেই ওর ব্যাথা পাওয়াটা স্বাভাবিক কিন্তু সেইসাথে মজাও পাচ্ছিল বলে ব্যাথাটা হজম করে নিচ্ছিল। সুমির মুখে কোন শব্দ ছিল না। সুমির ভুদা অতিরিক্ত টাইট হওয়ার কারনে আমি বেশিক্ষন মাল ধরে রাখতে পারছিলাম না। মাঝে মধ্যেই আউট হওয়ার উপক্রম হচ্ছিল। তখন আমি বিরতি দিয়ে মনটা অন্যদিকে সরিয়ে নিয়ে মাল আউট করা বন্ধ করছিলাম। কারন যে করেই হোক সুমির অর্গাজম করাতে হবে। ওর জিবনের প্রথম চুদাচুদির অভিজ্ঞতা বড় কষ্টের, কাজেই ওকে সুখের চরম সিমায় পৌঁছিয়ে আমি যা বলেছি সেই চরম আনন্দ পাইয়ে প্রমান করতে হবে যে চুদাচুদিতে কষ্টের চেয়ে সুখ বেশি। আমি ওর দুধের নিপল আঙুলের নখ দিয়ে খুঁটে দিলাম। তবুও সুমির অর্গাজমে দেরি হচ্ছিল। শেষ পর্যন্ত যখন বুঝলাম যে, যে কোন মুহুর্তে আমার মাল আউট হয়ে যেতে পারে, তখন আমি সুমির পাছা টেনে খাটের কিনারে নিয়ে এসে দাঁড়িয়ে দাঁড়িয়ে চুদতে লাগলাম। সেইসাথে আমার হাতের বুড়ো আঙুল দিয়ে ওর ক্লিটোরিস ডলে দিতে লাগলাম। এবারে কাজ হলো, সুমি পাছা দোলাতে শুরু করলো। আরো কিছুক্ষন পর সুমি হঠাৎ করে ওর দুই পা দিয়ে আমার পা পেঁচিয়ে ধরে, ওম ওমা ওমা আ আ আ আ আ করতে করতে উপর দিকে উঠে আমাকে জড়িয়ে ধরে আমার ধোন ওর ভুদা দিয়ে চেপে ধরে কয়েকবার জোরে ঠেলা দিল। সুমির অর্গাজম হয়ে গেল আর সেইসাথে আমারও সুমির ভুদার মধ্যেই মাল আউট হয়ে গেল, ঠেকাতে পারলাম না। Kajer Meye Chodar Golpo দুজনেই থেমে গেছি, সুমি আমাকে তখনো জড়িয়ে ধরে আমার বুকের সাথে মাথা ঠেকিয়ে বসে আছে। সুমির ভুদা দিয়ে আমার মাল গড়িয়ে বের হয়ে আমার রান বেয়ে নিচে নামছে। আমি আমার লুঙ্গি নিয়ে নিচে ধরে তারপর ওর ভুদা থেকে আমার ধোন টেনে বের করে ওর ভুদা মুছে দিয়ে আমার ধোনও মুছে ফেললাম। এরপর সুমির থুতনি ধরে মুখটা উঁচু করে ওর ঠোঁটে একটা গাঢ় চুমু দিয়ে জিজ্ঞেস করলাম, কি, ব্যাথা না মজা?সুমি আমার চোখ থেকে চোখ সরিয়ে লজ্জায় লাল হয়ে হাসতে হাসতে আমার বুকে একটা কিল দিয়ে বললো জানিনে যান।তারপর দৌড়ে পালালো। চাচি অনেক বেলায় ফিরলেন, ডাক্তারের চেম্বারে অনেক ভিড় ছিল। সুমি এরই মধ্যে রান্না ানেক এগিয়ে রেখেছে কিন্তু ও একটু একটু খোঁড়াচ্ছিল। চাচি আমার সামনেই ওর খোঁড়ানোর কারন জানতে চাইলেন। আমি প্রচন্ড ভয় পেয়ে গেলাম। কিন্তু সুমি বুদ্ধি করে বললো যে এর কুঁচকিতে একটা ছোট্ট বিষফোঁড়া উঠেছে, সেটাতেই ব্যাথা হয়েছে বলে হাঁটতে কষ্ট হচ্ছে। চাচি আমাকে বললো সুমিকে কিছু পেইন কিলার দিতে আর সুমিকে বললো, বিষফোড়ায় গরম পানির স্যাঁকা দিতে। জানোয়ারটা আমার ভোদার পর্দা ফাটাইছে বড়চাচির কাজের মেয়েটা বগলা রাউন্ড ২ দরজি ভাবিকে লোশন চোদা আমি সুমির চোখের দিকে তাকালে সুমি মুচকি হেসে এক চোখ টিপ দিল, যেটা ছিল আমার কাছে সম্পূর্ণ অবাস্তব। পরদিন সকালে সুমি যখন আমার ঘর ঝাড়ু দিতে এলো আমি ওর ভুদার ব্যাথার কথা জানতে চাইলে ও জানালো যে তখনো একটু একটু ব্যাথা আছে।সেই সাথে ঠাট্টা করে বললো ব্যাথা হবিনে আপনের জিনিসখেন যা বড় আর মুটা পুরোটা ঢুকাই দিছিলেন। Kajer Meye Chodar Golpo আমি বললাম, তাতে কি, মজা তো পেয়েছিস।সুমিও আমার কথাটা ভেংচিয়ে বলল তারপর হাসতে হাসতে কেটে পড়লো। বিকালে ওর হাঁটাচলা স্বাভাবিক হয়ে গেল। চাচি বাসায় থাকার কারনে আমি কেবল বিকালে ওর দুধ টিপতে পারলাম। পরদিন রানির জ্বর একটু কমলেও চাচি আবার ওকে ডাক্তারের কাছে নিয়ে গেলেন, কারন ডাক্তার সেটাই বলে দিয়েছিল। ওরা বেড়িয়ে যাবার পর আমি আয়েশ করে সেদিনও সুমিকে চুদলাম, সুমি একটু একটু করে পাকা চোদনখেকো হয়ে উঠছে। আরো দুই দিন পর চাচি যখন রানিকে নিয়ে ডাক্তারের কাছে গেলেন সেদিনও সেই সুযোগে সুমিকে চুদলাম। আমাকে আর চুদার জন্য সুমিকে খুঁজতে হলোনা বরং সুমিই এসে আমার বুকে লুটিয়ে পড়লো। বড় ভাল লাগলো, বিয়ে করা বৌও বুঝি এমনই করে। সুমিকে আমার বৌ বৌ ভাবতে বড় ভালো লাগলো। আমি আরো ২,৩ সপ্তাহ থাকলাম কিন্তু প্রতিদিন দুধ টিপতে পারলেও পরে আর মাত্র ২ দিনের বেশি সুমিকে চুদতে পারিনি। কিন্তু সেই ৫ দিনের চুদাই সুমিকে আমার মনে সারা জিবনের জন্য স্মরনিয় করে রেখেছে, সুমিকে ভুলতে পারবো না কোনদিন। আমি থাকা অবস্থায় প্রতিদিন সুমির দুধ টিপতে টিপতে ওর দুধগুলো বেশ বড় হয়ে উঠছিল, তাই আসার আগে আমি ওর জন্য দুটো ব্রা কিনে দিয়ে এসছিলাম, সেগুলিই ছিল। Kajer Meye Chodar Golpo
  12. ভাই বোন চটি তখন আমি সদ্য পাস করে বের হওয়া একটা ১৮ বছরের টগবগে যুবক আর কলেজে ভর্তি হওয়ার অপেক্ষায় ছিলাম। এই বয়সী ছেলে হলে যেমন হয় আর কি আমিও ঠিক তেমনি ছিলাম। বন্ধুদের সাথে আড্ডা মারা, ব্লুফিল্ম দেখা আরো অনেক কিছু। ব্লুফিল্ম দেখে দেখে হাত মেরে মাল ফেলাও শুরু করি। আর যখন থেকে চোদা কি জিনিস বুঝতে শিখেছি তখন থেকে শুধু আমার দুই আপুকে দেখে তাদের চোদার কথা ভেবে ভেবে মাল ফেলি। bhai boner chodar golpo আমার বড় দুই ভাই আর দুই বোন বিবাহিত। যে ঘটনাটা বলতে যাচ্ছি তা আমার বড় আপু হুসনাকে নিয়ে। আপুর বিয়ে হয় তিন বছর আগে। আর বিয়ে দেয়া হয় একই গ্রামে তার স্বামী ছোটখাটো একটা বেবসা করত।আমি যখন আপুর প্রতি দুর্বলতা অনুভব করি তখন তার বয়স ২৪ বছর, ১ ছেলের মা। বিয়ের পর আপুর শরীরটা হঠাত করে বেড়ে যায় আর বেড়ে যাওয়ার কারণে আপুকে আগের চেয়ে আরো বেশি সুন্দর লাগত। আপু দেখতে যেমন সুন্দর ছিল তেমন তার শরীরের গঠন। আপুর শরীরের যে অংশটা আমার সবচেয়ে ভালো লাগত তা হলো তার দুধ এর পাছা। তবে তখন এ সব নিয়ে কখনো ভাবিনি। তবে আপুর যখন ছেলের জন্ম হয় তখন আমি লুকিয়ে লুকিয়ে আপুকে দেখতাম যখন সে তার বাচ্চাকে দুধ খাওয়াতো। আমার খুব লোভ লাগত। ভাবতাম ইসসস আমিও যদি আপুর দুধ খেতে পারতাম। কিন্তু আমার সপ্নটা সপ্নই রয়ে যায়। তবে আমি হল ছাড়িনি, সুযোগের অপেক্ষায় ছিলাম আর একদিন সেই সুযোগটা এসে গেল।দিনটি ছিল ২০১৯ সালের এপ্রিল মাসের ২১ তারিখ। bhai boner chodar golpo হঠাত খবর পেলাম আপুর নাকি খুব শরীর খারাপ, বুকে নাকি অনেক বেথা করছিল। দেরী না করে তাড়াতাড়ি আমি তাকে দেখতে যাই। আর যাওয়ার সময় ডাক্তার সাথে করে নিয়ে যাই। কারণ দুলাভাই তখন বাড়িতে ছিল না দোকানের জন্য মাল কিনতে ঢাকা গিয়েছিল। তো ডাক্তার গিয়ে আপুকে দেখে বলে দেরী না করে চট্টগ্রাম নিয়ে গিয়ে ভালো একজন হার্টের ডাক্তার দেখাতে। আমি ঘটনাটা দুলাভাইকে জানাই। দুলাভাই আমাকে নিয়ে যেতে বলে। আমি তখন একটা প্রাইভেট কার রিজার্ভ করে আপুকে নিয়ে চট্টগ্রামের উদ্দেশ্যে রওয়ানা হই। চট্টগ্রাম পৌঁছাতে আমাদের প্রায় বিকেল ৪টা বেজে যায়। আমি আপুকে নিয়ে আমার পরিচিত শেভরন নামে একটা প্রাইভেট ক্লিনিকে নিয়ে যাই আর একজন হার্টের ডাক্তার দেখায়। ডাক্তার আপুকে দেখে কিছু টেস্ট দিল আর আমাকে কিছু ঔষুধ নিয়ে আসতে বললো। আমি আপুকে টেস্টগুলো করিয়ে ঔষুধ নিয়ে আসি। ডাক্তার আপুকে একটা সালাইন দিল। যা শেষ হতে প্রায় রাত ৮টা বেজে যায়। সালাইন শেষে আপুকে কিছুটা ভালো মনে হলো, ডাক্তার আপুকে দেখে আরো কিছু ঔষুধ লিখে দেয় আর একটা বেথা কমার মলমও দিয়ে বলে রাতে ভালো করে মালিশ করতে বেথা কমে যাবে আর বললো পরদিন আবার নিয়ে যেতে টেস্ট রিপোর্টগুলো দেখে ফাইনাল প্রেসক্রিপসন দেবে। bhai boner chodar golpo ডাক্তারের কথা শুনে আমিতো মনে মনে খুশি কারণ আজ হয়তো সেই দিন যে দিনের অপেক্ষা আমি অনেক আগে থেকে করছি। বড় বোনকে চোদার চটি গল্প Boro Bonke Chodar Golpo আমি আপুকে আমার মনের কথা বুঝতে না দিয়ে জিগ্গেস করলাম, আমি: আপু এখন কি হবে, রাতে কথায় থাকবো? আপু: অনেক ভাবে বলল এক কাজ কর যেহেতু থাকতেই হবে চল কোনো হোটেলে গিয়ে উঠি এই রাতটাইতো মাত্র, কোনো রকম কাটাতে পারলেই চলবে। আমারতো আপুর কথা শুনে আকাশের চাঁদ পাওয়ার মত অবস্থা bhai boner chodar golpo আমি: তাহলে বাড়িতে আর দুলাভাইকে জানিয়ে দেই, কি বলো? আপু: হাঁ, তাই কর। আমি বাড়িতে আর দুলাভাইকে ফোন করে সব জানাই। দুলাভাই থেকে যাওয়ার জন্য বলে। আমি ডাক্তারের দেয়া ঔষুধগুলো আর মলমটা নিয়ে বাইরে থেকে খাওয়া-দাওয়া সেরে ভালো দেখে একটা হোটেলে উঠি। হোটেলে ওঠার পর আমি আপুকে বলি তুমি আগে ফ্রেশ হয়ে নাও তারপর আমি তোমার বুকে মলম মালিশ করে করে দেবো। আপু আমার কথা শুনে একটু লজ্জা পেল। আর বললো তোর মালিশ করতে হবে না আমি নিজে মালিশ করতে পারবো। এ কথা বলার সময় আপুর মুখে মুচকি হাঁসি ছিল। আমি বললাম তুমি আগে গিয়ে গোসল করে নাও তারপর দেখা যাবে। আপু গোসল করার জন্য বাথরুমে চলে যায়। আমি ভাবতে থাকি কিভাবে শুরু করবো। এগুলো ভাবছিলাম আর তখন আপু গোসল শেষে বাথরুম থেকে বের হলো। ভেজা শরীরে আপুকে দারুন লাগছিল। আমি এক দৃষ্টিতে তার দিকে হা করে তাকিয়ে ছিলাম। সে আমার অবস্থা দেখে বললো, আপু: কিরে এভাবে হা করে তাকিয়ে কি দেখছিস? bhai boner chodar golpo আমি: আপু সত্যি কথা বলতে কি তোমাকে আজ অনেক সুন্দর লাগছে। আপু: আজ কেনো আগে বুঝি আমাকে সুন্দর লাগত না? আমি: তা না, আজ একটু বেশিই সুন্দর লাগছে তোমাকে। আপু: যাহ: আর পাকামো করতে হবে না, গোসল করে নে। আমি: ওহঃ তাইতো আমিতো ভুলেই গিয়েছিলাম বলে তারাহুরো করে বাথরুমে ঢুকে গেলাম। গোসল শেষে হাফ পান্ট পরে যখন বের হলাম তখন আপু আমার দিকে তাকিয়ে মুচকি মুচকি হাঁসছিল। আমি: এখানে হাঁসার কি আছে? আপু: কি আমিতো হাঁসি নি। bhai boner chodar golpo আমি: আমি দেখছি। আচ্ছা তোমার এখন কেমন লাগছে আপু? আপু: আগের চেয়ে একটু ভালো তবে বুকের বেথা এখনো তেমন কমেনি। আমি: তুমি ঔষুধগুলো খেয়ে শুয়ে পর আমি তোমার শরীরে মালিশ করে দেব, দেখবে কমে যাবে। আপু: বললাম না আমি নিজে মালিশ করতে পারবো তোকে কষ্ট করতে হবে না বলে আপু ঔষুধগুলো খেল। আমি: তুমি পারবে না, কেও কি নিজের শরীর মালিশ করতে পারে। অযথা বাড়াবাড়ি না করে সুন্দর করে লক্ষী মেয়ের মতো শুয়ে পরো। আপু আর কি করবে আমার বায়নার কাছে হার মেনে শুয়ে পড়ল আর বলল অনেকতো মালিশ করার শখ আজ দেখব কেমন মালিশ করিস। আমি বললাম, ও মা তুমি কাপড় পরে থাকলে মালিশ করবো কিভাবে? আপু: আমি তোর সামনে কাপড় খুলতে পারবো না। bhai boner chodar golpo আমি: আমি কি আর পর, আমার সামনে লজ্জা পাচ্ছো আর আমিতো তোমাকে সব কাপড় খুলতে বলছিনা শুধুমাত্র শাড়িটা খোলার জন্য বলছি। আপু: আচ্ছা বাবা ঠিক আছে, বলে উঠে শাড়িটা খুলতে শুরু করলো আমিতো এক পলকে তাকিয়ে আছি। শাড়ি খুলে সে আবার শুয়ে পড়লো। তখন আমি মলমটা নিয়ে প্রথমে আপুর বুকে (ঠিক দুধের উপরে) মালিশ করা শুরু করলাম। আপু আমার হাতের ছোঁয়া পেয়ে চোখ বন্ধ করে ফেলে। আমি আস্তে আস্তে তার বুকের (দুধের) চারপাশে মালিশ করতে থাকি। আমি আপুকে জিগ্গেস করলাম, আমি: কেমন লাগছে আপু তোমার? আপু: অনেক ভালো লাগছে। আমি: তুমি নিজে করতে পরতে এমন? bhai boner chodar golpo আপু: না। আমি: তাহলে তখনতো খুব বলছিলে তুমি নিজে মালিশ করতে পারবে? আপু: এমনি বলেছিলাম, সত্যি কথা বলতে কি তোকে মালিশ করতে বলতে আমার লজ্জা করছিল। আমি: এখন চুপ করে শুয়ে থাকো, আমি ভালো করে মালিশ করে দেই দেখবে তোমার বেথা কমে যাবে। আপু: ঠিক আছে, বলে চুপ করে শুয়ে রইলো। আমি এক মনে আপুর বুকে মালিশ করে যাচ্ছিলাম, মাঝে মাঝে ইচ্ছে করে আপুর বড়ো বড়ো দুধ দুইটাতে হাত লাগাচ্ছিলাম। দেখলাম আপু কিছু বলছে না, সাহস করে বললাম, আমি: আপু একটা কথা বলি? আপু: বল। bhai boner chodar golpo আমি: ব্লাউসের কারণে তোমার বুকে মালিশ করতে সমস্যা হচ্ছে। আপু কিছু না বলে চুপ করে রইলো দেখে আমি আবার বললাম, আপু তোমার ব্লাউসটা খুলে দেই? আপু: দেখ এগুলো ভালো না, আমরা ভাই বোন, আমি কিভাবে তর সামনে অর্ধ নগ্ন হবো? আর আমি তাড়াহুরোয় ভিতরে কিছু পরি নি। ( ভাই বোন চুদাচুদির গল্প) আমি: এখানেতো তুমি আর আমি ছাড়া আর কেও নেই আর এখানে খারাপের কি আছে আমিতো তোমার ওগুলো অনেকবার দেখেছি তাই আমার সামনে লজ্জা কিসের আমিতো শুধু তোমার ভালোর জন্য বলছিলাম এই বলে একটু অভিমানের ভঙ্গি করে বললাম, থাক লাগবে না বলে আবার মালিশ করায় মন দিলাম। আপু কিছুক্ষণ ভেবে বলল, ও মা আমার ভাইটা দেখি আমার উপর রাগ করেছে বলে আমার মাথাটা তার দিকে তুলে নিলো আর বললো, আপু: আচ্ছা তুই বুঝি আমাকে লুকিয়ে লুকিয়ে দেখতিস? তবে দেখ ভাই-বোনে এ সব করা ঠিক না, আর কেউ জানলে আমারতো সর্বনাশ হয়ে যাবে। আমার ঘর সংসার সব শেষ হয়ে যাবে। আমি: মাথা খারাপ আমি কেন কাউকে বলতে যাবো তোমাকে লুকিয়ে দেখার কি আছে, তোমার ছেলেটাকে যখন তুমি দুধ খাওয়াতে তখনতো আমি অনেকবার দেখেছি। তবে সেটা অনেক আগে। আর একদিন দুলাভাই তোমার ওগুলো যখন চুষছিল তখন আমি দেখছি। আপু: আচ্ছা তাই বুঝি এখন আমার এগুলো আবার কাছ থেকে দেখতে ইচ্ছে করছে বলে তার ব্লাউসটা খুলে দিয়ে বললো দেখ তোর যত ইচ্ছে দেখ আর এগুলোকে একটু ভালো করে মালিশ করে দে। আমিতো খুশিতে আপুর গালে একটা চুমু বসিয়ে দেই। তারপর দুই হাত দিয়ে আপুর ডাসা ডাসা দুধ দুইটা মালিশ করতে থাকি। আপুর দুধগুলো দেখতে খুব সুন্দর ছিল। আমি মনের সুখে আপুর দুধ মালিশ করছিলাম। অনেকক্ষন মালিশ করার পর আমি আপুকে বললাম, আমি: আপু তোমাকে একটা কথা বলি, রাগ করবেনাতো? ( ভাই বোন চটি গল্প ) আপু: কি বল, রাগ করবো না। আমি: আমি তোমাকে অনেক ভালোবাসি। আপু: আমিও তোকে অনেক ভালোবাসি। আমি: আমি তোমার শরীরটাকেও অনেক ভালোবাসি। আপু: হতভম্ব হয়ে, কি? আমি: সত্যি বলছি আপু, তোমাকে আমি সব সময় লুকিয়ে লুকিয়ে দেখতাম তুমি যখন গোসল করে ভেজা কাপড়ে বের হতে আর কাপড় পাল্টাতে তখন আমি তোমাকে দেখতাম। আপু: কি বলছিস তুই এ সব, আর কি কি দেখেছিস? আমি: বললে তুমি রাগ করবে নাতো? ( বড় বোনকে চোদার গল্প ) আপু: না করবো না বল। আমি: একদিন তোমার আর দুলাভাইর কাজ করাও দেখছি। আর তখন থেকে আমারও তোমাকে খুব করতে ইচ্ছে করতো। আপু: (না বোঝার ভান করে) কি করতে ইচ্ছে করতো তোর? আমি: দুলাভাই যা করছিল। আপু: তোর কি মাথা খারাপ হয়েছে নাকি, তুই জানিস তুই এ সব কি বলছিস, আমরা ভাই-বোন তাও আবার এক মার পেটের আর আপন ভাই-বোনের মধ্যে এসব হয় না। আমি: তুমি তাহলে কিছুই জানো না। আজকাল সবই সম্ভব। আমি অনেকগুলো ছবি দেখছি যেখানে শুধু ভাই-বোন কেন মা-ছেলেতো ঐসব কাজ করে। আপু: আমি বিশ্বাস করি না। তুই সব বানিয়ে বলছিস। bhai boner chodar golpo আমি: কসম আপু আমি কিছুই বানিয়ে বলছি না, সবই সত্যি প্রথম প্রথমতো আমিও বিশ্বাস করতাম না কিন্তু যখন দেখলাম তখন বিশ্বাস না করে থাকতে পারিনি। আর এ ছাড়াও বাজারে অনেক গল্পের বইও পাওয়া যায় যেখানে মা-ছেলে, বাবা-মেয়ে আর ভাই-বোনের সেক্সর গল্পে ভরপুর। আপু: তুই কি সত্যি বলছিস? আমি: আপু আমি কি তোমাকে মিথ্যে বলবো নাকি, আর কসমতো করলামই। কসম করে কেউ কি মিথ্যে বলে। আপু: কিছুক্ষন চুপ করে থেকে বলল। আচ্ছা ঐসব বাদ দে এখন আমার গায়ে মলম মালিশ কর ভালো করে। আমি বুঝতে পারলাম আপু কিছুটা দুর্বল হয়ে পরেছে। তাই আমি এবার আপুর দুধ থেকে শুরু করে নাভি পর্যন্ত মালিশ করতে থাকলাম, দেখি আপুর শ্বাস ঘন হচ্ছে। আমি দুই হাত দিয়ে মালিশ করতে করতে একবার উপরে যাই আবার নিচে নেমে আসি। কিছুক্ষন পর আপু আবার জিজ্ঞেস করে, আপু: আচ্ছা আমরা যা করছি তা কি ঠিক? bhai boner chodar golpo আমি: বেঠিকের কি আছে, আর দুই জন মানুষ যদি চায় তাহলে সেখানে সমস্যাতো থাকার কথা নয়। আর তুমি কি জানো পৃথিবী শুরু হয়েছে পারিবারিক সেক্স দিয়ে। আগেতো ভাই-বোনের বিয়ে বৈধ ছিল আর তা হতো অনেক ধুমধাম করে। আর অনেক জায়গায় বাবার যদি কিছু হয় ছেলে তার মাকে বিয়ে করে। এ রকম আরো অনেক কাহিনী আছে। আপু: তাই নাকি। তুই এত কিছু জানলি কি করে? আমি: বই পড়ে। আপু: তাইতো বলি আমার কাপড় খোলার প্রতি তোর এত মনোযোগ কেন ছিল। আচ্ছা তুই তাদের মতো আমার সাথে করবি নাকি? আমি: তুমি যদি মত দাও তাহলে, এটা আমার অনেক দিনের আশা। একমাত্র তুমিই পারো আমার আশাটা পুরন করতে আপু। আপু: আমি? আমি: হাঁ। আপু: কিন্তু আমার খুব ভয় করছে যদি কেও জেনে যায়। আমি: তুমি আর আমি যদি কাউকে না বলি তাহলে কে জানবে? আপু: তা ঠিক, তবে এটা করা কি ঠিক হবে? ( বোনের সাথে চুদা চুদি করার নতুন চটি গল্প ) আমি: আপু তুমি শুধু শুধু চিন্তা করছো, কিছু হবে আর কেও জানবেও না, আমরাতো আর সবার সামনে করছি না। এ সব কথা বলতে বলতে আমি আপুর দুধ টিপছিলাম, তা আপু এতক্ষণ খেয়াল করে নি, আমি তার দুধ টিপছি দেখে সে বললো, আপু: শুধুই কি টিপবি খাবি না, তোর না আমার এগুলো খেতে ইচ্ছে করতো এখন ভালো করে খা, আমার এগুলো খুব বেথা করছে একটু চুষে দে না। আমি: তুমি বলছো? আপু: হাঁ, তোর যতক্ষণ ইচ্ছে খা, আজ থেকে আমি তোর, তুই যা যা ইচ্ছে করতে পারিস আমার সাথে। আমি: আপু তুমি অনেক লক্ষী বলে তার ঠোঁটে একটা আলতো করে চুমু দেই। আপুর শিউরে উঠে বলে, আপু: অনেকদিন পর এমন করে কেও আমাকে আদর করলো। আমি: কেন আপু, দুলাভাই বুঝি তোমাকে আদর করে না? আপু: তার সময় কোথায়, সে অনেক রাত করে বাড়ি ফেরে আর খেয়েই ঘুমিয়ে পরে আবার সকালে ভোরে উঠে চলে যায়। আমি: তার মানে দুলাভাই তোমার সাথে সেক্স করে না? bhai boner chodar golpo আপু: করে, কিন্তু খুব কম, সপ্তাহে একবার বা ১৫ দিনে একবার তাও আবার বেশি কিছু করে না, শুধু সেক্স করে, আদর করে না। আমি: আজ থেকে তোমাকে আর চিন্তা করতে হবে না, তোমার এই ভাই আজ থেকে তোমাকে সব রকমের সুখ দেবে। আপু: (কান্না গলায়) আমাকে জড়িয়ে ধরে বলে, তাই দে ভাই, আমি আজ থেকে সম্পূর্ণ তোর, আমি নিজেকে তোর কাছে সমর্পণ করলাম বলে আপু আমার ঠোঁটে চুমু খায়। আমিও আপুকে জড়িয়ে ধরে তার ঠোঁট দুটো চুষতে শুরু করি, আর সাথে সাথে আপুর ডাসা ডাসা দুধগুলোকে কচলাতে থাকি। আপুও সমান তালে আমাকে সহযোগিতা করছে সেও আমার ঠোঁট চোষা শুরু করে। আমরা অনেকক্ষণ একে অপরকে জড়িয়ে ধরে ঠোঁট চুষতে থাকি। তারপর আমি তার একটা দুধের বোঁটা আমার মুখে পুরে চুষতে থাকি, কিছুক্ষণ পরপর একটাকে ছেড়ে আরেকটাকে চুষি, আমি বললাম ইসস আপু এখন যদি তোমার বুকে দুধ থাকত আম পেট পুরে খেতাম। ভ আপু অসুবিধা নেই সামনে বাচ্চা নিলে খেতে পারবি আপু বললো। আমি বললাম সত্যি দিবেতো খেতে? আপু বললো, হাঁ বাবা দেব বললাম না, এখন কথা না বলে ভালো করে এই দুটোকে চোষ। আমি আবার দুধ চোষায় মন দিলাম, প্রায় ১০ মিনিটের মত আপুর দুধ দুইটা চুসলাম আর চসার এক ফাঁকে আমি আমার একটা হাত আপুর গুদের উপর নিয়ে রেখে রগড়াতে থাকি। আপু কিছু বলছে না দেখে আমি আস্তে আস্তে ছায়ার উপর দিয়ে আঙ্গুল দিয়ে তার গুদের মুখে ডলতে থাকি, আপু শুধু আহঃ আহ্হ্হঃ উহঃ উহঃ করছে। এ দিকে আমার বাড়াটার করুন অবস্থা, যেন পান্ট ছিঁড়ে বেরিয়ে আসবে। আমি আপুকে বললাম, আমি: আপু তোমার ছায়াটা খুলে দেই? ( ভাই বোনের চোদার গল্প ) আপু: (একটু লজ্জা পেয়ে) জানি না বলে দুই হাত দিয়ে চোখ মুখ ঢেকে ফেলে। আমি আপুর কথার ভাব বুঝতে পেরে নিজেই আপুর ছায়ার ফিতেটা এক টান দিয়ে খুলে আস্তে আস্তে করে আপুর শরীরের শেষ সম্বল তার ছায়াটা পা দিয়ে নামিয়ে খুলে ফেলি। এখন আমার থেকে ১০ বছরের বড়ো আপু আমার সামনে সম্পূর্ণ নেংটা। আমিতো আপুর সুন্দর শরীরটার দিকে অপলক দৃষ্টিতে তাকিয়ে আছি, বিশেষ করে তার গুদটা খুব সুন্দর আর ফোলা। ক্লিন সেভ করা, মনে হই ২/১ দিন আগেই বাল কেটেছে। আমাকে অভাবে ওর গুদের দিকে হা করে তাকিয়ে থাকতে দেখে সে বললো, আপু: কি রে সোনা ভাই আমার ওভাবে কি দেখছিস? আমি: আপু তোমার গুদটা খুব সুন্দর একদম ব্লুফিল্মের নায়িকাদের মতো। আপু: যা বেয়াদব, তোর মুখে কিছুই আটকায় না দেখছি। আমি: আপু সত্যি বলছি। আপু: আচ্ছা একটা সত্যি কথা বলবি? আমি: কি কথা? আপু: তুই এর আগে কাউকে করেছিস? আমি: (না বোঝার ভান করে) কি করেছি? bhai boner chodar golpo আপু: হাঁ, নেকা, যেন কিছুই বুঝে না, আমি জিগ্গেস করলাম, তুই কি আগে কারো সাথে সেক্স করেছিস? আমি: না আপু। আপু: সত্যি বলছিসতো? আমি: হাঁ, বলে আপুর ভোদায় একটা চুমু খাই। আপু কেঁপে উঠে। আমি বললাম, আচ্ছা আপু দুলাভাই কি তোমার গুদটা কখনো চুসেছে? আপু: গুদ কি রে? আমি: মনে হয় বোঝো না? আপু: না। bhai boner chodar golpo আমি: গুদ মানে তোমার এই সুন্দর জায়গাটা, এটাকে গুদ বলে, ভোদা বলে আরো অনেক নামে ডাকে। আপু: তাই নাকি? আমি: হাঁ, কই বললেনাতো দুলাভাই কি তোমার গুদটা চোষে? আপু: না। আমি: কি বলো, এততেইতো আসল মজা, আর তুমি সেটা থেকে বঞ্চিত? আপু: বললামনা সে শুধু ঢুকিয়ে মাল বের করে, আর তেমন কিছু করে না। আমি: আজ দেখো তোমার এই ভাই তোমাকে কতো মজা দেয়, বলে আমি মুখটা আপুর গুদে নিয়ে গেলাম। আপু: এই কি করছিস, ওখানে মুখ দিচ্ছিস কেন, খবিশ কোথাকার? আমি: হেঁসে, তুমি শুধু চেয়ে চেয়ে দেখো আমি কি করি, পরে তুমি নিজেই বলবে ভাই আমার গুদটা একটু চুসে দে না। আপু: তুই এত কিছু জানলি কি করে? আমি: বললাম না ব্লুফিল্ম দেখে দেখে বলে আপুর গুদ চোষা শুরু করলাম (বন্ধুরা তোমরা বিশ্বাস করবে না আমার যে কি ভালো লাগছিল তখন)। আমার চোষায় আপু বার বার কেঁপে উঠছিল আর হাত দিয়ে আমার মাথাটা চেপে ধরছিল। আমি জিগ্গেস করলাম, আমি: আপু কেমন লাগছে? আপু: অনেক ভালো লাগছেরে, এত ভালো লাগে জানলেতো অনেক আগেই তোকে দিয়ে চোদাতাম, এতটাদিন আমার কষ্ট করতে হত না। আমি: এখন থেকে আর কষ্ট করতে হবে না, আমি পরদিন অন্তত একবার তোমাকে চুদবো। আপু: চোষ ভাই, ভালো করে চোষ, চুষে আজ আমার গুদের সব রস খেয়ে ফেল। আমাকে শান্তি দে ভাই আমাকে শান্তি দে। bhai boner chodar golpo আমি চোষার ফাঁকে আপুর গুদে একটা আঙ্গুল ঢুকিয়ে দেই, বললে বিশাস করবে না তোমরা, আমার তখন মনে হয়েছিল আমি কোনো আগুনের কুন্ডুলিতে আঙ্গুল ঢুকিয়েছি, আর আপুর বয়স হলে কি হবে তার গুদটা এখনো অনেক টাইটা, মনে হচ্ছিল কোনো কুমারী মেয়ের গুদে আঙ্গুল ঢুকিয়েছি। যাই হোক আমি আমার কাজ করে যাচ্ছিলাম চোষার ফাঁকে ফাঁকে আঙ্গুল দিয়ে আঙ্গুল চোদা করছিলাম আপুকে। কখনো এক আঙ্গুল কখনো দুই আঙ্গুল। এভাবে অনেকক্ষণ চলার পর দেখলাম আপুর গুদ বেয়ে পিছলা কামরস বের হচ্ছিল, আমি আমার আঙ্গুলে লেগে থাকা কিছুটা রস চেটে দেখলাম, আপুতো আমার কান্ড দেখে ছি: ছি: করছে, আমি হেঁসে বলি, আমি: আপু তোমার রসগুলো দারুন টেস্টি, নোনতা নোনতা। আপু: তুই আসলেই একটা খবিশ, কেও কি এগুলো মুখে দেয়? bhai boner chodar golpo আমি: দেয় মানে, তুমি একটু টেস্ট করে দেখো তোমার গুদের রসগুলো কি সুস্বাধু বলে আমার আঙ্গুল আপুর মুখের কাছে নিয়ে গেলাম। আপু আমার হাতটা এক ঝটকায় সরিয়ে দিলো, বললো- আপু: আমি পারব না, আমারতো এখনি বমি আসতে চাইছে। তবুও আমি আমার হাতটা আবার আপুর মুখের কাছে নিয়ে গিয়ে বললাম, একবার চেখে দেখিনা, দেখবে ভালো লাগবে বলে জোড় করে আঙ্গুলটা তার মুহে ঢুকিয়ে দিলাম। আপু ওয়াআক করে থুতু ফেলল, আমিতো হেঁসেই শেষ তার অবস্থা দেখে। আমি: কেমন লাগলো তোমার গুদের রস আপু? আপু: যাহ ।।। বলতে পারব না। আমি: এবার গুদ ছেড়ে উঠে বসলাম আপুর বুকের উপর বললাম এবার তোমার পালা। আপু: কি? আমি: এবার তুমি আমারটা চুষে দাও? bhai boner chodar golpo আপু: আমি পারবো না, আমার ঘেন্না করছে। আমি: ঘেন্নার কিছু নাই, আমি যেমন তোমারটা চুসছি তুমিও আমারটা চোষ দেখবে অনেক ভালো লাগবে। এই বলে আমি হাফ পান্টটা খুলে আমার ৬।৫ ইঞ্চি বাড়াটা আপুর মুখের সামনে উম্মুক্ত করে দিলাম। আপাত আমার বাড়া দেখে একদম চুপ হয়ে গেল। আপুকে চুপচাপ দেখে আমি জিগ্গেস করলাম, আমি: কি বেপার অভাবে তাকিয়ে আছো কেন, কি তোমার ভাইয়ের বাড়াটা বুঝি পছন্দ হয়নি? আপু: কেন হবে না, অবাক হচ্ছি এই বয়সে তোর ওটার এই অবস্থা তাহলে ভবিষ্যতে কি হবে? আমি: এমন বলছ কেন, আমারটা কি দুলাভাইয়েরটার চেয়েও বড়ো নাকি? আর তুমি এটাকে ওটা ওটা বলছো কেন, বাড়া বলো বাড়া? আপু: বড়ো মানে তোরটার সামনে ওরটা কিছুইনা, ওরটা অনেক ছোট। আমি: তা আমি জানি, আমি দেখছি। আপু: কিভাবে ? ( ভাই বোন চটি গল্প ) আমি: তোমার হয়তো মনে আছে একদিন বাবা-মা গ্রামের বাড়িতে গিয়েছিল আমাদের রেখে তখন তুমি আর দুলাভাই এসে এখানে ছিলে। আপু: হাঁ, মনে আছে। আমি: তখন একদিন আমরা সবাই মিলে পুকুরে গোসল করতে যাই আর তুমি আর দুলাভাই বাড়িতেই ছিলে, আমি হঠাত কি নিতে এসে তোমাদের রুম থেকে কথা বলার আওয়াজ শুনি, আমি মনে করেছিলাম তোমরা গল্প করছো তাই আমি জানালার পাশে গিয়ে যেই তোমাকে ডাকার জন্য ভিতরে উঁকি দিলাম, দেখি দুলাভাই সম্পূর্ণ নেংটা হয়ে তোমার কাপড় কোমরের উপরে তুলে তোমাকে চুদছে, আমি চুপচাপ তোমাদের চোদাচুদি দেখি, আর তখন দুলাভাইর বাড়াটাও দেখি। আপুতো আমার কথা শুনে একেবারে থ হয়ে গেল, বলে বলিস কি? আমি: হাঁ, সেদিন দুলাভাই যতক্ষণ তোমাকে চুদেছিল আমি জানালার বাইরে থেকে সব দেখছি আর সেদিন থেকে তোমার প্রতি আমি দুর্বল হয়ে পরি আর তোমাকে সব সময় ফলো করতে খাকি, তোমার গোসল, বাচ্চাকে দুধ খাওয়ানো সব দেখতাম আর হাত দিয়ে খেঁচে মাল ফেলতাম। আপু: ওরে দুষ্ট, লুকিয়ে লুকিয়ে আমদের চোদাচুদি দেখিস না বলে আমার বাড়াটা হাত দিয়ে ধরে উপর নিচ করতে লাগলো। bhai boner chodar golpo আমার খুব ভালো লাগছিল তখন জীবনে এই প্রথম কোনো নারীর হাত আমার বাড়ার মধ্যে পড়ল আবার সে আমার মায়ের পেটের আপন বড়ো বোন। সবকিছুকে সপ্নের মত লাগছিল। আপুর নরম কোমল হাতের ছোঁয়া পেয়ে আমার বাড়াটা যেন তার শক্তি ফিরে পেল আর আপুর হাতের মধ্যে তার বাস্তব রুপ ধারণ করলো। আমি আপুকে বললাম দেখলেতো তোমার নরম হাতের ছোঁয়া পেয়ে আমার বাড়াটা খুশিতে কেমন লাফাচ্ছে? আপু: তোর এটা খুব সুন্দর, যেমন বড়ো তেমন মোটা। আমি: তোমার পছন্দ হয়েছে? আপু: হুমমম আমি: তাহলে এবার মুখে নাও, আর ভালো করে চুষে দাও। আপু কিছুক্ষণ ভেবে আলতো করে তার জিভ দিয়ে আমার বাড়ার মাথাটা স্পর্শ করলো। আমি শিউরে উঠি, আপু তখন আস্তে আস্তে বাড়ার মুন্ডিটা মুখে ঢুকিয়ে চুষতে শুরু করে, আমার যে কি ভালো লাগছিল তখন তা বলে বোঝানো যাবে না। আমি দুই হাত দিয়ে আপুর মাথাটা আমার বাড়ার উপর চাপ দিতে লাগলাম যার ফলে বাড়ার প্রায় অর্ধেক অংশ আপুর মুখের ভিতর ঢুকিয়ে দেই, আপুকে জিগ্গেস করলাম, কেমন লাগছে ছোট ভাইয়ের বাড়া চুষতে? ভালই আপু জবাব দিল। আমি বললাম পুরোটা ঢুকাও দেখবে আরো ভালো লাগবে বলে আমি তার মুখের ভিতর ঠাপ মারতে লাগলাম, এক একটা ঠাপে আমার বাড়ার মুন্দিটা তার কন্ঠ নালিতে গিয়ে ধাক্কা মারছে, আপুরতো তখন করুন অবস্থা তার মুখ বেয়ে লালা পরছিল আর চোখ দিয়ে পানি, আমি তখন ভুলেই গিয়েছিলাম যে আপুর শরীর ভালো না, আমি তার চুলের মুঠি ধরে ঠাপাতে লাগলাম, অনেকক্ষণ ঠাপানোর পর আপু আমাকে ঠেলে দিয়ে বললো আর পারবো না এবার আমার ভোদার মধ্যের তোর বাড়াটা ঢুকা। আমি আপুর কথা শুনে আবার নিচে নেমে তার গুদটা কিছুক্ষণ চুসলাম, চুষে কিছুটা পিচ্ছিল করে নিলাম। তারপর আপুকে বললাম এবার ঢুকাই? (আমার শরীরটা তখন শিরশির করছিল জীবনের প্রথম সেক্স তাও আবার আমার বড়ো আপুর সাথে, মনে মনে ভয় পাচ্ছিলাম ঠিকমতো করতে পারবো কিনা)। আপু বললো, দেরী করিসনা সোনা ভাই আমার জলদি ঢোকা। আমি আমার ৬।৫” ইঞ্চি বাড়াটা আপুর গুদের মুখে সেট করে মারলাম এক ধাক্কা, আপুর গুদটা ছিল অনেক টাইট যার ফলে আমার পুরো বাড়াটা ঢুকেনি তবে আমার বাড়ার অর্ধেকটা আপুর গুদে হারিয়ে গেল, আপু ওয়াআক করে মাগো বলে আওয়াজ করে উঠলো, আমি তাড়াহুড়ো করে তার মুখ চেপে ধরে বললাম কি করছ আশেপাশের লোকজন জেনে যাবে। দেখলাম আপুর চোখ দিয়ে পানি গড়িয়ে পরছে। আমি ওদিকে আর খেয়াল না জোরে অর্ধেক ঢুকানো অবস্থায় কিছুক্ষণ ঠাপালাম, আর যখন দেখলাম আপু কিছুটা শান্ত হয়েছে তখন আবার বাড়াটা বের করে একটা বড় নিশ্বাস নিয়ে আপুর ঠোঁটে আমার ঠোঁট বসিয়ে সজোরে মারলাম একটা রাম ঠাপ, আপু চেস্টা করেছিল চিত্কার দিতে কিন্তু আমি তার ঠোঁট আমার মুখের ভিতর রাখতে আওয়াজটা বের হতে পারেনি আর ওদিকে আমার পুরো বাড়াটা আপুর গুদে অদৃস্য হয়ে গেল। bhai boner chodar golpo আমি এবার ঠাপানো শুরু করলাম আমার আপুর গুদের ভিতর, আপু শুধু আঃ আহঃ উহঃ উহঃ করে শব্দ করছে আর বলছে ভাই আরো জোরে দে আরো জোড়ে জোড়ে চোদ চুদে আজ তোর এই বোনকে শান্তি দে। আমি বললেম, খানকি মাগী কোথাকার ভাইয়ের চোদা খাওয়ার খুব শখ না আজ দেখবো তুই কত চোদা খেতে পারিস। আপুতো আমার মুখের গালি শুনে হতভম্ব, এই তুই এইসব কি বলছিস? আমি ওই চুতমারানি কি বলছি মানে তুই খানকিরে গালি দিচ্ছি আর কি তা তুই বুঝতে পারছিস না। আজ তোকে এমন চোদা চুদবো তোর ভাইয়ের কাছ থেকে চোদা খাওয়ার শখ তোর মিটে যাবে। আমি সমান তালে তাকে ঠাপিয়ে যাচ্ছিলাম আর গালি দিচ্ছিলাম আর দুই হাত দিয়ে খানকির দুধ দুইটাকে দলাই মলাই করে ময়দা মাখা করছিলাম। আপু আমার কান্ড দেখেতো হতবাক। প্রায় ৩০ মিনিটের মত ঠাপিয়ে তাকে বললাম এবার উঠে হাত পায়ে ভর দিয়ে কুকুরের মতো হও, আমি তোমাকে কুত্তাচোদা করব এখন। আপু কিছু না বলে উঠে ডগি স্টাইল নিল, আমি প্রথমে পেছন থেকে তার গুদটা আবারও একটু চুষে দিয়ে আমার বাড়াটা ভরে দিলাম আপুর গুদের ভিতর, ঢুকিয়ে ঠাপানো শুরু করি, আপু এবার আস্তে আস্তে পেছন দিকে ধাক্কা মারছিল যার ফলে বাড়াটা একেবারে তার গর্ভাশয়ে গিয়ে ঠেকছিল। আমি ঠাপ মারছিলাম আর আপুর ঝুলে থাকা ডাসা ডাসা দুধ দুইটা টিপছিলাম, অনেকক্ষণ ঠাপানোর পর আপুকে বললাম আমার এখন বের হবে কি করব ভিতরে ফেলবো নাকি বাইরে? আপু বলল ভিতরে ফেল। আমি অবাক হয়ে জিগ্গেস করলাম যদি প্রেগনান্ট হয়ে যাও তখন কি হয়ে আপু বললো কিছু হবে না তোর দুলাভাইয়ের বলে চালিয়ে দেব আর আমি চাই না আমার ভাইয়ের প্রথম বীর্য বৃথা যাক, আমি তোর সন্তান গর্ভে ধারণ করে তাকে জন্ম দেব। আমিতো নিজের কানকে বিসসাস করাতে পারছিলাম না আপুর মুখে এমন কথা শুনে (বন্ধুরা তোমরাও হয়ত এটাকে বানিয়ে বলা মনে করতে পারো কিন্তু এটা একদম সত্যি ঘটনা প্রথম চোদনেই আপু আমাকে এই কথাটা বলেছিল)। যাই হোক, তার কথা শুনে আমি তাকে বললাম তুমি কি সিরিয়াসলি বলছো? হাঁ, আমি সব জেনেশুনে বলছি তুই কিছু চিন্তা করিসনা আমি ম্যানেজ করে নেব। আমিতো অনেক খুশি এই ভাবে যে আমার প্রথম চোদনের ফল আমি পাবো, বলে আপুকে পিছন থেকে জড়িয়ে ধরে কয়েকটা রাম ঠাপ দিয়ে আমার বাড়াটা একেবার আপুর গুদের গভীরে ঠেসে ধরে আপুরে আ মা র বের হচ্ছে বলে হড় হড় করে সব গরম বীর্য আপুর গুদে ঢেলে দিলাম। কয়েক মিনিট ওই অবস্থায় থেকে বীর্যের শেষবিন্দু শেষ হওয়া পর্যন্ত আমার বাড়াটা আপুর গুদে ঢুকিয়ে রাখলাম, যখন বুঝতে পারলাম বাড়াটা নিস্তেজ হয়ে আসছে তখন আপু শুইয়ে দিয়ে আমি তার উপর শুয়ে পরলাম। bhai boner chodar golpo আপু আমার মাথায় হাত বোলাতে বোলাতে বললো, বললে বিশ্বাস করবি না আজ এই প্রথম চোদা খেয়ে আমার ভালো লাগলো। আমি বললাম তাই নাকি আপু? আপু বললো, তোর দুলাভাই কোনদিন এত সুখ দিতে পারেনি যা তুই আজ আমাকে দিলি। আমি আপুকে বললাম আচ্ছা আপু তুমি যদি সত্যি সত্যি গর্ভবতী হয়ে যাও তখন কি হবে? (বন্ধুরা, আপু সত্যি সত্যি আমার বীর্যে গর্ভবতী হলো আর একটা কন্যা সন্তানের জন্ম দেয় যার বর্তমান বয়স ১০ বছর) বললামতো ওটা নিয়ে তোকে ভাবতে হবেনা, আপু জবাব দিল। আমি শুয়ে শুয়ে আপুর দুধগুলো চুষতে চুষতে বললাম আপু তুমি কতো ভালো, আমার লক্ষী আপু বলে একটা দুধের বোটায় হালকা করে কামর দেই। আপু উহঃ করে উঠে বলে ওই দুষ্ট কি করছিস বেথা পাই না বুঝি। আমি বললাম সরি আপু আর করব না বলে আপুর ঠোঁট চুষতে থাকি। ওই রাতে আমি আরো ২ বার আপুকে চুদে একবার তার গুদে আরেকবার তার মুখে বীর্যপাত করলাম যা সে খেয়ে ফেলে। bhai boner chodar golpo পরদিন সকালে ফ্রেশ হয়ে হোটেল ছেড়ে দিয়ে আমরা নাস্তা করে হালকা মার্কেটিং করে ৯ টার দিকে আবার হসপিটালে যাই, ডাক্তার বলে চিন্তার কোন কিছু নাই রিপোর্ট নরমাল তবে যে ওষুধগুলো দিয়েছি তা চালিয়ে যান আর ১ মাস পর এসে আরেকবার চেকআপ করে নিবেন। আমরা ডাক্তার থেকে বিদায় নিয়ে বাড়ির দিকে রওয়ানা দেই। আর ওই দিনের পর থেকে এভাবেই আমাদের ভাই-বোনের সম্পর্ক চলতে থাকে যা আজ পর্যন্ত চলছে।
  13. banglachotikahini এইচএসসি পরীক্ষা শেষ হয়ে গেছে৷ তবুও যেন ভালবাসার মানুষটিকে খুজে পাচ্ছি না৷ মনের ভিতর শুধু অশান্ত জ্বালা বৈরি মনোভাব কোন কাজে যেন মন বসে না৷ অনেক মেয়েকে পছন্দ করি৷ কিন্তু প্রস্তাব দিতে পারি না৷ জীবনে কি প্রেম ভালবাসা আসবে না? যদিও বা কখনো আসে কিভাবে আমি তাকে গ্রহণ করব৷ এই সব কল্পনা মনে ভিতরে ঘুরপাক খেতে থাকে৷ তবু যেন মেলে না ভালবাসা নামক নামটির সাথে৷ যাই হোক আমার বাসা থেকে আমার মামার বাড়ী বেশি দূর নয়৷ 3 কিমি পথ যেতে হয়৷ ছোটবেলা থেকে মামার বাড়ি যাওয়ার আকাঙ্খা বেশি৷ শৈশবে সেখানে অনেকটা সময় কাটিয়েছি৷ সেখানে খেলাধূলা করেছি অনেক বন্ধুদের সাথে৷ বাংলা চটি কাহিনি মামার তখনো বিয়ে করেননি৷ তবে দূর সম্পর্কের এক মামা ছিলেন৷ উনার একটি মাত্র মেয়ে শায়লা৷ শায়লা দেখতে ফর্সা, শরীরটা অনেক পাতলা৷ সাইজ ২৮-২৪-২৯ হবে৷ তবু যেন তাকে খুব পছন্দ হলো৷ মামাতো বোন হিসেবে তাকে প্রস্তাব দিলে হয়তো মেনে নিতে পারে৷ নিজের সাহস না থাকায় আমি আমার খালাতো ভাই রবিকে দিয়ে একটা প্রস্তাব দিই৷ সে রাজি হয়নি শুনে মনটা খুব খারাপ হয়ে গেল৷ তাহলে আমাকে কেউ পছন্দ করে না৷ যাই হোক এইভাবে প্রায়ই তাকে খালাতো ভাই আমার গুনকীর্তন গাইতে থাকে তবু তার মন গলে না৷ প্রায় এক বছর পর আমার ছোট মামার বিয়ে দিন পড়ে যায়৷ বিয়েতে অনেককে নিমন্ত্রণ জানানো হয়৷ বাংলা চটি কাহিনি গায়ে হলুদ থেকে বিয়ে পর্যন্ত নিজের পরিবারের মধ্যে অনেক আনন্দ, ঠাট্টা, মজা হতে লাগল৷ মেয়ে পরে গায়ে হলুদের দিন আমরা সবাই যখন একজায়গায় উপস্থিত তখন শায়লার সাথে আমার চোখাচোখি হতে লাগল৷ এক পর্যায় শায়লা আমাকে জিজ্ঞেস করল কি ব্যাপার তুই আমার সাথে কথা বলছিস না কেন৷ আমার উপর তোর অনেক রাগ হয়েছে নাকি৷ আমি বললাম আমার আবার রাগ আছে নাকি৷ যাদের রাগ আছে তারা অনেক দূরে দূরে থাকে৷ আমি তো কারোর আপন হতে পারলাম না৷ সন্ধ্যা হয়ে আসছে৷ গায়ে হলুদের অনুষ্ঠান শেষ৷ অনুষ্ঠান শেষে আবার মামার বাড়ির দিকে রওনা শুরু করলাম৷ হঠাত্* মাইক্রোবাস নষ্ট হয়ে যাওয়ার কারনে আমরা পাবলিক বাসে উঠে পড়লাম৷ অন্যান্য সবাই যার যার আসন ঠিক করে বসে পড়ল৷ বাংলা চটি কাহিনি আমিও বসে পড়লাম৷ আমার সামনের ছিটে শায়লা বসল৷ শায়লার আমার সামনে বসাতে আমার খুব ভাল লাগল৷ তার সাথে দুই একটা কথা বলতে বলতে যাওয়া যাবে৷ আমাদের ছিটটা জানালার পাশে থাকায় ছিটের ফাঁকা অংশ দিয়ে তার সাথে কথা বলতে থাকি৷ হঠাত্* সে আমার হাতখানি ধরতে চাইল৷ পাবলিক বাসে এটা কিভাবে সম্ভব? ভেবেচিন্তে কাজ করতে হবে৷ আমার পাশে ক্যামেরাম্যান বসা ছিল৷ ক্যামেরাম্যান বয়সে তরুন হলেও আমার চোখের ভাষা তাকে আকৃষ্ট করল৷ সে তখন বুঝতে পারল আমার চোখের ভাষা৷ আমার পরিবারের অন্যান্যদের সে তার হাত দিয়ে আড়াল করে রাখল৷ যাতে করে কেউ কিছু না বুঝতে পারে৷ আমিও সুযোগটা কাজে লাগাতে শুরু করে দিলাম৷ আমার হাতটি ছিটের ভিতর দিয়ে তার কাছে দিলাম৷ প্রথমে সে আমার হাতে জোরে চিমটি দিতে লাগল৷ সাময়িক ব্যথাটা যেন মধুর মনে হতে লাগল৷ মাঝে মাঝে আমিও তাকে চিমটি দিতে লাগলাম৷ হঠাত্* সে আমার হাতটি তার কোমরের কাছে নিয়ে ছেড়ে দিল৷ বাংলা চটি কাহিনি বাংলা চটি কাহিনি ২০২১ সে কি চাইছে বুঝতে পেরে আমি তার কোমরে আমার হাতটি বুলাতে শুরু করলাম৷ প্রথম মেয়ে মানুষের স্পর্শ মুহুর্তের মধ্যে আমাকে উন্মাদনা, কামনা, যৌন উত্তেজনা সারা শরীরে ছড়িয়ে গেল৷ কোমর বুলাতে বুলাতে আমি উপরের দিকে আমার হাতটি নিয়ে তার ব্লাউজের উপর দিয়ে তার দুধে স্পর্শ করলাম৷ আমার সারা শরীর যেন গরম হয়ে গেছে মুহুর্তের মধ্যে৷ পাশের ক্যামেরাম্যান মাঝে মাঝে আমাকে ফলো করছে এটা আমি বুঝতে পারছি৷ কিন্তু ঐ মুহুর্তে আমারও কিছু করার ছিল না৷ ঘন্টা দুই পথ অতিক্রম করে আমরা আমাদের গন্তব্যে পৌছে গেলাম৷ কিন্তু ঘন্টা দুই ভ্রমন পথটা আমার কাছে বেশি মনে হলো না৷ আমি তাকে আরো বেশি সময়ের জন্য পেতে চাই৷ কিন্তু তাকে একা একা পাওয়া সম্ভব হচ্ছে না৷ কারন বাসার মানুষ সব জায়গায় ছড়িয়ে ছিটে আছে৷ ভ্রমনক্লান্তি দূর করার জন্য যার যার ঘুমানোর জায়গা ঠিক করে নিচ্ছে আগে আগে৷ বাংলা চটি কাহিনি কারণ দেরিতে ঘুমাতে গেলে তার জায়গাটি অন্য কেউ দখল করে নিতে পারে বলে৷ আমরা কাজিনরা মিলে ঠিক করলাম সারারাত তাস খেলে কাটিয়ে দিব৷ আমার খালাতো ভাই ছিল ৬ জন৷ চারজন বসে যাওয়ায় আমি ও আমার খালাতো ভাই ছাদে গিয়ে বসে গল্প করতে লাগলাম সারাদিন আমি কি করছি৷ তখন খালাতো রবিকে বললাম ভাই তুমি যেভাবে পার শায়লাকে তুমি ছাদে আনার ব্যবস্থা কর৷ রবি অবশ্যই সবার সাথে খোলামেলা কথা বলত বলে কেউ তাকে কিছু মনে করত না৷ প্রায় আধা ঘন্টা যাওয়ার পর সে বুঝিয়ে শায়লাকে এনে আমার কাছে দিয়ে চলে গেল৷ ছাদে আমি ও শায়লা ছাড়া আর কেউ রইল না৷ এত বড় ছাদে খোলা আকাশের নিচে আমাদের খুবই ভাল লাগছে৷ দিগন্তের দিকে তাকিয়ে তাকে পাশে বসিয়ে আমার মনের ভিতরের ভালবাসার কথা বলতে লাগলাম৷ দুজনের গভীর ভালবাসা তখন যেন উপড়ে উপড়ে পড়তে লাগল৷ বাংলা চটি কাহিনি তার কোলে মাথা দিয়ে আকাশের দিকে তাকিয়ে মাঝে মাঝে তাকে চুমু দিতে লাগলাম৷ খুবই উপভোগ করতে লাগলাম৷ একপর্যায়ে আমি বেশি উত্তেজনায় তাকে জড়িয়ে ধরে চুমু খাওয়াতে আমার শরীরের উত্তেজনা যেন শেষ হয়ে গেল৷ মনে হল তরল জাতীয় পদার্থ আমার জাঙ্গিয়ার ভিতর দিয়ে প্যান্টের নিচ দিয়ে বের হয়ে গেছে৷ কারণ সন্ধ্যায় বাস ভ্রমনের সময়কার উত্তেজনা তখনও লেগে ছিল সারাটা শরীর৷ আবার আমরা গল্প শুরু করে দিলাম৷ তাকে বিভিন্ন প্রস্তাব দিতে লাগলাম৷ রাজি হলো না৷ অনেক জোর করে বললাম তোকে আমি এখন করতে চাই৷ কোনভাবে তাকে রাজি করাতে পারলাম না৷ গ্রামের মানুষ সহজে ধরা দেয় না৷ এইভাবে গল্প করতে লাগলাম৷ কিন্তু আমাদের গল্পটা দীর্ঘস্থায় করতে পারলাম না৷ হঠাত্* বিজলি বাতির সমস্যা হওয়ার কারণে ইলেকট্রেশিয়ান মেরামতের জন্য উপরে চলে আসে৷ আমরা স্থান পরিবর্তন করে চলে গেলাম৷ বাংলা চটি কাহিনি যাই হোক ঐ দিনটা আমাদের জন্য নিরাপদ ছিল৷ পরের দিনের সুযোগের আসায় অপেক্ষায় রইলাম৷পরের দিনও একই ভাবে কাটালাম কিন্তু মনের যে বাসনা আকাঙ্খা সেটা যেন মিলছে না৷ কেন জানি কিসের একটা অভাব বোধ করছি কিন্তু মেলাতে পারছি না কোন ভাবে৷ এই ভাবে মনের গভীর অনেক যন্ত্রনা নিয়ে শেষ হলো বিয়ের অনুষ্ঠান৷ বিয়ে শেষে সবাই যার যার বাসায় ফিরে গেছে৷ কিন্তু আমার মনের বাসনাকে আমি কোন ভাবে ফিরে যেতে দিতে পারছি না৷এই ভাবে দুইটা বছর চলে গেছে৷ এখন আমি অনার্স ২য় বর্ষ পড়ি৷ শায়লা এইচ এস সি পাশ করে শহরে এক সরকারি মহিলা কলেজে ভর্তি হলো৷ শহরে অবশ্য একে অপরের সাথে চলাফেরা করলে কেউ কিছু মনে করে না৷ তাই আমরা দুজনে প্রায় পার্কে বসে গল্প করতাম মাঝে মাঝে চুমু খেতাম৷ বাংলা চটি কাহিনি মাঝে মাঝে তাকে সেই পুরানো প্রস্তাব দিয়ে আমার বাসায় আসতে বলতাম৷ কিন্তু কোনভাবে শায়লা রাজি হয় না৷ সে শুধু আমাকে বিয়ের প্রস্তাব দেয়৷ আগে বিয়ে করো তারপর আমার সব কিছু তোমার জন্য৷ একপর্যায় আমি তার কাছ থেকে চার বছর সময় নিলাম৷ এই ভাবে আমাদের জীবনটা যেতে লাগল৷ একদিন বাসায় বসে বই পড়ছি৷ ৩টা বাজে বৈশাখ মাস৷ আকাশ অনেক মেঘলা৷ মনে হলো ঝড় আসবে৷ বই পড়তে পড়তে হঠাত্* শায়লার কথা মনে পড়ল৷ এই সময়টা দুজনে এক সাথে যদি থাকতে পারতাম৷ তবে খুব মজা হতো৷ কিন্তু শায়লা তো নিজেকে কখনো আমার কাছে খোলামেলা মিলামিশা করতে চায়নি৷ আমি তাকে প্রস্তাব দিতাম৷ শায়লা আমাকে এখনো আপন করে ভাবতে পারল না৷ এই কথা ভাবতে ভাবতে হঠাত্* কলিং বেলের শব্দ শুনতে পেলাম৷ উঠে গিয়ে দরজা খুলে দেখি শায়লা৷ যেন মেঘ না চাইতে বৃষ্টি৷ বাসায় আমি ছাড়া আর কেউ নাই৷ বাংলা চটি কাহিনি একা শায়লাকে পেয়ে খুব ভাল লাগছে৷ যা পাঠকদের বলে বোঝাতে পারব না৷ শায়লাকে জিজ্ঞাসা করলাম, কি ব্যাপার এই সময় তুমি আমার বাসায়৷ সে বলল আমিতো গ্রামের বাড়িতে যাচ্ছি, আকাশে মেঘ দেখে চিন্তা করলাম তোমার বাসা থেকে একটা চক্কর দিয়ে যাই তুমি কি করছ৷ এসেছো যখন, বসো৷ বাসায় মা বাবা কেউ নাই সবাই বেড়াতে বাইরে গেছে৷ ফিরতে রাত হবে৷ তুমি বসো তোমার জন্য চা এনে দিই৷ চা খেয়ে আকাশ পরিস্কার হলে চলে যেও৷চা এনে তাকে দিলাম৷ আমিও এককাপ নিয়ে দুজনে চুটিয়ে গল্প শুরু করে দিলাম৷ হঠাত্* আকাশ যেন অন্ধকার হয়ে আসল৷ মনে হয় এখনই ঝড় চলে আসবে৷ হঠাত্* বজ্রপাতের আওয়াজে চমকে উঠলাম৷ শায়লা ভয়ে আমার কাছে চলে এসে আমার পাশে বসল৷ আমি তার হাতটি ধরে বললাম৷ চল আমার রুমে নতুন একটা রোমান্টিক বাংলা সিনেমা আনছি৷ দুজনে মিলে দেখি৷ bangla choti kahini অবশ্য আমরা দুজনে বাংলা সিনেমার অনেক ভক্ত ছিলাম৷আমরা রুমে চলে গিয়ে ডিভিডি টা চালু করে সিনেমা দেখা শুরু করলাম৷ শায়লার অনুষ্ঠান ব্যতিত সব সময় বোরকা পরে থাকত৷ শায়লা বোরকাটা খুলে আমার বেডের উপর রাখল৷ মেরুন কালারের জামা, কাল রংয়ের পাজামা পরা ছিল৷ কানের দুল, হাতে ছিল বিভিন্ন কালারের রেশমি চুড়ি, কপালে খয়েরী টিপ৷ যা এই পরিবেশে ছিল অনেক মানান সই৷ বাইরে দমকা হাওয়া সহ বৃষ্টি শুরু হয়েছে৷ আবহাওয়াটা বেশ ঠান্ডা হয়ে আসছে৷ আমি আস্তে আস্তে তার পাশে গিয়ে বসলাম৷ তার হাতটি ধরে আমার বুকের মাঝে এনে জড়িয়ে ধরলাম৷ আমি তাকে মৃদু আদর দিতে লাগলাম৷ তাকে চুমু খেতে লাগলাম৷ তার শরীর যেন কাটা দিয়ে উঠছে৷ শরীরের পশম যেন উচু উচু হয়ে আছে৷ আমি আমার ঠোট দিয়ে কপালে কানের নরম অংশটা দিয়ে আদর করতে থাকলাম৷ আমার হাত দিয়ে তার দুধ দুটো টিপতে লাগলাম তার জামার উপর দিয়ে৷ দুধের সাইজ ছোট হওয়ায় আমার হাতের মুঠোর মধ্যে রেখে চাপতে থাকি জোরে জোরে৷ bangla choti kahini সে ব্যথায় কাতরাতে থাকে৷ আমি তার জামাটা খোলার চেষ্টা করি কিন্তু জামাটা খুলতে সে রাজি না বুঝে আমি আরো তাকে জোরে জোরে তার দুধটা চাপতে থাকি৷ ঠোটে ঠোট লাগিয়ে চুষতে থাকি৷ তার পাজামার উপর দিয়ে আমার হাতটা তার যোনির উপর দিয়ে বোলাতে থাকি৷ বোলাতে বোলাতে মনে হলো তার যোনির উপর অংশটা ফুলে উচু হয়ে আছে৷ আমার হাতের মুঠো দিয়ে যোনির উপর চাপতে থাকি৷ আস্তে আস্তে পাজামার উপর দিয়ে ভিতরে যোনির আশে পাশে বোলাতে থাকি৷ এই প্রথম তাকে যোনির উপর হাত দিলাম৷ দেখলাম ও কিছু বলছে না৷ আমি তার যোনির ভিতর আঙ্গুল ঢুকিয়ে দিলাম৷ যোনিটা অনেক গরম হয়ে আছে৷ আঙ্গুল দেওয়ার সাথে পচ পচ শব্দ হতে লাগল৷ ভাবলাম তার জল এসে গেছে৷ এইভাবে আঙ্গুল দিয়ে উঠানামা করতে করতে আমি তাকে বললাম তোমার জামাটা আমি খুলে দিই৷ সে আর কিছু বলল না দেখে আমি নিজে তার জামাটা খুলে দিলাম৷ সে কিছু আর বলল না৷ পরনে ব্রাটা ছিল খয়েরীর রঙের৷ আমি তার পিছনে গিয়ে তার পিটে চুমু খেতে লাগি৷ আস্তে আস্তে ব্রা পরা ব্যতিত তার খালি শরীর টুকু শুধু জিহবা দিয়ে চাটতে লাগলাম৷ তার শরীর মৃদু গন্ধে যেন আমাকে পাগল করে দিতে লাগল৷ আমি ব্রাটা খুলে ফেললাম৷ bangla choti kahini আজ আমি প্রথম তার শরীর টা দেখতে পেলাম৷ তার দুই দুধের মাঝে ছোট একটা কালো রঙের তিল আছে৷ যা ছোট ছোট দুধ দুইটা আকষর্ণীয় করে তুলেছে৷ ওদিকে বৃষ্টি যেন আরো জোরে শুরু হওয়ায় আশে পাশের জনতার কোন আওয়াজ যেন আমাদের কানে পৌঁছাচ্ছে না৷ দুধের নিপিলটা খয়েরী বর্ণের৷ আমি আমার ঠোট দিয়ে তার খয়েরী নিপিলটা চুষতে লাগলাম৷ তার কোন শব্দ নাই৷ সে শুধু আমার আদর উপভোগ করে যাচ্ছে৷ শায়লাকে নিয়ে এবার আমার বেডে শুয়ালাম৷ তার বুকের উপর শুয়ে তার ঠোট, গলায় চুমু খেতে লাগলাম৷ এবার আমি তার পায়জামার রশির গিট খোলার চেষ্টা করলাম৷ সে প্রথমে আমার হাতটা চেপে ধরল৷ পরে অবশ্য নিজে সাহায্যে করল তার পাজামাটা খোলার জন্য৷ পাজামা সে খুলে ফেলল৷ মহুর্তের মধ্যে সে পুরো নগ্ন হয়ে আছে আমার সামনে৷ তার পা দুটো ছিল অনেক মসৃন৷ ভোদাটা ছিল ফোলা ফোলা৷ আমি পা দুটো আমার ঠোট দিয়ে আদর করতে লাগলাম৷ আস্তে আস্তে তার যোনির উপর আমার মুখ দিয়ে চুমু খেলাম৷ এদিকে আমার বাড়াটা যেন শুধু লাফাচ্ছে৷ আমি তার হাত দিয়ে আমার বাড়াটা ধরতে বললাম ৷ সে আমার বাড়াটা ধরে নাড়তে লাগল৷ এদিকে আমি তার যোনির মুখে জিহবা দিয়ে চুষতে লাগলাম৷ সে আ: উ: শব্দ শুরু করে দিয়েছে শুনে আমার বাড়াটা যেন আরো উত্তেজনা বেড়ে গেল৷ bangla choti kahini আমি তার ভোদার মধ্যে জারে জোরে আঙ্গুলী করতে লাগলাম৷ তখন শায়লা বলল আমি আর পারছি না৷ তুমি আমার সব কেড়ে নাও৷ আজ আমি তোমাকে আমার শরীরের সব কিছু তোমাকে দিয়ে দিলাম৷ আমি তার দু পা ফাঁক করে তার যোনির উপর আমার বাড়াটা বোলাতে লাগলাম৷ সে নিজে তার হাত দিয়ে আমার বাড়াটা তার যোনির মধ্যে ঢুকাতে সাহায্যে করল৷ আমি আস্তে আস্তে আমার বাড়াটা তার ভিতরে ঢুকানোর চেষ্টা করলাম৷ কিন্তু বেশ কষ্ট হচ্ছিল৷ অনেকন চেষ্টা করার পর আমার বাড়াটা তার যোনির ভিতর ঢুকলো৷ ঢুকার সাথে গেলাম গো মাগো আ: উ: শব্দ শুরু করে দিল৷ এভাবে আমি তাকে ঠাপাতে লাগলাম৷ মাঝে মাঝে তার ঠোটে ও দুধে চুমু খেতে লাগলাম৷ আমি আমার স্টাইলটা পরিবর্তন করলাম৷ তার পা দুটো আমার কাঁধের উপর রেখে তার বুকের দিকে ঝুকে থাকলাম৷ ঝুকে থাকার দরুন তার যোনিট সোজা হয়ে উচু হয়ে আছে৷ আমি আমার বাড়াটা আবার ঢুকালাম৷ তার যোনিটা অনেকটা পিচ্ছিল থাকায় এবার সহজে আমার বাড়াটা তার যোনির মধ্যে ঢুকে গেছে৷ আমি আমার জীবনে প্রথম শায়লাকে চুদতে পারায় ঐ সময়টা আমার মনে হচ্ছে আমি যেন অন্য জগতে আছি৷ এই ভাবে আমি যদি তাকে ঘন্টার ঘন্টা ঠাপাতে থাকি, তাহলে আমার মত সুখী মানুষ আর কেউ নেই৷ এইভাবে গুদের ভিতর উঠা নামা করতে করতে এক পর্যায় শায়লা আমাকে বলল আরো জোরে দেও সোনা৷ কেন আগে তুমি এভাবে আমাকে আদর করো নাই৷ bangla choti kahini এভাবে বলতে বলতে এক পর্যায় সে তার জল খসিয়ে দিল৷ কিছুণ পর তীরের বেগে যেন আমার শরীর থেকে কি যেন বের হয়ে আমার সারা শরীরের উত্তেজনা যেন ঠান্ডা হয়ে গেল৷ তখন বুঝলাম আমার মালটা যেন বের হয়ে গেছে৷ আমি তার শরীরের উপর শুয়ে পড়লাম৷ দুজনে এভাবে কিছু সময় থাকার পর উঠে পড়লাম৷ তখন বাইরের বৃষ্টি যেন থেমে গেছে৷ সন্ধ্যা হয়ে আসছে৷ শায়লা আবার গ্রামের বাড়িতে যাবে৷ তাই তাড়াহুড়ো লাগিয়ে দিল চলে যাওয়ার জন্য৷ আমার তাকে ছাড়তে মনে চাচ্ছিল না৷ তারপর তাকে নিয়ে বাসে উঠায়ে দিলাম৷ সে চলে গেল৷ অবশ্য এই ঝড়ের দিনে তাকে পেয়ে আমার জীবনের পূর্ণতা অর্জন করতে পেরেছি৷
  14. বাংলা নতুন চটি গল্প আয়েশা আমার খুব ভাল বন্ধু্ বলতে গেলে একজন আরেকজন ছাড়া অচল কিন্তু আমরা প্রেম করি না আবার বন্ধুর চাইতে বেশিও মনে হয় আমাদের নিজের কাছেও। যাই হোক মফ স্বল শহর তাই আড্ডা মারার যায়গাও কম। একটা পার্ক আছে কিন্তু অপরিস্কার ও গাছগাছড়ায় ভর্তি বসার তেমন একটা যায়গায় নেই।একদিন অতিরিক্ত বৃষ্টির কারনে কলেজে কোন ক্লাশ হলো না।বর্ষা কাল আর সকাল হতেই বৃষ্টি, তাই ছাতা নিয়েই বের হয়েছিলাম।বাসায় ফিরব তখন আয়েশার সাথে দেখা। ওত আমাকে দেখে সেই খুশি।ওবলল এত তাড়াতাড়ি বাসায় গিয়ে কি করবি। তার চেয়ে বরং চল বৃষ্টিতে হাটা হাটি করি। এক ছাতা দুইজন মানুষ তার মাঝে একজন আবার নারী অনেক রোমান্টিক লাগবে, তাই না? আমি বল্লাম হা লাগবে। পাল্টা প্রশ্ন করে বল্লাম কোন দিকে যাবি? বাংলা নতুন চটি গল্প আমি: পার্কের দিকে যাওয়া যায়, এই ব্যস্ত রাস্তায় হাটা যাবে না রিক্সার কাদা লাগবে। আয়েশা: বৃষ্টিতে পার্কে কি করবি? আমি: পার্কের ভিতরের রাস্তায় হাটবো। সকাল বেলা দৌড়ানোর জন্য পুরো পার্ক জুড়ে একটা রাস্তা আছে, এইত সেদিন করা হয়েছে। ইদানিং কিছু জায়গা পরিস্কার করে বসার ব্রেঞ্চও দেওয়া হয়েছে। ৩৫ মিনিট হাটার পর পার্কে পৌছালাম। আগের চাইতে বৃষ্টি কিছুটা কমে এসেছে কিন্তু ছাতা ছাড়া বের হওয়ার মত অবস্থা নাই আর সময়টাও অসময় এজন্য পার্ক একদম ফাঁকা। আয়েশা: কবির, আমায় কিস কর? বাংলা নতুন চটি গল্প আমি: আজ আবার কি হল তর? আয়েশা: যা বলছি কর, তাড়া তাড়ি কর। আমি: না বাবা সেদিনের মত আবার ধোকা দিব। আয়েশা: আজ দিব না, সত্যি সত্যি কিস করতে দিব। সেদিন ওর বাসায় গিয়েছিলাম নোট দিতে, ওর রুমে বসেই কথা বলছিলাম। হঠাৎ করেই বলে যে আমায় কিস কর আমি জানি ও মজা করতেছে তাই দিচ্ছিলাম না। দেখি যে ও জোড় দিয়েই বলছে অগ্যত বাধ্য হয়ে যখন ওকে কিস করলাম ও ওর বড় বোন তানিজা কে ডেকে আনলো বললো দেখেছিস আপু কবির সুযোগ পেয়ে আমার ঠোটের কি করেছে। বাংলা নতুন চটি গল্প খালা আমাকে দিয়ে তার গুদ চোদালো Khala Ke Chodar Golpo আমিত থতমত খেয়ে বসে রইলাম। সেই সময় মনে হচ্ছিল যে পায়ের নিচে মাটি নেই। কারণ ওটাই আমার প্রথম কোন নারীকে চুম্বন করা। আয়েশা কিছুক্ষণ পরে শিকার করেছিল যে ওটা ওদের প্ল্যান ছিল। আজ তাই কিছুক্ষণ ওর মুখের দিকে তাকিয়ে রইলাম বুঝার জন্যে আসলে কি চাইছে। কারণ ওরমত পাজি দ্বিতীয় কোন মেয়ে দেখি নাই। আমি বললাম আজ আবার বাসায় যেয়ে তোর বোন কে বলবিনা তো যে আজও আমার ঠোটের মধু খাইছে। ও বলল না আমি সিরিয়াস তুই দে। বাংলা নতুন চটি গল্প আমার অবস্থা তখন বারটা বেজে গেছে। সত্যি বলতে ও ইদানিং আগের চাইতে বেশি সেক্সি হয়েছে। ওর দুধ, পাছা সবই দেখার মত। যেহেতু ভাল বন্ধু তাইতে দেখতে ছাড়ি না তবে কখনো বাড়াবাড়ি করি নাই। আমি ওকে বললাম- এখান থেকে রাস্তার মানুষ দেখা যায়, চল পাম গাছের আড়ালে দাঁড়ায়। আমার সাথে সাথে ও এসে পাম গাছের আড়ালে দাঁড়াল। আমি: আয়েশা, দেখ তুই এমনিতে অনেক সেক্সি। দেখলেই ইদানিং মাথা ঘুরে। তার মাঝে যদি এমন করস তবে আমার কিন্তু ভুল করার সম্ভাবনা বেশি। আয়েশা: ভুল কর, তোকে মানা করছে কে। আমি: দেখ সব বিষয়ে মঝা করবি না। আয়েশা: আমার কাল থেকেই অবস্থা খারাপ, কারণ কালকে আপু তার বয়ফ্রেন্ড নিয়ে বাসায় আসছিল আর আমি জানতাম না বিষয়টা। কলেজ থেকে যাবার পর কি দরকারে যেন ওর রুমে উকি দিতে গেছি দেখি আপু তার ফ্রেন্ডকে করতেছে। ওরা বুঝে ওঠার আগেই আমি আমার রুমে এসে পড়ি। আমি: তোর মা জানে ব্যাপারটা? বাংলা নতুন চটি গল্প আয়েশা: মা জানলেই কি বা না জানলেই কি। সে তো বিছানা ছেড়ে উঠতে পারে না। আপু ইদানিং ঘন ঘন ওকে নিয়া আসে বাসায়। ভাইয়া ছুটি আসলে আনে না। আমি: যদি কিস করতে গিয়ে আরো কিছু করতে ইচ্ছা করে তখন কি করবি? আয়েশা: দেখ আজ বৃষ্টির মাঝে বের হইছি শুধু এই কারনে যদি তুই আমায় শান্ত না করিস আমি অন্য কিছু করব। আমি: রাগ করিস না, দেখি কতটুকু পারি। ওর হাতে ছাতাটা দিয়ে আমার বুকের সাথে জড়িয়ে ধরে রেখে কিস করলাম ওকে। ইংলিশ মুভি দেখার বদৌলতে এটা শেখা হয়েছে। ওর বাড়ন্ত দুধ গুলো আমার বুকের সাথে লেপটে রইল। প্রায় বিশ মিনিট ওকে এরকম ভাবে ধরে ছিলাম আর কিস করছিলাম। পরে হঠাৎ খেয়াল হল বৃষ্টি শেষ হয়ে গেছে যে কোন মুহুর্তে মানুষ আসতে পারে। আয়েশা আমার দিকে তাকিয়ে বলল আমার বাসায় যাবি? আমি: এখন? বাংলা নতুন চটি গল্প আয়েশা: হ্যাঁ এখনি। আমার হার্ট বিট অনেক বেশি হয়েছে গেছে থামাতে হবে, প্লিজ চল। আমি সব ব্যবস্থা করব। আপুর রুম থেকে আজ সকালে কনডম চুরি করে নিয়ে রেখেছি। আমি: আরো একবার ভেবে দেখ আয়েশা, তুই কিন্তু আমার খুব ভাল বন্ধু আমি তোকে হারাতে চাইনা। আয়েশা: আমার তরফ থেকে এই নিয়ে কোন সমস্যা কোন দিন হবেও না আর যদি তোর হয় তো আমায় বল। আমি: দেখ আমি তরজন্য সব করতে রাজি, কেন জানস? আমি চায় না কোন ভুল বুঝাবুঝিতে সম্পর্কের নষ্ট হোক। এতে তুই যদি ইজি ফিল করিস তবে আমার কোন সমস্যা নাই। আয়েশা: এখনত ইজি ফিল করতাছি, তাই না করিস না চল বাসায় যায়। বাংলা নতুন চটি গল্প পার্ক থেকে বের হয়ে রাস্তায় দাঁড়ানোর সাথে সাথে রিক্সা পেলাম। ওদের বাসায় এসে দেখি ওর আপু ড্রয়িং রুমে বসে টিভি দেখছে। আমাকে দেখে জিজ্ঞাস করলো কেমন আছ কবির আমি উত্তর দিয়ে আয়েশার সাথে রুমে গেলাম। কাজের মহিলা দু’বেলা আসে সকালে আর বিকালে। তাই দুপুর টাইমটায় বাসায় ওর বোন আর প্যারালাইস্ড মা ছাড়া কেও থাকে না। আয়েশা রুমে এসে দরজা চাপিয়ে দিল। বন্ধ করার প্রয়োজন নাই কারণ নক না করে ওর আপু ডুকবে না। রুমে ঢুকেই আমার সামনেই আয়েশা কাপড় চেইঞ্জ করা শুরু করল। টাউজার আর টি শার্টে আর সেক্সি লাগছি। আয়েশা এমনিতেই অনেক সুন্দরী। স্কুল থেকেই ও আমার বন্ধু। স্কুলে থাকতে ওকে প্রেমিকা হিসেবে পাওয়ার স্বপ্ন দেখতাম। পরে ওর আচরনে কখন যে সেই ইচ্ছা চলে গেছে মনে নেই। আয়েশা আমায় বলল তর কি বাসায় তাড়া আছে? আমি: না ঘন্টা চারএকের মত থাকতে পারব, বেশি দেরি হলে আবার মা চিন্তা করবে। আয়েশা: কবির? কম্পিউটারটা অন কর আর ভাল দেখে গান দে। আমি: লিনকিন পার্ক চলবে? বাংলা নতুন চটি গল্প আয়েশা: দেত, এখন গান শোনবে কে, জাস্ট একটা আওয়াজ দরকার। এই বলে আয়েশা আমাকে কম্পিউটারের চেয়ার থেকে দাড় করিয়ে জড়িয়ে দরল আর এই বার ও নিজেই আমাকে কিস করতে লাগল। আমার হাত ততক্ষনে ওর দুই দুধ ধরে ফলেছে। টি শার্টের উপর দিয়ে টিপতে সমস্যা হচ্ছিল দেখে আয়েশা নিজেই ওটা খুলে দিল। সাথে সাথে ওর বুকের আসল সৌন্দর্য্য বেরিয়ে এল। ইচ্ছি হচ্ছিল ওর দুধের উপর মুখ রেখে শোয়ে থাকতে। আমিই জুড় করে ওকে পিছন থেকে জড়িয়ে দরলাম যাতে দুধ মজায় মজায় টেপা যায়। এবার আয়েশা আর কিস দিতে পারছিলনা। ও টেপার ফলে শুধু ছটফট করছিল। আয়েশা নিজেই একটা হাত ওর ভোদায় নিয়ে রাখল আর বলল বাংলা নতুন চটি গল্প আয়েশা: কবির, মালিশ পরে করিস এখন একটু কর প্লিজ। এর পর তোর ইচ্ছামত তুই মালিশ করিস। আমি: আমিত জানি মালিশ না করলে তৃপ্তি পাবি না। আয়েশা: সেটা আমিও জানি কিন্তু আমার এখন তৃপ্তি দরকার না আর তুইতো এখনি যাচ্ছিস না পরে আবার না হয় মালিশ করে তৃপ্তি নেওয়া যাবে। আয়েশা নিজেই আমাকে বিছানায় শুয়েইয়ে দিল আর পেন্ট খুলে নিল। তার পরে বালিশের নিচ থেকে কনডম বের করে এনে আমার ওটায় পরিয়ে দিল। একদম পারফেক্ট, আমি জিজ্ঞাস করলাম আগে কি এই কাজ করেছিস? কেন বলত? বাংলা নতুন চটি গল্প আমি: এত সুন্দর ভাবে লাগাতে পারলিতো তাই। আমি যতদূর জানি অনেক ঝামেলার কাজ এটা। আয়েশা: থ্রিএক্স কি জন্যে দেখি তাহলে? একটা কথা কি জানস, কোন ছেলে আমার দিকে আজও তাকানোর সাহস পাই নায়। এমনকি কোন অজুহাতে কেও আমার দুধে স্পর্শও করতে পারে নাই। তুই প্রথম করলি সব আজ। এবং এটাই জানি যে আমি না বললে তুই কোনদিনও চায়তা আমার কাছে এইসব। আমি: তোরে যে ভাল লাগে আর হা আমি যে মাঝে মাঝে তোর দুধের দিকে তাকায় তুই কি রাগ করস। আয়েশা: মাঝে মাঝে না। ক্লাসে তুই সারের চাইতে আমার দুধের দিকে বেশি তাকাশ। আমি: তার মানে তুই সব জানস? বাংলা নতুন চটি গল্প আয়েশা: শুধু তুই না সুযোগ পেলে অনেকেই দেখে নেয় তবে তুই বেশি দেখস। আমার খারাপ লাগে না। কেন যেন তোকে ভাল লাগে তাই বলি কিছু। আর কথা না, চুপ কর। কবির তোরটা কিন্তু বেশ বড়রে। আমি: লজ্জা দিস না যা করার তা তাড়া তাড়ি কর। আয়েশা: কি আমার টা দেখবি না? আমি: এই দিকে আয় আমি তোরটা টাউজার খুলে দেই। আমি বলার সাথে সাথেই আয়েশা আমার কাছে আসল আর শুয়ে থেকেই ওর টাওজার খোলে দিলাম। সত্যি বলতে দেখি মেয়েদের থ্রি এক্স দেখতে দেখতে আমাদের দেশের মেয়েদের শরীর নিয়ে আমার বাজে একটা ধারণা ছিল। কিন্তু আয়েশা বিদেশী র্পণ স্টারের চাইতে কম না কোথাও কোন মেদ নেই। বেশি ক্ষণ দেখার সুযোগ হল না কারণ আমার সোনাটা সেই পার্ক থেকে দাড়ানো আর আয়েশাও জলদি করছিল। আয়েশা আমার উপরে এসে করার চেষ্টা করল, বেশ কয়েক বার ট্রাই করেও ডুকাতে পারল না ওরটা। আমি বললাম এই ভাবে কেন, তুই শো আমি তোর উপরে উঠে করি। ও বলল যে কালকে আপুতো করতে ছিল। তাই আমিও চাচ্ছিলাম করতে। বাংলা নতুন চটি গল্প আমি: আরে আজত প্রথম দেখ ডুকাতেই কত ঝামেলা হয়। পরে একদিন করা যাবে ওই ভাবে। আয়েশা: আচ্ছা আমি শুচ্ছি, দেখিস বেশি ব্যাথা দেসনা। কবির তোরটা কি পুরোটাই ডুকবে? আমি: আমিত আগে করি নাইরে, বলবো কি করে। তবে চেষ্টা করবো ডুকানোর। আয়েশা: যদি না ডুকে তবে জোর করিস না, ব্যাথা লাগতে পারে। যদিও প্রথমবার কিন্তু বেশি কষ্ট করতে হল ঢুকাতে, প্রথম ঠাপেই অর্থেকটা ডুকে গেল আর আয়েশা ক্যাত করে একটা আওয়াজ করে আমার দিকে তাকিয়ে থাকল। বুঝতে পারলাম ব্যাথা পেয়েছে। তার পরের পাঁচ মিনিট যে স্বর্গে ছিলাম দু’জনেই। বাংলা নতুন চটি গল্প সেই দিন আরো চার ঘন্টা ওদের বাসায় ছিলাম। একবারে দুপুরে খেয়ে এসেছি। পরে যত ক্ষণ ছিলাম প্রায় সব সময় ওর দুধে আমার হাত ছিল। এত ক্ষণের মাঝে একবারো ওর বোন আমাদের রুমে আসে নাই। দুপুরের খাবার খাওয়ার জন্য যখন ডাকতে এলো তখন আয়েশা আর ঠেঙ্গের উপর শুয়ে সিনেমা দেখছিল আমার সাথে। আপু আমাদের দেখে বলল এই তোরা খেতে আয়।
  15. అలా ఒక పదిహేను నిమిషాల పాటు ఏమీ మాట్లాడుకోకుండా మౌనంగా బెడ్ పైన ఒరిగిపోయారు ఇద్దరూ. కాసేపయ్యాక బెడ్ పైనే ఆశ మెల్లిగా సరిత వైపుకు తిరిగి ఆమె కళ్ళలోకి చూస్తూ, “ఏమైందే, ఈ రోజు మనిద్దరికీ? అసలు మనమేం చేస్తున్నామో నాకేమీ అర్థం కావడం లేదు” అని అడిగింది. “నాకంతా అర్థమయ్యిందే, మనకు వయసొచ్చింది.., వయసుతో పాటు ఆశలు పెరిగాయ్.., పెరిగిన ఆశలకు రెక్కలొచ్చాయ్.., మన విష్ లిస్ట్ డైరీలో కొత్త కొత్త కోరికలు రాసుకొని వాటిని తీర్చుకోవల్సిన సమయమొచ్చింది” అని చిన్నగా నవ్వుతూ చెప్పింది సరిత. “ఇలా చేయడంలో ఇంత సుఖముందని ఇంతకుముందెప్పుడు తెలియదే.., అయినా నీకెలా తెలుసే ఇవన్నీ..?” అని ఆశ్చర్యంగా అడిగింది ఆశ. “చెప్తా.., చెప్తా.., టూ వీక్స్ నుండి రోజూ రాత్రి పోర్న్ మూవీస్ చూస్తున్నా” అని చెప్పింది సరిత. “ఏంటీ..! టూ వీక్స్ నుండి రోజూ చూస్తున్నవా..! మరి నాకు ఒక్కసారి కూడా చెప్పలేదేంటే?” అని చిరుకోపంతో అడిగింది ఆశ. “చెప్పడమెందుకులే, ఈ రోజు సర్ప్రైస్ గా నీకు కూడా చూపిద్దామనుకున్నానే, కానీ నువ్వు థియరీ చదవకముందే సగం ప్రాక్టికల్స్ ఫినిష్ చేసేసావ్” అని కొంటెగా నవ్వింది సరిత. “ఇంతకీ రోజూ రాత్రి లాప్టాప్ లో పోర్న్ చూస్తున్నావా..? ఈ విండో పోర్న్ చూస్తున్నావా..?” అని చిలిపిగా ప్రశ్నించింది ఆశ. “అమ్మా.., తల్లీ.., నన్ను నమ్మవే, ఈ విండో సినిమా మాత్రం నాకు కూడా సర్ప్రైసే, నీకు తెలుసు కదా ఇది నా బెడ్ రూమ్ కాదని, ఇది మా స్టోర్ రూమ్ కమ్ గెస్ట్ బెడ్ రూమ్” అంటూ సంజాయిషీ ఇచ్చుకుంది సరిత. “ఇంతకీ ఇలా మాట్లాడుకుంటూనే ఉందామా..? లేకపోతే నా కోసం రెడీ చేసిన సర్ప్రైస్ ఏమైనా చూపిస్తావా..?” అని చిలిపిగా అడిగింది ఆశ. “అమ్మ దొంగా.., ఎంత ఆశ, మా బుజ్జి ఆశకు, లాప్టాప్ హాల్లో ఉంది, అక్కడికే వెళ్దాం రా..,” అంటూ బెడ్ పైనుండి లేచింది సరిత. అంతవరకూ ఇద్దరూ చీకట్లో పడుకొని ఉండడంతో గమనించలేదు కానీ, సరిత లేచి నిలబడగానే మసక వెలుతురులో ఆమె టీ-షర్ట్ మాత్రమే వేసుకొని ఉండి ఇందాక స్కర్ట్ విప్పేసినందున నడుము కింది భాగంలో ఏ ఆచ్ఛాధన లేకుండా ఉండడం గమనించిన ఆశ “వెళ్దాం కానీ, నువ్వు వెళ్ళక ముందే సినిమా చూపించకే, ముందు స్కర్ట్ వేసుకోవే” అని ఆట పట్టిస్తూ నగ్నంగా ఉన్న సరిత పిర్రపై గట్టిగా గిల్లి తుర్రుమని హాల్లోకి పరిగెత్తి సోఫాలో కూర్చుంది. చీకట్లో ఫ్లోర్ పైన పడిఉన్న స్కర్ట్ వెతుక్కుని వేసుకుంటూ హాల్లోకి వొచ్చిన సరిత “ఏంటే, అలా గిల్లేసావ్, నా హాట్ బట్టక్స్ చూసి మూడొచ్చేసిందా ఏంటి?” అంటూ ఆశకు తొడపాశం పెట్టి, టీపాయ్ పైన ఉన్న లాప్టాప్ ఆన్ చేసి “చెప్పవే, ఏ స్టైల్ పోర్న్ కావాలో నీకు?” అని అడుగుతూ ఆశ పక్కనే సోఫాలో కూర్చుంది. “నాకన్ని విషయాలు తెలిస్తే నేనే నీకు సర్ప్రైస్ ప్లాన్ చేసేదాన్ని కదే, ఈ స్టైల్స్ గీల్స్ ఏమీ నాకు తెలియదు కానీ ఏదో ఒకటి నువ్వే పెట్టు” అని నిట్టూరుస్తూ సమాధానం చెప్పింది ఆశ. “సరే, నేనే ఏదో ఒకటి సెలెక్ట్ చేస్తాలే గానీ, డ్రింక్ మిక్స్ చేస్తా, ఇంకో పెగ్గు లాగిస్తూ మూవీ చూద్దాం” అంటూ రెండు గ్లాసుల్లో డ్రింక్ మిక్స్ చేసి ఆశకు ఒక గ్లాస్ అందించి తను ఒక గ్లాస్ తీసుకుంది. తర్వాత ఇందాక కొద్దిసేపటి కిందటి అనుభవం గుర్తుకు వచ్చి, ఆశను మరింత వేడెక్కించాలని ఒక గంటన్నర నిడివి ఉన్న మాంచి హాట్ హాట్ లెస్బియన్ సీన్ ఒకటి స్టార్ట్ చేసింది సరిత. ఇద్దరూ మూడవ పెగ్గు తాగుతూ మూవీ చూడటం ప్రారంభించారు. మూవీ మొదలవగానే చిక్కని పాల నురగ లాంటి శరీరవర్ణంతో, తెల్ల రంగు షార్ట్ ఫ్రాక్స్ వేసుకున్న ఇద్దరు దేవకన్యల్లాంటి అందగత్తెలు ఎదురెదురుగా నిలబడి నోట్లో నోరు పెట్టి గాఢంగా ముద్దుపెట్టుకుంటున్నారు. మూవీలో పోర్న్ స్టార్స్ ముద్దాడుకుంటున్న తీరు అచ్చంగా ఇందాక తామిద్దరూ చేసిన మాదిరిగానే అనిపిస్తోంది ఆశకు. మూవీలో వాళ్ళు చేస్తున్న రకరకాల శృంగార విన్యాసాలతో వెంటనే వేడెక్కిపోయారు ఇద్దరూ. ఆశ మొదటిసారి పోర్న్ చూస్తున్నానన్న కుతూహలం వల్ల కనురెప్పలు వాల్చకుండా మూవీ చూడడంలో నిమగ్నమైపోయింది. ఆశ అలా పూర్తిగా మూవీలో లీనమై చూస్తూనే యాదృచ్చికంగా ఒక్కసారి సరిత వైపు చూసింది. సరిత ఒక కాలు సోఫాపైన పెట్టి స్కర్ట్ తొడల వరకు లాక్కొని కుడి చేతిని తొడల మధ్య పెట్టుకొని వేగంగా ఆడిస్తోంది. ఆశ ఆమెను చూస్తూనే “ఏయ్ పాడుపిల్లా, ఏంటే ఇది, యేం చేస్తున్నావే సిగ్గు లేకుండా…” అని చిరుకోపం నటిస్తూ అడిగింది “ఇంతదాకా వచ్చాక ఇంకా సిగ్గేంటే, ప్లీజ్ ఇంకా ఏమైనా చేద్దామే, తట్టుకోలేకపోతున్నా, ఇక ఆపుకోవడం నా వల్ల కావడం లేదు” అంటూ ఆశను తన పైకి లాక్కుంది. “ఇందాకే అయ్యింది కదే, ఇప్పుడే.., మళ్ళీనా..,” అంటూ ఆశ ఇంకా ఏదో చెప్పేలోపే సరిత తన రెండు చేతులను ఆశ తలపైన వేసి ఆమె ముఖాన్ని తన వైపుకు లాక్కొని తన పెదవులతో ఆమె పెదవులను మూసేసి ఆమె అధరామృతాన్ని జుర్రుకోసాగింది. అలా గాఢంగా ముద్దుపెట్టుకుంటూనే సరిత తన చేతుల్ని ఆశ తలపైనుండి తీసి ఆమె వీపుపైన వేసి నిమురుతూ మెల్లిగా కిందికి జారుస్తూ పిర్రలపై వేసి “అబ్బా ఎంత మెత్తగా ఉన్నాయే ఆశా నీ…..!” అంటూ నైట్-ప్యాంట్ పైనుండే ఆమె ఎత్తైన పిర్రలను కసిగా నలిపేస్తోంది. ఆశ కాస్త సిగ్గుపడుతున్నా , అప్పటికే బాగా వేడెక్కి ఉండడంతో “ఆహ్..!” అంటూ మూలగడం ప్రారంభించింది. అలా కొద్దిసేపు సరిత నైట్-ప్యాంట్ పైనుండే ఆశ పిర్రలను నలిపాక, నైట్-ప్యాంట్ ను పట్టుకొని మోకాళ్ళ వరకు లాగేసి, నగ్నంగా ఉన్న ఆమె పిర్రలను మరింత కసిగా నలిపేస్తోంది. ఒక్క క్షణం చేస్తున్న పనిని ఆపి లాప్టాప్ వైపుకు చూసింది సరిత. మూవీలో ఒక అమ్మాయి ఇంకో అమ్మాయి సల్లు పిసుకుతూ ఆబగా చీకుతోంది. సరిత అది చూస్తూనే ఆశ టీ-షర్ట్ పట్టుకొని పైకి లాగి, బ్రా హుక్కుల్ని ఊడదీయడంతో బయటపడ్డాయి గుండ్రని బిగుతైన ఆశ సల్లు. సరిత తన చేతులను ఆశ సల్లపై వేసి పిసకసాగింది. అలా కొద్దిసేపు చేసిన తర్వాత, ఆశ సల్లు తన నోటికి అందేవిదంగా ఆశను కొంచెం పైకి లాక్కుని ముచ్చికలను నోట్లోకి తీసుకొని పెదవులతో మెత్తగా నలుపుతూ, నాలుకతో వాటి చుట్టూ సున్నాలు చుడుతోంది. అలా ఆశ సల్లను మార్చి మార్చి చీకుతూనే మరొక్కసారి లాప్టాప్ వైపు దృష్టి సారించింది సరిత. మూవీలో ఒక అమ్మాయి నగ్నంగా తొడలు తెరుచుకుని సోఫాలో కూర్చొని ఉంటే, ఇంకో అమ్మాయి ఆమెకెదురుగా నేలపైన కూర్చుని తెరుచుకున్న తొడల మధ్యన తల వంచి ఆమె పూరెమ్మలను నాకుతోంది. అది చూసిన సరిత వెంటనే ఆశను పైకి లేపి సోఫాలో కూర్చోబెట్టి మోకాళ్ళ వరకు లాగిఉన్న ఆమె ప్యాంట్ ను ప్యాంటీతో సహా పూర్తిగా కిందికి లాగేసి ఆమె తొడలను ముద్దాడసాగింది. అలా ముద్దాడుతూనే తొడలను మరింత విడదీసి ఆశ నిలువు పెదాలను తన పెదాలతో సుతారంగా స్పృశించింది సరిత. సరిత చేసిన ఈ పనితో ఆశ ఒళ్ళంతా ఒక్కసారిగా పులకరింతతో జల్లుమని “మ్మ్.., హా..,” అంటూ మత్తుగా మూలుగుతోంది. సరిత అలా నెమ్మదిగా ఆశ పువ్వును తన పెదాలతో స్పృశిస్తూనే, నాలుకతో పూరెమ్మలను రుద్దుతోంది. తర్వాత సరిత తన రెండు చేతులతో ఆశ పూరెమ్మలను విడదీసి నాలుకను రెమ్మల మధ్యనించి లోపలికి పోనిచ్చి లోపలి గోడలను రుద్దసాగింది. అలా చేయడంతోనే ఆశలో ఆవేశం తారాస్థాయికి చేరి తన రెండు చేతులను సరిత తల పైన వేసి ఆమె ముఖాన్ని తన పువ్వుకేసి గట్టిగా అదుముకొంది. అంతలోనే సరిత తల పైకెత్తి ఆశతో “ఆశ, ఎలా ఉందే?బాగుందా?” అని అడిగింది. “చాలా బాగుంది, అలాగే చేయవే ” అంటూ మత్తుగా సమాధానమిచ్చింది ఆశ. “చేస్తా, కానీ ఇలా ఎంతసేపు చేసినా నీ వేడి చల్లారుతుంది, మరి నా సంగతేంటే?” అని కొంటెగా అడిగింది సరిత. “ఏమ్ చేయాలో చెప్పవే, చేస్తా” అంటూ సమాధానమిచ్చింది ఆశ. “చెప్తా, కానీ ఇక్కడ కంఫర్టబల్ గా లేదు, బెడ్ రూమ్ లోనికి వెళ్దామ్ రా” అంటూ లాప్టాప్ తీసుకొని ఇద్దరూ బెడ్ రూమ్ లోనికి వెళ్ళారు. బెడ్ రూమ్ లోకి వెళ్తూనే సరిత తన డ్రెస్ పూర్తిగా విప్పేసుకొని, ఆశ టీ-షర్ట్ కూడ విప్పేసి బెడ్ పైన పడుకోబెట్టి, తన వీపుని ఆశ ముఖంవైపుకు ఉంచి గుండెల మీదుగా అటో కాలు ఇటో కాలు వేసి కూర్చొని ఆశ తొడల మధ్యకు తన తలను వంచింది. అలా కూర్చోవడంతో సరిత తొడలు ఆశ చెంపలకు ఆనుకొని, ఆశ ముఖానికి ఎదురుగా దర్శనమిచ్చింది సరిత పువ్వు. ఆశ తొడల మధ్యకు తల వంచిన సరిత, ఆశ పూరెమ్మలను రెండు చేతుల్తో విడదీసి మధ్యన నాలుక పెట్టి ఆబగా నాకుతోంది. సరిత ఉద్ధేశ్యం అర్థం చేసుకున్న ఆశ కూడ రెండు చేతులను సరిత పిర్రలపై వేసి పట్టుకొని సరిత పువ్వును దగ్గరకు లాక్కొని నోట్లోకి తీసుకుంది. ఇద్దరూ విపరీతమైన ఆవేశంతో ఒకరి పువ్వును ఒకరు నాకుతుండడంతో, ఆ గది వారి మూలుగుల శబ్దాలతో నిండిపోయింది. అలా ఒక పది నిమిషాలు గడిచాక ఆశ పైనుండి పక్కకు దొర్లి బెడ్ పైన వాలిపోయింది సరిత. అప్పటికే బాగా అలిసిపోయి ఉండడంతో ఇద్దరూ అలాగే నిద్రలోకి జారుకున్నారు. రాత్రి పడుకోవడం చాలా ఆలస్యమవడంవల్ల, పైగా డ్రింక్ చేసి ఉన్నందువల్ల, అంతకంటే ముఖ్యంగా మొదటిసారి బాగా అలిసిపోయినందువల్ల ఇద్దరూ రాత్రంతా ఏనుగులు అరిచినా మేలుకోలేనంత గాఢ నిద్రలో మునిగిపోయారు. కాలింగ్ బెల్ మోగుతున్న శబ్దం వినిపించడంతో సరితకు హఠాత్తుగా మెలుకువ వొచ్చి కళ్ళు తెరిచింది. కిటికీ అద్దాల నుండి వస్తున్న వెలుతురును బట్టి అప్పటికే బాగా తెల్లవారిపోయినట్టు అర్థం అయ్యింది. కళ్ళు తెరుస్తూనే అక్కడ కనిపించిన ఆ దృశ్యం చూడగానే సరితకు ఒళ్ళంతా ఒక్కసారిగా జల్లుమంది. వారిద్దరి శరీరాలపై నూలుపోగు కూడా లేకుండా పూర్తిగా నగ్నంగా బెడ్ పైన పడుకొని ఉన్నారు. హడావిడిగా బెడ్ పక్కన పడిఉన్న డ్రెస్ తీసుకొని వేసుకుని, ఒక బ్లాంకెట్ తీసుకొని ఆశపైన కప్పుతూ, వాల్ క్లాక్ వైపు చూసింది సరిత, సమయం ఉదయం తొమ్మిది అవుతోంది. మళ్ళీ కాలింగ్ బెల్ మోగడంతో చకచకా మెయిన్ డోర్ దగ్గరికి వెళ్ళి పీప్ హోల్ లో నుండి తొంగి చూసి ఒక్కసారిగా అవాక్కయ్యింది, ఎందుకంటే వచ్చిన వ్యక్తి ఎవరో కాదు, నిన్న ఆటోలో వాళ్ళ వెనకాల కూర్చొని, వాళ్ళిద్దరి పిర్రల మధ్యన కాలు పెట్టి తడిమిన రౌడీ వెధవ. “వీడికి ఇల్లెలా తెలిసింది..? కొంపదీసి నిన్న మమ్మల్ని ఫాలో చేసుకుంటూ వచ్చాడా..? నిన్న ఆటోలో జరిగింది ఎవరితోనైనా చెప్తాడా..? బ్లాక్ మెయిల్ ఏమైనా చేస్తాడా..? ఛీ, నిన్న ఆటోలోనే వెనక్కి తిరిగి వెధవను అటో చెంప ఇటో చెంప వాయించాల్సింది, కొద్దిసేపటి సుఖానికి కక్కుర్తి పడితే, ఇప్పుడు కొంపలు మునిగేలా ఉన్నయ్” ఇలా ఏదేదో ఆలోచిస్తోంది సరిత. మళ్ళీ మళ్ళీ కాలింగ్ బెల్ మోగుతోంది కానీ సరితకు డోర్ ఓపెన్ చేయడానికి ధైర్యం చాలడంలేదు. భయంతో గజగజా వణికిపోతోంది సరిత. కాళ్ళూ చేతులు ఆడటం లేదు. గుండె వేగంగా కొట్టుకుంటుంది. కళ్ళనుండి ధారగా కనీళ్ళు కారిపోతున్నాయి. ఏం చేయాలో తెలియని స్థితిలో మెయిన్ డోర్ దగ్గరే నిలబడిపోయింది. ఒక ఐదు నిమిషాల తర్వాత కాలింగ్ బెల్ మోగడం ఆగిపోవడంతో మళ్ళీ ఒకసారి పీప్ హోల్ నుండి తొంగి చూసి, వచ్చినవాడు వెళ్ళిపోయాడని నిర్ధారించుకున్నాక మనసు కాస్త కుదుటపడి ఊపిరి పీల్చుకుని వొచ్చి హాల్లో సోఫాలో కూలబడింది. సోఫా పక్కన రాత్రి విప్పి పడేసిన ఆశ బట్టలన్నీ పడి ఉన్నాయి. వాటిని తీసుకొని బెడ్ రూమ్ కి వెళ్ళి ఆశను తట్టి నిద్ర లేపి బట్టలు వేసుకోమని చెప్పి, హాల్లోకి వెళ్ళింది. ఆశ నిద్ర లేస్తూనే తన శరీరంపై బట్టలేమీ లేకపోవడంతో సిగ్గుపడుతూనే చకచకా బట్టలు వేసుకుని హాల్లోకి వెళ్ళి సరిత పక్కన సోఫాలో కూర్చుంది. ఆశ వచ్చి పక్కన కూర్చోగానే సరిత ఇందాకటి సంఘటన గురించి చెప్పేద్దాం అనుకొని, మళ్ళీ ఆశను కూడా భయపెట్టడం ఇష్టంలేక చెప్పకుండా అలాగే ఉండిపోయింది. సరిత పక్కన కూర్చున్న ఆశ ఆమె భుజాల చుట్టూ ఆప్యాయంగా చేతులు వేసి, బుగ్గపైన చిన్నగా ముద్దుపెట్టి “సరిత, రాత్రి జరిగిందంతా తలుచుకుంటుంటే అద్భుతంగా అనిపిస్తోందే, నాకైతే అంతా ఒక కలలా ఉందే” అని చెప్పింది. ఆశ చెప్పినదానికల్ల “ఊ..,” కొడుతుంది కానీ సరితకు ఇప్పుడు మనసు మనసులో లేదు. అయినా అదేమీ గమనించకుండా మళ్ళీ “సరిత ఈ రోజు మధ్యాహ్నం ఏదైన హోటెల్ కి లంచ్ కి వెళ్దామా?” అని అడిగింది ఆశ. మళ్ళీ ఎక్కడ ఆ రౌడీ వెధవ కనబడతాడోనన్న భయంతో సరితకు ఇంట్లోనుండి బయటికి వెళ్ళాలంటేనే భయంగా ఉంది. కానీ అసలు విషయం చెప్పకుండా “బయటికి వెళ్ళడం ఎందుకే, ఫోన్ చేసి హోమ్ డెలివరీ తెప్పించుకుందాం లేకపోతే వాచ్-మన్ ను పంపించి తెప్పించుకుందాం” అని చెప్పింది సరిత. “సరే, నేను ఫ్రెష్ అయ్యి వస్తా” అంటూ ఆశ బాత్ రూమ్ లోనికి వెళ్ళింది. ఆశ బాత్ రూమ్ లోనికి వెళ్ళగానే మళ్ళీ కాలింగ్ బెల్ మోగింది. కాలింగ్ బెల్ మోగిన ప్రతీసారీ సరితకు గుండె ఆగినంత పని అవుతోంది. మెయిన్ డోర్ దగ్గరికి వెళ్ళి ఎవరొచ్చారో చూద్దామని మళ్ళీ పీప్ హోల్ నుండి తొంగి చూసింది, వచ్చింది ఎవరో కాదు, మళ్ళీ వాడే.
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